जालंधर, जेएनएन। प्याज के आसमान छूते दामों ने मध्यमवर्ग के साथ संपन्न वर्ग की भी कमर तोड़कर रख दी है। इसका पता प्याज की बिक्री में इन दिनों आई भारी गिरावट से चलता है। यह पहला अवसर है जब प्याज के दामों ने शतक मारा है। खास बात है कि प्याज की किल्लत के बाद कालोनियों के मुताबिक दाम निर्धारित किए जा रहे है। शहर की पॉश कॉलोनियों में इन दिनों प्याज 120 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा है। सरकार ने प्याज की स्टॉक लिमिट निर्धारित की है, लेकिन अफसरों के आने की सूचना मिलते ही जमाखोर मंडी से माल गायब कर देते हैं। इसी कारण शुक्रवार को स्टॉक की जांच करने पहुंची फूड व सिविल सप्लाई विभाग की टीम बैरंग लौट गई।

अफगानिस्तान से माल आने के बाद भी बनावटी कमी पैदा कर रहे जमाखोर

नासिक में प्याज की फसल तबाह होने के बाद कमी की आड़ में जमाखोर जमकर चांदी कूट रहे है। संभावित स्थिति को देखते हुए जिले के बड़े कारोबारियों ने भारी मात्रा में प्याज स्टोर कर लिया है। जमाखोर केंद्र सरकार के अफगानिस्तान से माल मंगवाने के बावजूद मार्केट में कृत्रिम कमी पैदा करके खूब मुनाफा कमा रहे हैं। जिले में प्रतापपुरा रोड, नागरा गांव, शिव नगर व गुलाब देवी रोड पर गोदामों में प्याज का स्टॉक किया गया है। इसे बड़े कारोबारी पूल करके मनमाने दामों पर बेच रहे हैं।

फूड व सिविल सप्लाई विभाग ने की जांच

प्याज की स्टॉक लिमिट निर्धारित करने के बाद शुक्रवार को फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग की टीम एएफएसओ राज कुमार के नेतृत्व में मकसूदां मंडी पहुंची। यहां जिला मंडी अधिकारी वरिंदर खेड़ा व उनके साथ केवल सिंह भी मौजूद थे। हालांकि, टीम को किसी भी फर्म से निर्धारित स्टॉक से अधिक माल नहीं मिला। कारोबारियों ने टीम के पहुंचने से पहले ही माल ठिकाने लगा दिया था।

जमीनी हकीकत : कहीं 60 तो कहीं 120 रुपये किलो बिक रहा प्याज

'दैनिक जागरण' की टीम शुक्रवार को जब मकसूदां मंडी पहुंची तो वहां पर अफगानिस्तान का प्याज थोक में 60 व अलवर का प्याज 80 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा था। पटेल चौक स्थित पुरानी सब्जी मंडी में रिटेल में यही प्याज 100 रुपये प्रति किलो बेचा जा रहा था। मॉडल टाउन में प्याज 100 रुपये प्रति किलो थे। जबकि ग्रीन मॉडल टाउन में रेहड़ी पर यही प्याज 120 रुपये प्रति किलो बिक रहा था।

दुकानदारों ने ये कहा

पुरानी सब्जी मंडी में दुकानदार गगन

सवाल : आप 100 रुपये किलो प्याज क्यों बेच रहे हैं?

जवाब : दो दिन पहले 80 रुपये में खरीदे है, वजन के दौरान माल घटता है व किराया भाड़ा तथा पैकिंग के बाद कमाई रखने के चलते 100 बेचना मजबूरी है।

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माडल डाउन के गज्जन सिंह

सवाल : आप प्याज 100 रुपये प्रति किलो क्यों बेच रहे हैं?

जवाब : यहां केवल बेहतर क्वालिटी के प्याज ही बिकते हैं। अलवर का प्याज 80 रुपये के हिसाब से खरीदा है। इस पर परिवहन खर्च लगा। कई लोगों के घर पर प्याज पहुंचाना होता है। इसके बाद 8 से 10 रुपये प्रति किलो ही कमाई होती है। दूसरा इन दिनों बिक्री में भी 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है।

ग्रीन माडल टाउन में रेहड़ी वाले जसपाल सिंह

सवाल : आप प्याज 120 रुपये प्रति किलो क्यों बेच रहे हैं?

जवाब : उधार में प्याज 80 से 90 रुपये में मिलता है। ऊपर से गली-मोहल्ले में घर-घर तक प्याज पहुंचाने की सर्विस दी जाती है। वजन में प्याज कम होता है व पैकिंग का खर्च अलग से होता है। इसी लिए इतना रेट रखा है।

संतोखपुरा की सोनकली

सवाल : प्याज के दाम 100 रुपये प्रति किलो क्यों कर रखे हैं?

जवाब : इन दिनों औसतन 10 किलो प्याज की बिक्री होती है। इसके चलते मकसूदां की बजाय पटेल चौक वाली मंडी से 15-20 किलो खरीदकर लाते है। यह 80 रुपये किलो मिलता है। मोहल्ले में लोग आधा किलो से ज्यादा प्याज खरीद नहीं रहे। ऐसे में गुजारा करने के लिए इतना रेट तो रखना ही पड़ेगा।

सीधी बातः सहायक फूड और सिविल सप्लाई अफसर (एएफएसओ) राज कुमार

सवाल : थोक व रिटेल की स्टॉक लिमिट क्या है?

जवाब : रिटेल में 50 क्विंटल व थोक कारोबारियों के लिए 250 क्विंटल।

सवाल : अभी तक क्या कार्रवाई की गई?

जवाब : जांच जारी है, रोजाना छापेमारी की जाएगी।

सवाल : प्याज की स्टॉक लिमिट कब तक रहेगी?

जवाब : 10 दिसंबर तक

सवाल : दस दिसंबर तक ही क्यों?

जवाब : सरकारी आदेश हैं। अगर समय बढ़ाया जाता है तो जांच जारी रहेगी।

सवाल : क्या इसके बाद जांच नहीं होगी?

जवाब: जमाखोरी की सूचना मिलते ही कार्रवाई की जाती है।

ये है लोगों की राय

जरूरी सामान के दाम निर्धारित करने का अधिकार जिला प्रशासन के पास होना चाहिए। सामान के थोक रेट के हिसाब से रिटेल में बिक्री के दाम निर्धारित किए जाने की जरूरत है।

- पूजा धवन, गृहिणी

किसी सामान की कमी व दामों में बढ़ोतरी पर सरकार को अन्य स्थानों से माल मंगवाकर आपूर्ति करनी चाहिए। यह आपूर्ति दाम स्थिर होने तक जारी रखी जाए। इससे दाम इतने नहीं बढ़ेंगे।

- संदीप जिंदल

जालंधरः प्याज के बढ़े दामों पर पूजा धवन और संदीप जिंदल ने अपनी राय दी।

प्याज की कीमतें बढऩे से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। घर के राशन से अधिक बजट तो सब्जी का हो रहा है, जिससे रसोई पर बोझ बड़ा है।

-रीना सेठ

रोजमर्रा की जरूरतों वाले सामान की कालाबाजारी व जमाखोरी रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। इसके लिए स्टॉक सीमा निर्धारित करने के बाद इसे सख्ती से लागू किए जाने की जरूरत है।

-आरके चावला

जालंधरः रीना सेठ ने कहा कि प्याज के दाम बढ़ने से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। वहीं आरके चावला ने कहा कि जमाखोरी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

Posted By: Pankaj Dwivedi

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