जागरण संवाददाता, जालंधर : सुप्रीम कोर्ट द्वारा समलैंगिक जोड़ों के पक्ष में दिए गए महत्वप‌रू्ण फैसले के बाद समाज में इस वर्ग के लोगों को समानता का अधिकार मिला है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब समलैंगिकों को हीनभावना का शिकार नहीं होना पड़ेगा। जून 2017 में जालंधर में एक समलैंगिक जोड़े ने शादी रचाई तो मामला बड़े स्तर पर चर्चा में आया था। समाज की परवाह न करते हुए इस जोड़े ने शाही अंदाज में शादी की थी और तब से यह जोड़ा बेझिझक जीवन व्यतीत कर रहा है।

शहर के जिस एरिया में यह जोड़ा रहता था, वहां के लोग इनसे बात तक करना नहीं चाहते थे। दैनिक जागरण टीम ने वीरवार को उस इलाके का दौरा किया और वहां के लोगों से बातचीत करनी चाही, लेकिन किसी ने भी बात नहीं की। यहां तक कि लोगों को इस बात की भी जानकारी नहीं थी कि सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकों के हक में फैसला देते हुए इसे अपराध मनाने से इनकार कर दिया है। अब इस फैसले के बाद आम लोगों की भी धारणा बदलेगी और इस वर्ग के लोगों को समाज में सम्मान मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बारे में शहर के लोगों की राय जानी तो मिलीजुली प्रकिया मिली। किसी ने इसे सराहा तो किसी ने नकारा। समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर रखना सराहनीय

समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर रखना सराहनीय है। पिछले लंबे समय से अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे समलैंगिकों को तो इंसाफ मिला ही है। फैसले में सहमति के साथ बनाए गए संबंधों को जायज करार दिया गया है।

- राज कुमार भल्ला, एडवोकेट पश्चिमी संस्कृति देश में लाई जा रही, ये गलत है

समलैंगिता भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। पश्चिमी संस्कृति देश में लाई जा रही है, जो सरासर गलत है। युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति से विमुख होगी। देश में पश्चिमी संस्कृति का दायरा बढ़ रहा है।

- जस¨वदर ¨सह, सोशल वर्कर प्रस्ताव पारित होने से भारतीय संस्कृति को खतरा

समलैंगिकता भारतीय संस्कृति पर प्रहार है। हालांकि समलैंगिक लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे थे। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे थे। प्रस्ताव पारित होने पर भारतीय संस्कृति को खतरा होगा।

- अनिल अरोड़ा, सोशल वर्कर हमारा देश ऐसे संबंधों को मान्यता नहीं देता

समलैंगिकता भारतीय संस्कृति के विपरित है। इसे सही करार देना पश्चिमी सभ्यता को प्रेरित करना है। इससे लोगों में गलत मैसेज जाएगा। हमारे देश में इस तरह के संबंधों को समाज मान्यता नहीं देता।

- नईम खान, एडवोकेट फैसला सही पर भारतीय संस्कृति इसे स्वीकार नहीं करती

सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही है। पर भारतीय संस्कृति इसे स्वीकार नहीं करती। ऐसे संबंध परिवारों को जोड़ते नहीं बल्कि खराब करते हैं। ऐसे जोड़ों के संबंध समाज में कोई अच्छा प्रभाव नहीं छोड़ते।

- डॉ. मुकेश गुप्ता, आईएमए के प्रधान ऐसी शादियां लंबे समय तक नहीं चल पाती

समलैंगिक शादी को सुप्रीम कोर्ट ने भले ही अपराध की श्रेणी से दूर कर दिया है परंतु समाज इसे स्वीकार नहीं करता। ऐसी शादियां व संबंध लंबे समय तक नहीं चल पाते। समाज में इसका गलत संदेश जाता है।

- डॉ. अनिल नागरथ, प्रधान, नीमा।

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