जेएनएन, जालंधर। ग्लोबल इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआइएस) लागू करने के लिए शहर में ई-नेम प्लेट्स लगाने का प्रस्ताव नगर निगम ने खारिज कर दिया था लेकिन अब इसे स्मार्ट सिटी कंपनी ने संभाल लिया है। निगम कमिश्नर दीपर्वा लाकड़ा ने कहा कि स्मार्ट सिटी कंपनी क्यूआर प्लेट्स लगाना चाहती है। निगम कमिश्नर ने एक सप्ताह पहले इस क्यूआर कोड प्लेट्स की बजाए पेंट से नंबर लिखवाने का फैसला लिया था लेकिन अब प्रोजेक्ट सिटी कंपनी को दे दिया है। क्यूआर कोड (क्विक रिस्पांस) प्लेट में प्रॉपर्टी टैक्स, पानी-सीवर के बिल समेत सभी डिपार्टमेंट से जुड़ी रिकवरी डिटेल स्टोर रहेंगी।

आधार कार्ड से लिंक नहीं हाेगा क्यूआर कोड

निगम पानी के बिलों को ऑनलाइन अपडेट करेंगे तो हर यूनीक आइडी के अकाउंट में रहेगा। क्यूआर कोड को मोबाइल फोन से स्कैन करके बिल का भुगतान करने की सुविधा रहेगी। निगम कमिशनर प्लेटें चोरी होने के डर से पेंट से नंबर लिखवाने के हक में थे। निगम कमिश्नर ने इस चर्चा को भी विराम दिया है कि क्यूआर कोड को आधार से लिंक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई प्लानिंग नहीं है क्योंकि यह प्राइवेसी का मामला है।

निगम की इनकम बढ़ने की संभावना 

क्यूआर कोड प्लेट्स लगने से निगम की इनकम बढ़ने की संभावना बताई जा रही है। शहर में 2.82 यूनिट्स हैं। खाली प्लाट निकाल देंगे तो करीब 2.25 लाख प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में आती हैं। इस समय करीब 70 हजार प्रॉपर्टीज से टैक्स मिल रहा है। बड़ा सवाल वहीं जानकार कहते हैं कि क्यूआर कोड लगने से आय नहीं बढ़ेगी। निगम के पास सभी का रिकार्ड है लेकिन लोग अगर अब भुगतान नहीं कर रहे हैं तो प्लेट्स लगने पर क्यों देंगे।

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