जागरण संवाददाता, जालंधर

आवारा कुत्तों का आतंक शहर में ही नहीं गांवों में भी गंभीर रूप लेता जा रहा है। निकटवर्ती गांव में कंगनीवाल में दूध लेने के लिए गई महिला व उसके बच्चे को आवारा कुत्तों हमला कर बुरी तरह से घायल कर दिया। घायल मां व बच्चे को ईलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

कंगलीवाल निवासी मदन लाल ने बताया कि उनकी पत्नी कमलेश रानी (36) एक साल की बेटी पवन को अपनी गोद में उठा कर गांव के निकट निकट दूध लेने जा रही थी। रास्ते में हड्डा रोड़ी पर बैठे आधा दर्जन के करीब आवारा कुत्तों ने उन पर हमला कर दिया। उनकी पत्नी ने शोर मचाया तो आसपास के लोगों ने इकट्ठे होकर कुत्तों को पत्थर मार मां-बच्ची को बचाया। हालांकि लोगों के आने तक कुत्ते महिला के मुंह, बाजू व टांगों बुरी तरह से नोच चुके थे। वहीं एक साल की बच्ची को भी घायल कर दिया। इलाका निवासियों ने घायल मां बच्चे को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। इलाका निवासियों का कहना है कि आवारा कुत्ते गांव के कई लोगों को घायल कर चुके हैं।

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कुत्ते पर रखें पूरी निगरानी

सिविल अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. एलफर्ड की मानें तो मेडिकल सिद्धांतों के मुताबिक कुत्ते पर दो सप्ताह तक नजर रखनी जरूरी है। अगर कुत्ता पागल हो जाए या मर जाए तो मरीज की जान पर खतरा मंडराने लगता है। लाईलाज रेबीज होने पर मरीज हाड्रोफोबिया का शिकार हो जाता है।

-कुत्ता काटने के तुरंत बाद जख्म को कपड़े धोने वाले सोडे व साबुन से बार-बार धोएं।

-टिचर आयोडिन या लाल दवाई लगाकर जख्म को नंगा छोडें।

- मरीज को कुत्ता काटने पर 24 घंटे के भीतर टेटनेस का इंजेक्शन लगाने के साथ व एंटी रेबिज टीकाकरण शुरू करवाएं।

Posted By: Jagran

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