जालंधर [शाम सहगल]। 25 मार्च से शुरू होने जा रहे चैत्र के नवरात्र इस बार खास होंगे। लंबे समय के बाद एक साथ चार सर्वार्थ सिद्धि योग बनने जा रहे हैं। इसके साथ ही इस बार नवरात्र में पांच रवि योग व एक दिपुष्कर योग भी बनने जा रहा है, जिससे इस बार सभी नवरात्र शुद्ध है। यही नहीं, इस बार नवरात्र पूरे होंगे। यानी नौ दिन लगातार दुर्गा मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी। ज्योतिषियों के मुताबिक नवरात्रों में किसी भी दिन शुभ कार्य किया जा सकता है।

बताया जाता है कि चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन ही मां दुर्गा का जन्म हुआ था। कई जगहों पर चैत्र नवरात्र के प्रथम दिन को मां दुर्गा के जन्म दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।

हिंदू नववर्ष का भी बना सुमेल

चैत्र के नवरात्र में इस बार हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होने जा रही है। इस बारे में श्री हरि दर्शन मंदिर अशोक नगर के प्रमुख पुजारी पंडित प्रमोद शास्त्री बताते हैं कि चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से ही हिंदू नववर्ष का आगाज माना जाता है। सनातन संस्कृति के मुताबिक देश में नववर्ष इसी दिन मनाया जाना चाहिए। इन नवरात्र में पांच रवि व एक दिपुष्कर योग बनने से व्रत रखने वालों को निश्चित रूप से दोहरा फल प्राप्त होगा।

ऐसे करें नवरात्र पूजन

ज्योतिषाचार्य व ज्योतिष रत्न नरेश नाथ बताते हैं कि व्रत रखने वाले नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा, भगवान गणोश व नवग्रह की स्थापना करें। सोने, चांदी, तांबे या पीतल के कलश को रोली बांधने के बाद स्वास्तिक व ओम बनाएं। कलश की स्थापना पूजा घर के पूर्वी भाग में करना शुभ है। कच्चे चावल की कटोरी भर कलश के ऊपर रखें व लाल चुनरी में लिपटा नारियल उस पर स्थापित करें। इसके बाद पूजा का संकल्प करें।

नौ दिन होगी मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा

25 मार्च : माता शैलपुत्री

26 मार्च : मां ब्रह्मचारिणी

27 मार्च : मां चंद्रघंटा

28 मार्च : मां कुष्मांडा

29 मार्च : मां स्कंदमाता

30 मार्च : मां कात्यायनी

31 मार्च : मां कालरात्रि

1 अप्रैल : मां महागौरी

2 अप्रैल : मां सिद्धिदात्री 

 

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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