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लुधियाना के उद्योगपति एसपी ओसवाल से साइबर ठगी मामले में कार्रवाई, ईडी ने कोलकाता से मुख्य हैंडलर सोहेल अख्तर को दबोचा

Published: Fri, 02 Oct 2026 05:59 AM (IST)

ईडी ने लुधियाना के उद्योगपति एसपी ओसवाल से 7 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मुख्य हैंडलर सोहेल अख्तर उर्फ राजू को कोलकाता से गिरफ्तार किया है।

लुधियाना के उद्यमी ओसवाल से सात करोड़ की ठगी में कोलकाता से मुख्य हैंडलर गिरफ्तार।

लुधियाना के उद्यमी ओसवाल से सात करोड़ की ठगी में कोलकाता से मुख्य हैंडलर गिरफ्तार।

HighLights

  1. ईडी ने एसपी ओसवाल साइबर ठगी के मुख्य हैंडलर को कोलकाता से पकड़ा

  2. आरोपी सोहेल अख्तर ने 7 करोड़ रुपये की ठगी डिजिटल अरेस्ट से की

  3. ठगी की रकम म्यूल खातों और क्रिप्टो करेंसी से विदेश भेजी गई

जागरण संवाददाता, जालंधर। लुधियाना के उद्योगपति एसपी ओसवाल से सात करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गिरोह के मुख्य हैंडलर सोहेल अख्तर उर्फ राजू को कोलकाता से गिरफ्तार किया है।

ईडी के जालंधर जोनल कार्यालय ने 28 सितंबर को पश्चिम बंगाल में तीन स्थानों पर तलाशी के बाद उसे धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया है।

कोलकाता की अदालत से ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपित को जालंधर लाया गया। जालंधर में विशेष पीएमएलए अदालत ने उसे छह अक्टूबर तक सात दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है।

ईडी के अधिकारियों के अनुसार जांच की शुरुआत लुधियाना साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इस गिरोह से जुड़े डिजिटल अरेस्ट साइबर अपराध की नौ अन्य एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया है। इसमें सामने आया है कि आरोपितों ने सीबीआइ और न्यायपालिका के अधिकारी बनकर एसपी ओसवाल को डिजिटल अरेस्ट किया और उनसे सात करोड़ रुपये ठगे।

ठगी की रकम सबसे पहले रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के बैंक खातों में पहुंचाई गई। सात करोड़ में से चार करोड़ रुपये फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खाते में और तीन करोड़ रुपये रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खाते में ट्रांसफर किए गए।

म्यूल खातों का नेटवर्क, मोबाइल में एपीके से हासिल करते थे ओटीपी

ईडी के मुताबिक रिग्लो वेंचर्स के बैंक खातों को सोहेल अख्तर नियंत्रित और संचालित करता था। एजेंसी ने उसे ऐसे लोगों की भर्ती करने वाला प्रमुख हैंडलर बताया, जिनके जरिए म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराए जाते थे।

जांच में यह भी सामने आया कि बैंक खातों से जुड़े सिम कार्ड ऐसे मोबाइल फोन में लगाए जाते थे, जिनमें पहले से विशेष एपीके फाइलें डाउनलोड थीं। इससे नेपाल में बैठे सहयोगी इन मोबाइल फोन पर आने वाले ओटीपी और एसएमएस तक पहुंच बना लेते थे और अपराध की रकम को तेजी से दूसरे खातों में भेजा जाता था।

दो से पांच लाख रुपये की रकम में किया जाता था ट्रांसफर

ठगी की रकम को अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में दो से पांच लाख रुपये की छोटी-छोटी रकम में भेजा जाता था। इन खातों से नकदी निकालकर वर्चुअल डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टो करेंसी खरीदी जाती थी। कमीशन काटने के बाद उसे विदेशी नागरिकों के खातों में ट्रांसफर किया जाता था।

म्यूल खाते आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लोन या नौकरी दिलाने का झांसा देकर खुलवाए जाते थे। इसके बाद रकम को कई खातों और शेल संस्थाओं के जरिये लेयर किया जाता था और ट्रेड आधारित मनी लांड्रिंग के माध्यम से विदेश भेजा जाता था।

अब तक तीन आरोपित गिरफ्तार, 1.76 करोड़ की संपत्ति अटैच

इस मामले में ईडी अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। सोहेल अख्तर से पहले रूमी कलिता को 23 दिसंबर और अर्पित राठौर को 31 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। ईडी ने बीती 14 फरवरी को 1.76 करोड़ रुपये की संपत्ति को भी जब्त किया था।

19 फरवरी को रूमी कलिता, अर्पित राठौर, आनंद चौधरी, अतनु चौधरी और फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। इस मामले में अब भी जांच जारी है।