जालंधर, [मनोज त्रिपाठी]। पंजाब कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़ सोमवार को जालंधर में कांग्रेसियों के साथ अलग-अलग बैठकें करके उनके जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश करेंगे। लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार जाखड़ जालंधर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं व नेताओं की नाराजगी सुनने आ रहे हैं। उनकी कोशिश होगी कि सरकार से खफा होकर घरों में बैठ गए कांग्रेसियों को फिर से एक्टिव किया जाए। हालांकि जनसमस्याओं से घिरे खस्ताहाल जालंधर के कांग्रेसियों की नाराजगी दूर कर पाने में जाखड़ कितने सफल होंगे, यह कहा नहीं जा सकता।

टूटी सड़कें, कूड़े के ढेर, आवारा कुत्ते, लावारिश पशु, बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों जैेसी समस्याओं से ग्रस्त शहर को कांग्रेस सरकार पिछले ढाई साल में एक बार भी फील गुड नहीं करवा पाई पाई है। सरकारी दफ्तरों में लोगों के काम लेकर जाने वाले कांग्रेसियों को बैरंग लौटाए जाने से लेकर नशा व लगातार बढ़ते अपराध ने कहीं न कहीं कांग्रेसियों को आम भीड़ में खड़ा होकर सरकार को कोसने का मौका दे दिया है।

कांग्रेस का गढ़ रहे जालंधर में लोगों ने दस साल के इंतजार के बाद कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में क्लीन चिट दी थी। हालांकि सरकार लोगों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरी है, इसका अंदाजा पार्टी को खुद भी लग चुका है। यही कारण है कि अब जाखड़ देहाती व शहरी कार्यकर्ताओं व नेताओं के साथ-अलग बैठकें करके उनकी समस्याएं जानेंगे। जालंधर में कांग्रेस की 80 फीसद कार्यकर्ता प्रापर्टी के कारोबार से जुड़े हैं, जो पार्टी की रीढ़ थे। यही कार्यकर्ता पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों में लाखों खर्चने में आगे रहते थे। लेकिन ढाई सालों में सरकार प्रापर्टी के कारोबार की मंदी दूर नहीं कर पाई है। इसके चलते तमाम कार्यकर्ताओं ने इस कारोबार व पार्टी से दूरी बना ली है।

बदहाल जालंधर का रोना रो रहे सभी विधायक

शहर के विकास कार्यों को लेकर विधायकों की भी सुनवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस के गढ़ के रूप में 50 सालों से अपनी पहचान रखने वाले शहर में 2007 के विधानसभा चुनाव में अकाली-भाजपा सेंधमारी करने में सफल रही थी। इसके बाद लगातार दस साल गठबंधन सरकार के कार्यकाल में नजरअंदाज रहे जालंधर ने 2017 के चुनाव में कांग्रेस को दोबारा उसके गढ़ में प्रवेश दे दिया था। लोगों को उम्मीद थी कि सरकार शहर के विकास की तरफ ध्यान देगी, लेकिन हुआ इसका उल्टा। यही वजह है कि शहर के चारों विधायक सुशील रिंकू, राजिंदर बेरी, परगट सिंह और बावा हैनरी दो बार सीएम के दरबार में विकास का रोना रो चुके हैं। वे मेयर की कारगुजारी को लेकर उन्हें हटाने तक की मांग उठा चुके हैं।

उद्योग का सबसे बड़ा मुद्दा है जीएसटी रिफंड

पंजाब के प्रमुख औद्योगिक शहर की सैकड़ों औद्योगिक इकाइयों का करोड़ों रुपया जीएसटी रिफंड के रूप में फंसा है। खेल उद्योगपति अनुराग शर्मा बताते हैं कि उन्होंने 35 लाख रुपये जीएसटी रिफंड के लेने हैं, लेकिन विभाग दो साल से धनराशि जारी नहीं कर रहा है। यह अकेले अनुराग की समस्या नहीं है, बल्कि जालंधर से खेल उद्योग, लेदर उद्योग, हैंड टूल उद्योग, इंजीनियरिंग उद्योग की समस्या है। जीएसटी रिफंड के लिए उद्योगपति कई बार सरकार से रोना रो चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें आश्वासन के अलावा कहीं से कुछ नहीं मिला।

यह हैं शहर के मुद्दे

  • ढाई साल में खस्ताहाल सड़कों को नहीं बनवाया जा सका है। शहर के अंदरूनी इलाकों से लेकर मुख्य मार्गों तक की हालत बेहाल है।
  • शहर की हजारों स्ट्रीट लाइटें दो साल से बंद हैं।
  • पीएपी चौक फ्लाईओवर के गलत डिजाइन से परेशान हो रहे जालंधर के लोग।
  • शहर में लावारिस पशुओं का राज लगातार बढ़ता जा रहा है।
  • पंजाब का सबसे खूबसूरत शहर माना जाने वाला जालंधर कूड़े के शहर में तब्दील हो रहा है।
  • रोजाना एक दर्जन से ज्यादा लोग हो रहे हैं आवारा कुत्तों का शिकार।
  • ढाई साल में नहीं पूरा हो चुका हाईवे का प्रोजेक्ट।
  • सरकार की विभिन्न पेंशन

लेदर उद्योग में लग चुका है ताला

काला संघिया ड्रेन में प्रदूषण को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद लेदर कांप्लेक्स में स्थित 61 टेनरीज के बिजली व जनरेटर के कनेक्शन काटने का मुद्दा। लेदर उद्योग बीते एक महीने से बंद पड़ा है। यही हालात रहे तो भले ही सरकार इनवेस्टर्स समिट करवाती रहे, लेकिन पंजाब में एकमात्र जालंधर का लेदर उद्योग यहां से मजबूरी में पलायन कर सकता है। पिछले माह का वेतन कारोबारियों को मजदूरों को जेब से देना पड़ा है। प्रदूषण के मामले में भी गलती सरकार की ही है, क्योंकि ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाने की रिपोर्ट दस साल पहले ही दी चुकी थी, लेकिन क्षमता बढ़ाई नहीं गई।

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Posted By: Sat Paul

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