जालंधर, [जगजीत सिंह सुशांत]। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बाजारों में बिजली की तारों समेत हर तरह की तार की डक्टिंग की जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के लिए रैणक बाजार को चुना गया है। दुकानों के बाहर लटकती तारों को ओवर हेड डक्टिंग के जरिए समेटा जाएगा। अगले छह महीनों में रैणक बाजार में बिजली, टेलिफोन, केबल नेटवर्क की तारों के गुच्छे नजर नहीं आएंगे। स्मार्ट सिटी के सेफ्टी, सिक्योरिटी एंड यूटीलिटी डक्टिंग प्रोजेक्ट की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) को मंजूरी स्मार्ट सिटी के स्टेट लेवल टेक्निकल कमेटी ने दे दी है। स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ ज¨तदर जोरवाल इसी हफ्ते प्रोजेक्ट का टेंडर जारी कर सकते हैं। यह प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी कंसलटेंट और पावरकॉम के अफसरों ने मिल कर बनाया है।

शहर के पुराने बाजारों में बिजली समेत अन्य विभागों की तारों के गुच्छे इतने ज्यादा हैं कि शार्ट सर्किट से कई बार आग का कारण बन चुके हैं। दुकानदारों ने दुकानों के आगे प्लास्टिक मिक्स शीट के शैड बनवा रखें हैं। तेज हवाओं के समय जब बिजली की तारों में शार्ट सर्किट होता है तो आग लगने का खतरा बढ़ जाता है। लोकल बाडी डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी ए वेणु प्रसाद और पावरकॉम के सीनियर अफसरों की सहमति से डीपीआर को मंजूरी दी गई है। रैणक बाजार में पायलट प्रोजेक्ट कामयाब रहने पर इसे शहर के सभी पुराने बाजारों में लागू किया जाए। इसे शहर के अन्य तंग इलाकों के बाजारों में लागू किया जा सकता है। बस्तियों में कई तंग इलाकों में ऐसे प्रोजेक्ट की जरूरत है। पहले इस प्रोजेक्ट के तहत फायर हाइड्रेंट भी लगाने की योजना थी ताकि आग बुझाने का इंतजाम भी हो जाए, लेकिन बाद में प्रोजेक्ट के इस हिस्से को ड्राप कर दिया गया।

अंडरग्राउंड डक्टिंग संभव नहीं, दुकानदारों का होता नुकसान

जब इस प्रोजेक्ट को प्लान किया गया था तब कोशिश रही थी कि तारों को अंडरग्राउंड डक्टिंग के जरिए एक ही पाइप लाइन में इकट्ठा किया जाए। सर्वे के बाद यह संभव नहीं लगा इसलिए अब तय किया गया है कि ओवर हेड डक्टिंग यानि कि जमीन से 12 से 15 फुट की ऊंचाई पर पाइप में डाला जाए। सर्वे में यह सामने आया कि नगर निगम को यह मालूम नहीं है कि सीवरेज लाइन और वाटर सप्लाई लाइन की जमीन के नीचे असल लोकेशन कहां-कहां है। ऐसे में खुदाई के समय पूरा सीवर और वाटर सप्लाई के इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंच सकता है। दूसरा बड़ा कारण यह है कि रैणक बाजार कई बाजारों की एंट्री डोर है और बेहद व्यस्त बाजार है। प्रोजेक्ट को पूरा होने में 3 से 5 महीने लग सकते हैं। ऐसे में कोई भी दुकानदार 5 महीनों तक काम को प्रभावित नहीं होने देगा। अगर अंडरग्राउंड डक्टिंग करते हैं तो बाजार की सड़कों को खोदना पड़ता और प्रोजेक्ट कास्ट कई गुणा बढ़ जाती।

ट्रांसफार्मरों की लोकेशन भी बदली जाएगी

बाजार में लगे ट्रांसफार्मरों की लोकेशन भी बदली जा सकती हैं। बाजार के चौकों में ही ट्रांसफार्मर लगे हैं। पावरकॉम के एक्सईएन चेतन कुमार ने कहा कि बाजार में लोड काफी ज्यादा है। पुरानी तारों को पावरफुल ऑपटिकल फाइबर से बदला जाना है और ट्रासफार्मर भी बदले जाने कोशिश रहेगी। बाजार को स्मार्ट बनाने के लिए नए किसम के छोटे ट्रांसफार्मर भी लगाए जा सकते हैं। ट्रांसफार्मरों के लिए कुछ नई लोकेशन भी देखी हैं।

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