जेएनएन, जालंधर। पाकिस्तान में इमरान खान की अगुवाई में नई सरकार बनने जा रही है और उनके पंजाब से रहे खानदानी जुड़ाव के कारण बेहतर रिश्‍ते की उम्‍मीद की जा रही है। लेकिन, पाकिस्‍तान के मंसूबे पहले जैसे ही खतरनाक हैं। इमरान खान के शपथ ग्रहण की तैयारियों के संग उसने पंजाब में आतंक फैलाने का मास्‍टर प्‍लान भी बनाया है। पाकिस्तान ने अब 'रेफरेंडम 2020' और 'ऑपरेशन एक्सप्रेस' से पंजाब में हिंसा फैलाने की साजिश रची है।

 रेफरेंडम 2020 और ऑपरेशन एक्सप्रेस से पंजाब में हिंसा फैलाने की तैयारी

इस मास्टर प्लान के पीछे हमेशा की तरह पाकिस्तान की फौज और पाक की खुफिया एजेंसी आइएसआइ काम कर रही है। इतना ही नहीं कोटकपूरा के बरगाड़ी में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के मामले में चल रहे धरने पर भी आइएसआइ की नजर है। यहां भी पाकिस्तान गर्मख्यालियों की मदद से टकराव कराने की साजिश रच रहा है।

गर्मख्यालियों को फंडिग, पाक सेना के अफसर चौधरी दो साल से ऑपरेशन पर कर रहे काम

केंद्रीय और स्‍टेट इंटेलीजेंस ने इस बारे में सनसनीखेज जानकारी जुटाई है। पाकिस्तान और अन्य देशों से गर्मख्यालियों को फंडिग भी की जा रही है। पाक सेना रेफरेंडम 2020 के बहाने कट्टरपंथियों को फंड उपलब्ध करवाने के साथ-साथ पंजाब सहित पूरे देश अशांति फैलाने के लिए लोगों की संवेदनाओं का सहारा ले रही है। भारतीय खुफिया एजेंसीज की तरफ से इस बाबत एकत्र की गई सूचनाओं के अनुसार पाकिस्तान ऐसी साजिश रच रहा है।

आठ अफसरों की टीम भी कर रही है कट्टरपंथियों की मदद, बरगाड़ी के धरने पर भी आइएसआइ की नजर

पंजाब की खुफिया एजेंसियों ने इस बाबत केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से संपर्क कर जानकारियां सांझा की हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्‍तान खुफिया एजेंसी आइएसअाइ की टीम इंग्‍लैंड में 12 अगस्त को खालिस्तान के गठन की मांग को लेकर हो रहे 'रेफरेंडम 2020' को सफल बनाने की कवायद में जुटी है। इससे अंतररराष्ट्रीय मंच पर पंजाब को खालिस्तान के रूप में अलग करने की आवाज को और मजबूती मिलेगी। साथ ही इसके बहाने पंजाबी युवाओं को उन्हीं के तमाम करीबियों तथा विदेशों में बैठे कट्टरपंथियों की मदद से पंजाब और देश के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश की जाएगी।

कौन है मास्टर माइंड चौधरी साहब

'रेफरेंडम 2020' के मास्टरमाइंड का नाम चौधरी साहब को बताया जा रहा है। पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल शाहिद मोहम्मद मलही उर्फ चौधरी साहब सहित आठ अफसरों की टीम को पंजाब में अशांति फैलाने के काम पर लगाया है। इंग्लैंड में रेफरेंडम 2020 की मांग को लेकर कट्टरपंथी सिख संगठनों की तरफ से हो रही रैली के लिए भी चौधरी को ही तैनात किया गया है। इस संबंध में इंटेलीजेंस को मिली जानकारियों के अनुसार बरगाड़ी व बहिबल कलां कांड को लेकर चल रहे धरने पर बैठे लोगों को फंड उपलब्ध करवाया जा रहा है।

पठानकोट हमले के पीछे भी चौधरी!

चौधरी पर गुरदासपुर के दीनानगर में 2015 में हुए आतंकी हमले व 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का मास्टरमाइंड होने का आरोप है। लाहौर के पास के रहना वाला चौधरी बलौच रेजीमेंट में 1995 को तैनात हुआ था। 2012 में उसे लेफ्टिनेंट कर्नल बना दिया गया था। खुफिया एजेंसियों के अनुसार उसके बाद से ही वह पंजाब के रास्ते भारत में अशांति फैलाने के साजिशों में शामिल रहा है। 

आइबी कर चुकी है अलर्ट

इंटेलीजेंस ब्यूरो ने पंजाब सरकार को एक महीने पहले ही अलर्ट कर दिया था कि पंजाब में अशांति फैलाने की कोशिशें पड़ोसी पाकिस्तान की तरफ से मुल्क की तरफ से एक बार फिर नई रणनीति के तहत की जा रही है। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ बीते महीने आइबी चीफ राजीव जैन की मुलाकात भी चंडीगढ़ में हुई थी। करीब दो घंटे से ज्यादा चली मुलाकात में दोनों के बीच क्या-क्या बातें हुई थीं, इसका आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया था। लेकिन, इंटेलीजेंस के सूत्रों के अनुसार दोनों की सुरक्षा को लेकर अहम बातचीत हुई थी। उसके बाद से पंजाब इंटेलीजेंस की टीम भी रेफरेंडम 2020 को लेकर काफी सक्रिय हो गई।

