जालंधर, [मनीष शर्मा]। कोरोना वायरस के मरीजों की गिनती 25 पहुंच चुकी है। दो लोगों की मौत हो चुकी है। अब हर रोज मरीज सामने आ रहे हैं। कई ऐसे भी मरीज आए हैं, जिनको कोरोना कैसे हुआ, कोई हिस्ट्री नहीं मिली। राज्य में जालंधर मोहाली के बाद दूसरे नंबर पर है। कफ्र्यू लगा है, इसके बावजूद लोग घरों से बाहर निकलने से बाज नहीं आ रहे। पुलिस ड्रोन तक इस्तेमाल कर रही है और 23 मार्च से लेकर अब तक 256 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। 343 लोग कर्फ्यू तोडऩे पर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 5,433 गाडिय़ों के चालान काटे जा चुके हैं और 447 वाहन जब्त किए गए हैं। 

शहर में हालात किस तरह से बिगड़ रहे हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर व डिप्टी कमिश्नर वरिंदर शर्मा के साथ अफसरों की फौज हर रोज फ्लैग मार्च निकाल रही है। इसके बावजूद लोगों का घरों से बाहर निकलना बदस्तूर जारी है। अफसर भले मेहनत कर रहे हों लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं हो रहा, यह स्पष्ट है। शहर की मुख्य सड़कों को छोड़ दें तो पिछड़े इलाकों में लोग कफ्र्यू तोड़ रहे हैं। पुलिस वाले सिर्फ नाकों पर तैनात हैं और कोई असरदार पेट्रोलिंग नहीं की जा रही। इस मुश्किल घड़ी में सबसे बड़ी दिक्कत यह भी आ रही है कई गलियां व मोहल्ले लोगों ने खुद सील कर दिए लेकिन अंदर लोग सैर कर रहे हैं या बाहर एक-दूसरे से मिलने के साथ खेल रहे हैं लेकिन पुलिस की वहां कोई नजर नहीं है।

कोरोना वायरस का लगातार बढ़ता दायरा प्रशासन व पुलिस के आला अफसरों की पूरे कामकाज पर पानी फेर रहा है। शहर के अंदरूनी इलाकों में हालात बदतर हैं। अभी तक वहां पुलिस सख्ती नहीं कर पा रही है। शुरूआत में पुलिस ने सख्ती की लेकिन कुछ कर्मचारी मारपीट पर उतारू हो गए। इसके बाद मामला डीजीपी व मुख्यमंत्री तक पहुंचा तो अब पुलिस इतनी नरम पड़ चुकी है कि लोगों ने कर्फ्यू का मजाक बनाकर रख दिया है। बड़ा सवाल यह है कि अगर इस लापरवाही से कोरोना संक्रमण फैल गया तो फिर क्या इसकी जिम्मेदारी सिर्फ लापरवाह होकर बाहर घूमने वालों डालकर पल्ला झाड़ लिया जाएगा या फिर कोरोना की जंग की अगुवाई कर रहे डिप्टी कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर व उनकी टीम इसकी जिम्मेदारी लेगी?। अब भी मौका है, अफसरों को सतर्क हो जाना चाहिए, बाहर घूमने वालों के लिए नहीं लेकिन कम से कम घरों में बैठे लोगों के लिए अन्यथा अब तक की तमाम कोशिश फेल होकर रह जाएगी।

घर में बैठे लोग फेसबुक पर मांग रहे जवाब

जिले की 25 लाख की आबादी में शामिल ज्यादातर लोग अपने घरों में बैठे हैं। इसके बावजूद कुछ लोग घर से बाहर घूम रहे हैं। जिससे किसी तरह घर बैठे लोगों को भी गुस्सा आ रहा है। लोग बाहर घूमते लोगों की फोटो व वीडियो डालकर प्रशासन व पुलिस से सवाल कर रहे हैं कि आखिर अधिकारी कर क्या रहे हैं। यह लोग बाहर कैसे घूम रहे हैं। इनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। पुलिस चाहे मारपीट न करे लेकिन बाहर निकलने वाले हर व्यक्ति पर सख्ती जरूरी है।

यहां देखिए अच्छी शुरूआत

इस सबके बीच एक अच्छी शुरूआत बस्ती दानिशमंदा में दिखी है। जहां एक व्यक्ति ने घर के बाहर लिखकर लगा दिया है कि कोई उसके घर न आए। सुरक्षा को ही जीवन बताते हुए इस व्यक्ति ने अपील की कि लोग एक-दूसरे से मिलना-जुलना छोड़ें और कोरोना से बचें।

Posted By: Vikas_Kumar

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