जागरण संवाददाता, जालंधर : वर्ष में पहली बार शनिचरी अमावस्या, हरियाली तीज तथा सूर्य ग्रहण का अद्भुत संयोग शनिवार को बनने जा रहा है। भले ही वर्ष के इस अंतिम सूर्य ग्रहण का असर देश में नहीं होगा, जबकि ब्राह्मांड में होने वाली घटना का धार्मिक दृष्टि से निश्चित रूप से इसका प्रभाव जरूर रहेगा।

खास बात यह है कि शिव अराधना के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाते सावन माह में यह संयोग बन रहा है। जिसके चलते इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। प्राचीन शिव मंदिर, गुड़ मंडी के मुख्य पुजारी पंडित नारायण शास्त्री बताते हैं कि इस दिन जहां ईश्वर का सिमरन किया जाना आवश्यक है, वहीं, इस दिन पौधे लगाने का भी खास महत्व रहेगा। यह रहेगा सूर्य ग्रहण का समय

- दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर शुरू होकर शाम पांच बजे

- ग्रहण का सूतक काल 10 अगस्त की रात को 12 बजे से इस दिन यह कार्य न करें

- कहीं भी अकेले न जाएं

- देर तक न सोएं

- भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें

- सूतक काल से ही मूर्ति पूजा नहीं करें

- तुलसी के पौधे को भी स्पर्श न करें

- वाद-विवाद से बचें

- ग्रहण के समय मन मं अशांति पैदा न होने दें

- श्मशानघाट में जाने से बचें यह करना शुभ रहेगा

- पितृ को समर्पित पूजा करवाएं

- पाठ-पूजा व ध्यान लगाएं

- पानी में नमक डालकर नहाएं

- भगवान हनुमान जी का ध्वजारोहण करें

- भगवान शिव की पूजा करें

- पीपल के पेड़ पर सफेद ध्वज लगाएं

- शाम के समय पीपल के वृक्ष के दर्शन करें और दीपक जलाएं पौधारोपण का भी है महत्व

शनिवार के दिन हरियाली अमावस्या के चलते पौधे भी लगाने चाहिए। इसके साथ ही इनकी देखभाल करके अपना जीवन खुशहाल बनाया जा सकता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है। कारण इसे श्राद्घ की अमावस्या भी कहा जाता है। पीपल के वृक्ष की पूजा कर उसके फेरे लगाने के बाद मालपुए का भोग भी लगाना शुभ होगा।

By Jagran