जेएनएन, अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (SGPC) की प्रधान बीबी जागीर कौर ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों की आवाज को दबाने के लिए केंद्र सरकार गलत हथकंडे अपना रही है। SGPC इसकी निंदा करती है। बीबी जगीर कौर ने कहा कि किसानी संघर्ष के साथ जुड़े लोगों को व संघर्ष को दबाने के लिए केंद्र सरकार अनलाफुल एक्टिविटी प्रीवेंशन एक्ट (यूएपीए) का गलत उपयोग कर रही है। कृषि संघर्ष के साथ जुड़े लोगों को यूएपीए के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जो केंद्र सरकार का तानाशाही रवैया है। इसे सहन नहीं किया जाएगा।

बीबी जागीर कौर ने कहा कि प्रधानमंत्री किसानों की मांगों को स्वीकार करने के बजाय अपने अहंकार के साथ लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा कि अपने हकों और अपनी पीढिय़ों के भविष्य की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले को देश विरोधी कैसे कहा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि किसान संघर्ष शांतिमय ढंग से चल रहा है, परंतु सरकार इस को गलत रंगत दे रही है। सरकार लोगों की भावनाओं को भड़काने के लिए हर तरह की कोशिश कर रही है। प्रधानमंत्री को चाहिए कि अपनी एजेंसियों के माध्यम से किसानों की आवाज सुने न कि एजेंसियों से आंदोलनकारी किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश करें। नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआइए) को जिनको नोटिस भेजे गए हैं उसको वापस लिया जाना चाहिए।

किसान नेता सिरसा एनआइए के सामने पेश नहीं होंगे

उधर, किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा ने कहा कि वह रविवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) के समक्ष पेश नहीं हो पाएंगे। उनकी पोती की शादी है और वह सात फरवरी तक पारिवारिक मामलों में व्यस्त रहेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हेंं वाट्सएप पर शार्ट नोटिस दिया गया है। इसके अलावा एजेंसी की ओर से उन्हेंं कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई है।

नए कृषि सुधार कानूनों को लेकर केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने वाले संगठनों में शामिल लोक भलाई इंसाफ वेलफेयर सोसायटी के प्रधान सिरसा ने कहा कि उन्हेंं एनआइए की ओर से जारी नोटिस की जानकारी शुक्रवार रात को मिली। यह नोटिस प्रतिबंधित संगठन सिख्स फार जस्टिस (एसएफजे) के खिलाफ दर्ज किए गए एक केस से संबंधित है।

सिरसा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार किसी न किसी तरीके से किसानों के विरोध प्रदर्शन को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही है। केंद्र सरकार ने पहले लोगों, राजनेताओं और सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से किसानों पर दबाव बनाने की कोशिश की और अब एनआइए का सहारा ले रही है। सरकार किसानों के संघर्ष को तोड़ने की कोशिश कर रही है।

सिरसा ने कहा कि उन्होंने एनआइए से सात फरवरी के बाद पेश होने का समय मांगा है। उन्होंने कहा कि आंदोलन से जुड़े कई अन्य लोगों को भी एनआइए की ओर से समन जारी किया गया है और किसानों के लिए काम करने वालों को डराने की कोशिश कर रही है, परंतु हम डरने वाले नहीं हैं और ऐसी रणनीति के आगे नहीं झुकेंगे। सरकार विरोध प्रदर्शन को बदनाम करने पर तुली हुई है।

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