जालंधर [शाम सहगल]। किशनपुरा क्षेत्र के श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर के पास एक विशाल तालाब है, जो सदियों से सूखे तालाब के नाम से जाना जाता है। कहते हैं यह तालाब एक साधु के शाप से सूख गया था, फिर कभी नहीं भरा। यह शाप 1984 में वरदान कैसे साबित हुआ, आइए जानते है। अगर सूखा है तो तालाब कैसा? लेकिन यह हकीकत है। जालंधर के किशनपुरा चौक स्थित श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर के पास विशाल जगह पर कभी बड़ा सा तालाब था, जो इस समय पूरी तरह से सूखा हुआ है। खास बात यह है कि इस तालाब में भले कितना भी पानी डाल दिया जाए, यह सूखा ही रहता है।

शापित होने के कारण सूखा तालाब

श्री सिद्ध बाबा बालक नाथ मंदिर के संचालक राकेश भास्कर बताते हैं कि धार्मिक पुस्तकों के मुताबिक इस तालाब को साधु का श्राप मिला था। इसके चलते यह सूख गया। दरअसल, इस तालाब में एक साधु कमंडल भरने आए तो इस दौरान उनका कमंडल तालाब में गिर गया। उस साधु को अपनी तपस्या पर अभिमान था। उन्होंने इस घटना से खुद का अपमान महसूस किया। इस पर क्रोधित होकर उन्होंने तालाब को हमेशा के लिए सूखा रहने का श्राप दे दिया। इसके बाद से इस तालाब में भले कितना भी पानी डाल दिया जाए, यह सूखा ही रहता है।

तालाब की सेवा से हुआ मंदिर का विकास

जालंधरः सूखा तालाब के पास निर्मित शिव मंदिर। बाद में यहां बाबा बालक नाथ मंदिर और तीन मंजिला जंजघर भी तैयार किया गया।

किशनपुरा इलाका तब शहर से बाहर था। तालाब को शाप मिलने के बाद यहां पर आने वाले लोगों की आमद भी घट गई। मंदिर के ऑर्गनाइजर सतपाल सत्ती बताते है कि तीन दशक पूर्व पंडित रामनाथ जी रामको इंजीनियरिंग वालों की अध्यक्षता में तालाब की सेवा शुरू की गई। इसके बाद लोग उनके साथ जुड़ने लगे। इसके चलते तालाब के रिपेयर के बाद यहां पर करीब एक करोड़ रुपये की लागत से शिव मंदिर का निर्माण करवाने के उपरांत बाबा बालक नाथ का मंदिर व तीन मंजिला जंजघर तैयार किया गया। यहां पर हर रविवार लंगर लगाया जाता है। वहीं तालाब में आकर्षक पार्क बनाया गया है। यहां पर रोजाना सुबह व शाम को योग क्लास लगती है। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक तालाब की सेवा व्यर्थ नहीं जाती, जिसके चलते भक्तजन पूरे उत्साह के साथ तालाब की सेवा करने आते हैं।

 

 

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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