सुरेश कामरा, पटियाला। प्रसिद्ध शायरा डा. सुल्ताना बेगम का शनिवार को निधन हो गया। 72 वर्षीय सुल्ताना पिछली करीब 10 दिन से बीमार थीं। उनके लिवर में इन्फेक्शन थी और शनिवार को उन्होंने मोहाली के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह महिंदरा कांप्लेक्स की आफिसर कालोनी में अपनी बेटी शमशीर के साथ रह रहीं थीं। उनकी दूसरी बेटी सारु राणा के आस्ट्रेलिया से लौटने पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

डा. सुल्ताना बेगम की इच्छा के अनुसार सिख रीति-रिवाज के साथ ही उनका अंतिम संस्कार करेगा। दरअसल, डा. सुल्ताना बेगम के पिता मुस्लिम थे और उनका पालन पोषण ब्राह्मण परिवार में हुआ और शादी सिख परिवार में हुई। भले ही उन्होंने शादी के बाद सिख धर्म अपना लिया था, लेकिन नाम नहीं बदला।

डा. सुल्ताना बेगम की बेटी शमशीर के बताया कि उनकी मां ने सिख धर्म को अपना लिया था। उनकी इच्छा थी कि उन्हें दफनाया ना जाए बल्कि अंतिम संस्कार किया जाए। वह कहती थीं कि मुझे ¨हदू परिवार ने पाला है और अब सिख परिवार की सदस्य हूं।

शमशीर ने कहा कि यह कहानी भारत-पाकिस्तान बंटवारे से पहले की है। तब डा. सुल्ताना का जन्म नहीं हुआ था। मेरी नानी (डा. सुल्ताना बेगम की मां) हिंदू परिवार से थीं और नाना मुस्लिम परिवार से थे। बंटवारे के समय वह दोनों पाकिस्तान चले गए लेकिन वहां जाकर तीन महीने तक आपस में नहीं मिल पाए। जब वह मिले तो पता चला कि नाना ने दूसरी शादी कर ली है। इस बात से आहत होकर मेरी नानी किसी तरह भारत लौट आईं। यहां लौटने पर ¨चरजीलाल शर्मा के परिवार ने उन्हें अपनाया। कुछ समय बाद डा. सुल्ताना के जन्म लेने पर वादा किया कि उनका परिवार ही इस बच्ची का पालन पोषण करेगा।

तो उनका नाम सुल्ताना बेगम क्यों रखा गया? इस सवाल के जवाब में शमशीर ने कहा, मेरी नानी जानती थीं कि बच्चे को पिता के नाम से ही पहचाना जाता है, इसलिए उन्होंने मेरी मां का नाम सुल्ताना बेगम रखा था। शर्मा परिवार को भी इस पर एतराज नहीं था। शमशीर ने बताया कि मेरी मां डा. सुल्ताना का मेरे पिता व पंजाब के भंगड़ा कलाकार अवतार ¨सह तारी के साथ प्रेम विवाह हुआ था। परंतु पिता सिख थे और उनके परिवार ने मेरी मां (डा. सुल्ताना) को नहीं अपनाया। बाद में डा. सुल्तान बेगम ने सिख धर्म को अपनाया और घर में भी गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश करवाया।

शिक्षा बोर्ड में दीं सेवाएं, 2007 से शुरू की शायरी

डा. सुल्ताना बेगम पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड में सेवाएं दीं और डिप्टी डायरेक्टर पद से रिटायर हुई थीं। उन्होंने 2007 से शायरी शुरू की और उनके शायरी संग्रह में से 'कतरा-कतरा जिंदगी', 'लाहौर किन्नी दूर', 'शिगूफे', 'गुलजारां और बहारां' का नाम प्रमुख है। जिन्हें लोगों ने खूब प्यार दिया। डा. सुल्ताना के निधन पर पंजाबी साहित्य सभा के अध्यक्ष डा. दर्शन सिंह ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डा. बेगम के निधन से पंजाबी साहित्य के क्षेत्र को अपूर्णीय क्षति पहुंची है।

Edited By: Pankaj Dwivedi