विपिन कुमार राणा, अमृतसर। पुरानी सड़क ही ठीक थी। पिछले दिनों पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने रणजीत एवेन्यू की सड़कों का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इस पर लोगों ने भी राहत की सांस ली। बोले, अब उनकी राह और सुगम होगी, पर जैसे ही सड़क का काम शुरू हुआ तो हालात पहले से भी बदतर हो गए। गुणवत्तापूर्ण सामग्री न होने की वजह से जहां पहले गाडिय़ां सुचारू रूप से चलती थी, वह सड़क बनने पर अब बबलिंग करने लगी हैं। हो-हल्ला हुआ तो पार्षद महोदय ने मौके पर पहुंचकर देखा और हकीकत में मामला सही पाए जाने पर उसे बंद करवा दिया। अगले दिन ठेकेदार ने लीपापोती करते हुए काम निपटा दिया, पर हालात नहीं सुधरे। यह देखते हुए मार्केट के दुकानदारों ने कहना शुरू कर दिया कि इससे तो अच्छा पुरानी सड़क ही ठीक थी, कम से कम गाड़ियां बबलिंग तो नहीं करती थीं, बस दो-चार गड्ढों से ही बचना पड़ता था।

फाइनांसर तो एक ही है

शहर के एक युवा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वह बेहद सक्रिय रहते हैं और अकसर कई अहम मामलों पर नेताओं को घेरते दिखाई देते हैं। हाल ही मेें उन्होंने कांग्रेस पार्टी के एक सत्ताधारी नेता की जमीन और उसमें सरकारी सड़क बनाकर लाभ लेने की कवायद के प्रकरण को उठाया। अब इसकी जांच हो, इसके लिए उन्होंने कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी के नेताओं तक पूरे मामले की फाइलें पहुंचा दीं। इस मामले की छह पेज की रिपोर्ट बनाने का खामियाजा भी अधिकारी को ट्रांसफर के रूप में भुगतना पड़ा। इसके बाद भी जब जांच नहीं हुई तो सामाजिक कार्यकर्ता से किसी ने पूछा, इतना मामला उठाने के बावजूद भी कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, आखिर माजरा क्या है, तब तपाक से उन्होंने जवाब दिया कि कार्रवाई कैसे हो, पार्टी चाहे कोई भी हो, सबके फाइनांसर तो एक ही हैं। अब प्रोजेक्ट रुक गया है, यही बड़ी कार्रवाई है।

बूथ तो हिले ही नहीं

नगर सुधार ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन दिनेश बस्सी ने अपने कार्यकाल में करीब छह वेरका बूथों की अलाटमेंट करते हुए कहा था कि ये नियमों के अनुसार ही दिए हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद फुटपाथ पर ये बूथ कैसे दे दिए गए, इस पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, पर हुआ कुछ नहीं। चेयरमैन पद पर दमनदीप उप्पल के आसीन होने के बाद मामला उठा तो उन्होंने पहली ही प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि फुटपाथ से अवैध बूथ हटाएंगे। कई बार दावे को दोहराया। ट्रस्ट सदन की बैठक में भी हुंकार भरी, पर बूथ जस के तस नहीं हुए। अब तो ट्रस्ट कार्यालय आने वाले लोग भी चुटकी लेने लगे हैं। कह रहे हैैं कि दावे तो काफी कुछ बनाने के पूरे नहीं हुए तो ये ढहाए कहां जाएंगे, बूथ तो खड़े रहेंगे। पहले भी नेता इन्हें शह देते रहे हैं और अब भी देते रहेंगे।

टाइलों पर झाडू नहीं लगवा पाई कांग्रेस

अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के एक मंत्री थे। उन पर टाइलों की फैक्ट्री होने के कई बार आरोप लगे। इसे विरोधियों ने चुनावी मुद्दा भी बनाया, पर नेताजी की टाइलों की फैक्ट्री न तो अमृतसर में और न ही पंजाब में किसी को मिली। पिछले दिनों एक शादी समारोह में राजनीतिक पार्टियों के अहम नेता इक्ट्ठे हुए तो उसमें फिर से इस फैक्ट्री पर चर्चा शुरू हो गई। इसी दौरान पूर्व मंत्री के समर्थक ने चुटकी लेते हुए कहा कि आपके आरोपों की हवा तो तभी निकल गई थी, जब किसी को फैक्ट्री नहीं मिली, हां टाइलों का फायदा यह हुआ कि शहर में धूल-मिट्टïी कम हो गई। तभी दूसरे व्यक्ति ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि डस्ट कम तो हो गई थी, पर कांग्रेस सरकार से टाइलों पर झाड़ू तक नहीं मरवाया गया, इसीलिए धूल-मिट्टïी फिर से हो गई है। दोनों की चर्चा पर बाकियों ने भी खूब ठहाके लगाए।

Edited By: Vinay Kumar