जालंधर, जेएनएन। अगर आपको भी आरटीओ से ऐसा कोई एसएमएस आया है कि 'आपका चालान कटा है' और उसका जुर्माना भरने के लिए https://echallanparivahan.in/ की वेबसाइट दी है तो सतर्क हो जाएं, यह ऑनलाइन ठगी की कोशिश है। आरटीए जालंधर ने ऐसा कोई मैसेज नहीं भेजा है। यह मैसेज मंगलवार सुबह कई लोगों को एसएमएस के जरिए मिला। चालान काटने की ज्यादातर वजह बिना सीट बेल्ट बताई है और उसका 500 रुपये जुर्माना भरने को कहा है। हालांकि आरटीए के सेक्रेटरी बरजिंदर सिंह ने कहा कि उनके विभाग ने किसी को ऐसा कोई मैसेज नहीं भेजा है। यह चालान के नाम पर वसूली से कहीं ज्यादा लोगों के एटीएम यानि डेबिट और क्रेडिट कार्ड, नेटबैंकिंग की जानकारी आदि जुटाकर ठगी की कोशिश है। शहर में ही गगन अरोड़ा बब्बू, राहुल सब्बरवाल, गौतम जैन जैसे कई लोगों के पास यह मैसेज पहुंचा है।

ऐसे हुआ शक

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने को जिले में दो महीने क‌र्फ्यू लगा रहा। किसी को गाड़ी बाहर निकालने की इजाजत नहीं थी। इसके बाद अब लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में जब लोगों को ये एसएमएस मिला तो वे हैरान हुए कि गाड़ी तो घर में खड़ी थी, फिर चालान कैसे हो गया। फिर उन्होंने आरटीए दफ्तर से पता किया तो स्पष्ट हुआ कि यह हैकरों व ऑनलाइन ठगों ने पैसे हड़पने की स्कीम बनाई है। जिसके जरिए अलग-अलग जगहों से लोगों की गाड़ियों के नंबर लेकर उन्हें मैसेज भेजे जा रहे हैं।

केंद्र सरकार के नाम से बनाई वेबसाइट

चालान का जुर्माना भरने को दी वेबसाइट को केंद्र सरकार से जोड़ा गया है। ठगों ने इसे केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की पहल बताते हुए बनाया है। इसमें लोगों को चालान नंबर, गाड़ी नंबर या डीएल नंबर भरकर जुर्माना भरने को कहा जा रहा है। इनमें से कोई एक चीज भरने के बाद आगे पेमेंट का विकल्प आ जाता है, जिसमें लोगों को अपना कार्ड नंबर, सीवीवी कोड व उसके एक्सपायरी होने की तारीख भरनी पड़ती है। फिर उनके मोबाइल पर ओटीपी भेजा जाता है। यह ओटीपी वेबसाइट पर भरने के बाद बैंक अकाउंट या फिर कार्ड हैक कर लिया जाता है और हैकर सारे पैसे उड़ा ले जाते हैं।

असली की हूबहू नकल, डिजाइन भी वैसा ही

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की तरफ से भी ऑनलाइन चालान के लिए वेबसाइट https://echallan.parivahan.in/ बनाई गई है लेकिन ठगों ने उसी तरह के नाम https://echallanparivahan.in/ से यह वेबसाइट बनाई है। इसका डिजाइन भी असली वेबसाइट की तरह है। कुछ लोगों ने जब वेबसाइट की पड़ताल की तो उसकी रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश में दिखाई जा रही है। वेबसाइट भी आठ अप्रैल 2020 को बनी है और उसे 13 अप्रैल को अपडेट किया गया है। खास बात यह है कि एसएमएस भेजने के लिए 'वाहन' नाम इस्तेमाल किया जा रहा है, यह नाम भी केंद्रीय परिवहन विभाग के गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की जानकारी चेक करने वाले मोबाइल नंबर की नकल है।

एक ही कंपनी की कारों को मैसेज!

मामले में बड़ा सवाल है कि चालान काटने के यह फर्जी एसएमएस एक ही कंपनी की कार के मालिकों को आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने सवाल खड़े किए हैं कि उनकी कार के बारे में जानकारी ठगों तक कैसे पहुंची।

आरटीए दफ्तर की ओर से किसी को भी इस तरह के मैसेज नहीं भेजे गए हैं। विभाग को अभी तक किसी ने ऐसी शिकायत नहीं की है। अगर कोई शिकायत करे तो फिर पुलिस कार्रवाई करवाई जा सकती है।

-बरजिंदर सिंह, आरटीए सेक्रेटरी

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