आइएसआइ ने करवाई धार्मिक नेताओं की हत्या

पंजाब में पिछले कुछ सालों में धार्मिेक संगठनों व संस्‍थाओं के मारे गए नेता।

पंजाब में हिंदू और सिखों के बीच हिंसा भड़काने की भी आइएसआइ ने साजिश रची। इसके लिए बीते कुछ सालों में की गई कई धार्मिक हस्तियों की हत्याओं के पीछे भी आइएसआइ का हाथ होने के सबूत पंजाब पुलिस को मिले थे। उसके बाद इन हत्याओं की जांच की जिम्मेवारी एनआइए को सौंप दी गई। गिरफ्तार आरोपियों ने पंजाब में बीते सालों में की गई हिंदू, सिख व ईसाई समुदाय की हस्तियों की हत्या से जुड़े तमाम राज भी खोले हैं कि किस प्रकार उन्हें आइएसआइ के सरगनाओं व इंग्‍लैंड, जर्मनी, कनाडा सहित करीब छह देशों से कट्टरपंथियों की तरफ से फंड उपलब्ध करवाया जाता था।

रेफरेंडम 2020 है पंजाब को बांटने की कोशिश: कैप्टन

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रेफरेंडम के समर्थकों से पूछा है कि वे बताएं कि सिख भारत के कौन से राज्य में बेहतर काम नहीं कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये लोग सिखों की धार्मिक भावनाएं भड़का कर उनसे पैसा इकट्ठा कर रहे है। इस तरह के रेफरेंडम से कुछ होने वाला नहीं है क्योंकि पंजाब के लोग शांति और विकास चाहते हैं। रेफरेंडम पंजाब को बांटने की कोशिश है, लेकिन यह कतई सफल नहीं होगी।

अकाली दल ने भी जताई चिंता

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा है कि कांग्रेस स्वयंभू जत्थेदारों के नेतृत्व में बरगाड़ी में लगाए गए धरने की हिमायत करके पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह आग से खेलने की गलती दोहरा रही है। उन्होंने कहा कि इस बात के ठोस सुबूत हैं कि धरने के आयोजक राष्ट्र विरोधी तत्वों के साथ मिले हुए हैं। ये राष्‍ट्र विरोधी तत्‍व पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के साथ मिल कर 'ऑपरेशन एक्सप्रेस' की साजिश रच रहे हैं और हमारे देश में गड़बड़ फैलाने के लिए काम कर रहे हैं।

मजीठिया ने कहा कि रेफरेंडम 2020 के तार बरगाड़ी धरने से जुड़ने खुलासे के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी के सभी मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा जज से करवाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ व विदेश से की जा रही फंडिंग की जांच सीबीआइ से करवाई जानी चाहिए।

जर्मनी में रह रहे आतंकी भेज रहे रकम

मजीठिया ने कहा कि जर्मनी में रह रहे आतंकी इसके लिए रकम भेज रहे हैं। कांग्रेस को समझना चाहिए कि उसकी तरफ से शुरू किया गया नाटक उसके हाथों से निकल सकता है। क्योंकि, इस धरने के लिए वही लोग पैसे भेज रहे हैं, जो रेफरेंडम 2020 की हिमायत कर रहे हैं। ताजा खुलासों ने यह बात साबित कर दी है कि रेफरेंडम 2020 के लिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ पैसा दे रहा है। इसे 'ऑपरेशन एक्सप्रेस' नाम दिया गया है।

भारत सरकार की अपील को ब्रिटेन ने नकारा

उधर, खालिस्तान समर्थकों की 12 अगस्त को लंदन में होने वाली रैली पर रोक लगाने की भारत सरकार की मांग को ब्रिटेन ने खारिज कर दिया है। अलग खालिस्तान की मांग को लेकर लंदन में रेफरेंडम 2020 होना है। रैली का आयोजन सिख फॉर जस्टिस नामक संस्‍था कर रहा है।

फंडिंग पर जत्थेदारों में टकराव की संभावना

बरगाड़ी में बेअदबी के मामले पर चल रहे स्वयंभू जत्थेदारों को विदेशों से फंडिंग के बाद जत्थेदारों में विवाद पैदा हो गया है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, एक धड़ा सारा पैसा जत्थेदार ध्यान सिंह मंड व जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल के पास रखने से खफा है। नाराज जत्थेदारों में जत्थेदार अमरीक सिंह अजनाला, शिरोमणि अकाली दल अमृतसर के नेता जरकरण सिंह कानसिंह वाला और यूनाइटेड अकाली दल के अध्यक्ष जत्थेदार गुरदीप सिंह भटिंडा शामिल हैं। इसे लेकर इनमें टकराव हो सकता है। हालांकि गर्मख्याली नेता इससे इन्कार कर रहे हैं।

Posted By: Sunil Kumar Jha

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