मनुपाल शर्मा, जालंधर। प्रदेश में हुए राजनीतिक उठापटक के बाद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का इस्तीफा कईयों की उम्मीदों को भी धूमिल कर गया है। मुख्यमंत्री एवं प्रदेश की अफसरशाही ने मुलाजिम वर्ग, इंडस्ट्री एवं अन्य वर्गों की राहत के लिए कुछ वादे किए थे, जिन्हें पूरा होने को लेकर अब कुछ भी तय नजर नहीं आ रहा है।

पिछले दिनों ही राज्य भर में पंजाब रोडवेज एवं पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (पीआरटीसी) के कांट्रेक्ट मुलाजिमों ने 9 दिन लंबी चक्का जाम हड़ताल रखी थी। इसके बाद सरकार ने उन्हें आगामी आठ दिन के भीतर पक्का कर देने का आश्वासन दिया था। इसके अलावा प्रदेश भर के सरकारी मुलाजिम वेतन आयोग की विसंगतियों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी मांगे रख रहे थे। उद्योग जगत चुनाव से पहले सरकार की तरफ से औद्योगिक विस्तार के लिए नए फोकल प्वाइंट घोषित होने की उम्मीद जता रहा था। वहीं, दूसरी तरफ आसमान छू रही पेट्रोल डीजल की कीमतों को कम करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से वैट की दरों में कुछ कटौती होने की भी उम्मीद जताई जा रही थी।

पिछले सप्ताह तक पंजाब कांग्रेस की अंतर्कलह अब लगभग शांत हो रही है। यह उम्मीद जताई जा रही थी कि मुलाजिमों, उद्योग जगत एवं अन्य वर्गों के लिए राज्य सरकार इलेक्शन बोनांजा के तौर पर राहत दे सकती है। इन आशाओं के विपरीत एकाएक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस्तीफा दे दिया है। अब नए मुख्यमंत्री का चयन होगा। उसके बाद कैबिनेट में संभावित फेरबदल होगी और उसके बाद कहीं जाकर लोगों की मांगों की तरफ ध्यान दिया जाएगा।

नए मुख्यमंत्री, नए कैबिनेट मंत्री और नई अफसरशाही इन मांगों को पहले समझेगी और फिर अपना तर्क रखेगी। तब कहीं जाकर कुछ राहत मिल सकेगी। फिलहाल असमंजस बरकरार है और पंजाब सरकार से राहत के लिए संघर्ष कर रहे लोगों की उम्मीदें भी फिलहाल धूमिल होती नजर आ रही हैं।

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Edited By: Pankaj Dwivedi