जागरण संवाददाता, जालंधर

एलईडी स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट में गड़बड़ी के साथ ही अब पुरानी सोडियम लाइटों में घपले के आरोप सामने आ रहे हैं। इसमें पांच करोड़ के घपले का आरोप लगा है। सोडियम लाइटों को उतार कर एलईडी लाइटें लगाई गई हैं, लेकिन सोडियम लाइटों का क्या किया गया, इसकी किसी को जानकारी नहीं है। शुक्रवार को पार्षद एलईडी लाइटों के साथ ही पुरानी सोडियम लाइटों पर भी जवाब मांग सकते हैं। एलईडी स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट को लेकर पार्षदों की बढ़ रही नाराजगी और मेयर पर उठ रही उंगलियों के मद्देनजर शुक्रवार को प्रस्तावित निगम हाउस की मीटिग में बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

शहर में करीब 60 हजार सोडियम लाइटों की जगह ही एलईडी लगाई गई हैं। सोडियम लाइटों को लेकर कांग्रेस के पार्षद ही सवाल उठा रहे हैं कि ये लाइटें कहां गई? पार्षदों का आरोप है कि यह लाइटें निगम के किसी भी गोदाम में नहीं हैं। जब अकाली-भाजपा सरकार के समय एलईडी लाइट का ठेका पीसीपी कंपनी से हुआ था तब पुरानी लाइटों को बेचने का भी अलग ठेका हुआ था। पांच साल पहले एक सोडियम लाइट की कीमत 250 रुपये रखी गई थी। कांग्रेस सरकार आने पर पीसीपी कंपनी का ठेका रद कर दिया गया तो सोडियम लाइट का ठेका भी रद हो गया। कांग्रेस के पार्षद शमशेर सिंह खैहरा और आजाद पार्षद दविदर रौनी यह सवाल कर रहे हैं कि सोडियम लाइटें कहां हैं? अगर यह बेच दी हैं तो किस प्रक्रिया के तहत बेची गई और एक लाइट की कीमत कितनी रखी गई? इसे लेकर स्क्रैप डीलर दीपक का कहना है कि पुरानी लाइटें काफी वजनी थी। इनमें करीब तीन किलो एलुमिनियम, आधा किलो तांबा, लोहे की राड और तारें हैं। अगर यह स्क्रैप में भी बेची जाएं तो इसकी कीमत 700 से 1000 रुपये के करीब बनती हैं। अगर इसे पुराने रेट के तहत 250 रुपये में बेचा गया है तो भी गड़बड़ है और अगर यह गायब हो गई हैं तो और भी गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि अगर सही कीमत पर लाइटें बेची जाएं तो 60 हजार लाइटें पांच से छह करोड़ में बिक सकती थी। इसका जवाब हाउस में लिया जाएगा। खैहरा ने कहा कि सोडियम लाइटें उतारने का ठेका पुरानी एलईडी पीसीपी कंपनी के साथ ही रवि कुमार को दिया गया था। जब एलईडी का ठेका ही खत्म कर दिया गया था तो इसके साथ ही सोडियम लाइटों को उतारने का ठेका भी खत्म हो गया। हाउस की मीटिग बार-बार स्थगित होने पर खड़े हो रहे सवाल

एक प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नगर निगम के हाउस के इतिहास की संभवत यह पहली मीटिग होने जा रही है। इस प्रोजेक्ट पर विपक्षी दलों भाजपा और अकाली दल से ज्यादा सत्तारुढ़ कांग्रेस के पार्षद आवाज उठा रहे हैं और अब तो मेयर जगदीश राजा पर भी यह आरोप लगने लगे हैं कि वह ठेका कंपनी को बचा रहे हैं। आठ जून को हाउस की मीटिग में इस मुद्दे पर खूब शोर मचा था। इसके बाद मेयर ने घोषणा की थी कि एलईडी स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट के लिए हाउस की विशेष मीटिग बुलाई जाएगी। मेयर ने सिगल एजेंडे पर 20 जून को हाउस की बैठक तय की और 17 जून को एजेंडा जारी कर दिया। 20 जून को सुबह बैठक स्थगित कर दी और अगली तारीख 24 जून तय कर दी। 24 जून को मीटिग से दो घंटे पहले ही बैठक को फिर स्थगित कर दिया गया। कांग्रेस के पार्षद शमशेर खैहरा और राजविदर राजा ने आरोप लगाया था कि मेयर जानबूझ कर बैठक स्थगित कर रहे हैं, ताकि कंपनी को अपनी गलतियां दूर करने का समय मिल जाए। इनका आरोप था कि मेयर और कंपनी में सांठगांठ है। जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ तो इसकी लागत करीब 44 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब यह बढ़ कर 62 करोड़ तक पहुंच गई है। विधायक ने स्मार्ट सिटी प्रोजक्ट में गड़बडी का मुद्दा विधानभा में उठाया

जालंधर वेस्ट हलके से आम आदमी पार्टी के विधायक शीतल अंगुराल ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का मुद्दा पंजाब विधानसभा में उठाया है। उन्होंने विधानसभा में कहा कि स्मार्ट सिटी ने जालंधर में 550 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट किए हैं, लेकिन शहर में ऐसा कोई काम नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि वह चुनाव से पहले भी कहते रहे हैं कि स्मार्ट सिटी कंपनी के काम में बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने जनता से वादा किया था कि अगर उन्हें विधानसभा में भेजेंगे तो वह सब गड़बड़ियों की जांच करवाएंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि स्मार्ट सिटी कंपनी के सभी प्रोजेक्टों की जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि 120 फुट रोड पर बनाए जा रहे श्री गुरु रविदास कम्युनिटी हाल के काम में भी गड़बड़ी हुई है। इसका काम पीडब्ल्यूडी करवा रहा है। यह काम 60 लाख से ज्यादा का नहीं है, लेकिन इसका करीब साढ़े तीन करोड़ का टेंडर दिया गया है। ---------

कोट्स एलईडी प्रोजेक्ट में तो गड़बड़ी है ही, पुरानी सोडियम लाइटें भी खुर्दबुर्द की गई हैं। इसमें करोड़ों का घपला हुआ है।

दविदर रौनी, पार्षद

------- मेयर बताएं कि पुरानी सोडियम लाइटें कहां हैं। अगर यह बेची गई हैं तो किस रेट पर किसे बेची गई हैं?

शमशेर सिंह खैरा, पार्षद

------- मेयर जगदीश राजा ने एलईडी लाइट प्रोजेक्ट बर्बाद कर दिया है। अब हाउस में इस पर चर्चा करके खुद को पाक-साफ बताने का प्रयास कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी कंपनी की सीईओ छुट्टी पर है और कोई दूसरा अधिकारी इस पर बयान देने के लिए अधिकृत नहीं है। स्मार्ट सिटी कंपनी के सलाहकार हाउस में मौजूद रहेंगे, इस पर भी संदेह है।

- सुनील ज्योति, पूर्व मेयर

------ हाउस में पार्षद अपनी बात रखेंगे। एलईडी के मुद्दे पर सब साफ होना चाहिए। जो भी जिम्मेवार है उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। हाउस में सभी जनप्रतिनिधियों की सहमति से फैसला लिया जाएगा। जो भी मुद्दे होंगे उनकी जांच भी होगी।

- जगदीश राजा, मेयर

Edited By: Jagran