जेएनएन, जालंधर। जल्द ही लाहौर स्थित शादमन चौक को भगत सिंह के नाम से जाना जाएगा। लाहौर हाई कोर्ट ने लाहौर के मेयर को नोटिस जारी कर इस लंबित मुद्दे पर जल्द निर्णय लेने का निर्देश दिया है। भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज राशिद कुरैशी की याचिका पर कोर्ट ने यह निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि जिस जगह यह चौक है, पहले वहीं पर लाहौर सेंट्रल जेल थी। यहीं पर भगत सिंह को उनके दो अन्य साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी। जस्टिस शाहिद जमील खान ने लाहौर के डिप्टी कमिश्नर से कहा है कि वह इस लंबित मामले पर फैसला करें।

याचिकाकर्ता का कहना है कि भगत सिंह इस उपमहाद्वीप के स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने साथियों के साथ प्राण त्याग दे दिए। कायद-ए-आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने भी उनको श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि उनके जैसा साहसी व्यक्ति पूरे उपमहाद्वीप में नहीं पैदा हुआ। पाकिस्तान और विश्व के लोगों को प्रेरणा मिल सके, इसके चलते उन्होंने चौक पर भगत सिंह की मूर्ति लगाने का भी अनुरोध किया है।

यह याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील अब्दुल रशीद कुरैशी के माध्यम से 'शहीद भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन' ने दायर की है। इससे पहले जनवरी में फाउंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज राशिद कुरैशी ने मेयर और लाहौर के मुख्य आयुक्त को मांग पत्र सौंपा था, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।

निशान-ए-हैदर देने की मांग उठाई

फाउंडेशन लाहौर हाई कोर्ट में भगत सिंह के ट्रायल के मामले को फिर से खोलने का केस भी लड़ रही है। कुरैशी का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि केस जल्द खुलेगा। इससे साबित होगा कि भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को की फांसी का ब्रिटिश सरकार का निर्णय गलत था। यह फांसी नहीं बल्कि न्यायिक हत्या थी। उनकी मांग है कि भारत के नायक और पाकिस्तान के बेटे भगत सिंह को पाकिस्तान का सर्वोच्च बहादुरी पुरस्कार निशान-ए-हैदर दिया जाना चाहिए।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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