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जानें कौन हैं सुखविंदर कोटली, जिन्होंने सीएम चन्नी के रिश्तेदार मोहिंदर केपी को पछाड़ आदमपुर से हासिल की कांग्रेस टिकट

पूर्व कैबिनेट मंत्री महिंदर सिंह केपी को टिकट की दौड़ में कोटली ने आउट कर दिया है। आदमपुर से सुखविंदर कोटली को टिकट देने का आश्वासन पंजाब कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी एवं सुनील जाखड़ की तरफ से दिया गया था।

By Vinay KumarEdited By: Sun, 16 Jan 2022 10:20 AM (IST)
कांग्रेस ने सुखविंदर सिंह कोटली को आदमपुर से प्रत्याशी घोषित किया है।

जालंधर [मनुपाल शर्मा]। प्रदेश के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के रिश्तेदार बताए जाते पूर्व कैबिनेट मंत्री महिंदर सिंह केपी को टिकट की दौड़ में आउट कर देने वाले सुखविंदर सिंह कोटली को कांग्रेस ज्वाइन करने से पहले ही टिकट दिए जाने की बात पक्की हो चुकी थी। विधानसभा हलका आदमपुर से सुखविंदर कोटली को टिकट दिए जाने का आश्वासन पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी एवं सुनील जाखड़ की तरफ से दिया गया था। इस वजह से कांग्रेस की तरफ से आदमपुर में सुखविंदर कोटली को ही उम्मीदवार घोषित किए जाने की संभावनाएं प्रबल थीं। सुखविंदर कोटली बहुजन समाज पार्टी बसपा को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए थे और उन्हें कांग्रेस में शामिल कराने के दौरान पंजाब कांग्रेस के तमाम दिग्गज उपस्थित थे। सुखविंदर कोटली को कांग्रेस में शामिल कराने और फिर टिकट दिलाने में जालंधर छावनी का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रदेश के शिक्षा मंत्री प्रगट सिंह ने भी अहम भूमिका अदा की।

खास यह भी है कि सुखविंदर कोटली को उम्दा उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस लीडरशिप के समक्ष प्रस्तुत करने में अफसरों की भी एक लॉबी भी सक्रिय थी। हालांकि अटकलें यह भी लग रही थी कि महेंद्र सिंह के पी के अलावा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी भी आदमपुर विधानसभा हलका से उम्मीदवार हो सकते हैं। चुनावी विश्लेषण एवं परिस्थितियों का आकलन करने के बाद दैनिक जागरण की तरफ से भी अपने 16 दिसंबर के अंक में यह संभावना व्यक्त कर दी गई थी कि आदमपुर से सुखविंदर कोटली ही कांग्रेस के उम्मीदवार हो सकते हैं।

नाना और मामा ने लड़े चुनाव, पिता कांशी राम के करीबी

सुखविंदर कोटली ने 1984 में राजनीति में अपना कदम रखा हालांकि उनका संबंध एक राजनीतिक परिवार से ही है। उनके नाना दौलत राम ने जालंधर नॉर्थ से और मामा फकीरचंद ने नकोदर से चुनाव लड़ा था। सुखविंदर कोटली के पिता बसपा के संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम के भी करीबी थे। सुखविंदर कोटली ने खुद 3 से ज्यादा दशक तक बसपा में काम किया और प्रदेश के महासचिव भी रहे।

बसपा लीडरशिप पर लगाया था हाथी को बादलों के तबेले में बांधने का आरोप

बसपा की तरफ से विधानसभा चुनाव में अकाली दल के साथ समझौता किया गया जिसके तहत बसपा को 20 सीटें मिली लेकिन इस समझौते को लेकर सुखविंदर कोटली ने आपत्ति जाहिर की और यहां तक कह डाला कि बसपा के पंजाब अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने बसपा के हाथी को बादलों के तबेले में बांध दिया है।

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