गुरप्रेम लहरी, बठिंडा।  जिले की बेटी रितिका मित्तल ने लक्ष्य हासिल करने के लिए अपनी जिंदगी में काफी कठिनाइयों का सामना किया लेकिन कभी पीछे नहीं हटी। जिले की बेटी ने नागालैंड में अकेली रहकर अपने दम पर हुनर का लोहा मनवाया है। रितिका ने नागालैंड़ में पेड़ की छाल से ऐसा कपड़ा तैयार करके दिखाया जो एक सौ साल से भी ज्यादा समय तक चल सकता है।

असंभव से संभव तक की यात्रा

मुंबई में टेक्सटाइल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2009 में रितिका नागालैंड़ चली गईं। उसके साथ उनकी दो मुंबई बेस्ड सहेलियां भी थी लेकिन वह वहां ज्यादा देर तक नहीं रह पाईं और लौट गईं। उन्होंने रितिका को भी वापस लौटने की सलाह दी। लेकिन वह नहीं मानी और इसके बाद और ज्यादा हिम्मत से लक्ष्य पाने को डट गईं। रितिका जिस नागा परिवार के घर पर रह रही थी, उन्होंने उसे अपनी बेटी के तौर पर अडाप्ट कर लिया था। एक बार वह काफी बीमार पड़ गई तो उसकी संभाल नागा परिवार ने ही की।

इसके बाद रितिका अपने काम पर डट गई और जो कपड़े नागा लोग पहले भांग, बिच्छू बूटी, बांस व थैबो पेडों की खाल से बनाते थे, उसको रिफांइड किया। पहले वह बहुत भारी होता था, उसका वजन दस गुना से भी ज्यादा कम किया और अब उनका बनाया कपड़ा मार्केट में खूब बिकता है। इसके अलावा उन्होंने वहां पर अपना एरीसिल्क ब्रांड तैयार किया। पहले रेशम को तैयार करने के लिए हजारों कीड़ों की बलि देनी पड़ती थी, अब उनको रेशम भी मिल जाता है और कीड़े भी नहीं मारने पड़ते।

500 परिवारों को दिया रोजगार

रितिका ने नागालैंड़, आसाम व अरुणाचल प्रदेश के 500 से भी ज्यादा परिवारों को रोजगार दिया है। अब वहां के 500 परिवार उसके साथ जुड़े हुए हैं और धागा तैयार कर रहे हैं।

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Edited By: Pankaj Dwivedi