जालंधर, [सुक्रांत]। टेस्ट मेकर कैटरर्स के मालिक अश्विनी नागपाल ने अपने दोनों बेटों को बड़े प्यार से पाला, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि अपने बड़े बेटे हाथों मौत मिलेगी। रविवार देर शाम को अश्विनी नागपाल धार्मिक स्थल पर माथा टेकने के लिए गए थे। वापस आए तो पता चला कि बड़ा बेटा जतिन अपने छोटे भाई अभय को उनके बाग बाहरियां स्थित मिल्क बार में गालियां निकाल कर आया है।

इसके बाद अश्विनी ने घर जाकर देखा तो जतिन शराब के नशे में था। उन्होंने उससे छोटे भाई को गालियां देने का कारण पूछा तो जतिन ने बहस शुरू कर दी। अश्विनी वर्कशाप चौक के पास होटल रेड पीटल खरीदने की तैैयारी में थे और उन्होंने इसके लिए पैसे भी इकट्ठा कर लिए थे। जतिन को लगा कि ये होटल अभय के लिए खरीदा जा रहा है और उसे हिस्सा नहीं मिलेगा। इसी कारण उसने अभय को गालियां निकाली थीं। पिता ने उसे समझाने का प्रयास किया तो बात बढ़ गई और पिता-पुत्र में हाथापाई होने लगी। इसी बीच अभय दुकान से आ गया और दोनों की लड़ाई छुड़ाने लगा। नशे में होने के कारण जतिन गुस्से को संभाल नहीं पाया और पास ही रखे चाकू से पिता और भाई पर हमला कर दिया। इससे पिता की मौके पर ही मौत हो गई और अभय जख्मी हो गया। शोर सुनकर पड़ोसी वहां पहुंचे तो जतिन ने खुद को कमरे में बद कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर जतिन को बाहर निकाला। देर रात को पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर गिरफ्तारी भी दिखा दी। पुलिस ने जतिन को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है।

पहले भी अश्विनी और जतिन में रहता था विवाद

अश्विनी नागपाल का बड़ा बेटा जतिन यह मानता था कि पिता अपने छोटे बेटे अभय से ज्यादा प्यार करते हैं। इसी के चलते वो अक्सर घर पर विवाद करता रहता था। कई बार घर में दोनों भाइयों की भी लड़ाई हो चुकी थी।

नशे में गुस्सा पड़ा भारी

पुलिस जब जतिन को रिमांड पर लेने के लिए अदालत में लेकर गई तो वहां से वापस लौटते समय वह रो पड़ा। उसे अपने पिता की मौत का पछतावा था, लेकिन पुलिस के सामने वो यही कह रहा था कि पिता उसे नहीं, बल्कि छोटे भाई को ज्यादा प्यार करते थे। वह उन्हें मारना नहीं चाहता था, लेकिन गुस्सा इतनी हावी हो गया था कि उसे उस वक्त कुछ समझ नहीं आया।

आइसीयू में भर्ती अभय देने आया पिता को अंतिम विदा

अश्विनी नागपाल के बड़े बेटे जतिन ने उसे मौत दी, लेकिन छोटा बेटा अभय आइसीयू से एंबुलेंस में हरनामदासपुर श्मशानघाट आया और उन्हें अंतिम विदाई दी। एंबुलेंस में लेटे ही अभय ने पिता को मुखाग्नि देने के लिए जलाई गई लकड़ी को हाथ लगाकर अपना कर्तव्य निभाया। अस्पताल में डाक्टरों ने उसे मना किया था कि वो नहीं जा सकता, लेकिन अभय नहीं माना।

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