जेएनएन, जालंधर। पुलवामा आतंकी हमले का एक साल हो गया है। हमले में पंजाब के भी कई जवानों ने शहादत दी। इसके बाद शहीदों के सम्मान में नेताओं ने अनेक घोषणाएं की, लेकिन कई वादे पूरेे नहींं हुए। आइए जानते हैं पंजाब के किन जवानों ने शहादत दी और अब उनके परिवार किस हाल में हैं।

शहीद कुलविंदर... इकलौता चिराग की कुर्बानी पर परिवार को गर्व

पिता दर्शन सिंह ट्रक ड्राइवर थे। परिवार की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी। मां अमरजीत कौर बीमार रहती थीं। पिता की कमाई का अधिकतर हिस्सा इलाज पर खर्च होता था। रूपनगर के गांव रौली में एक छोटा सा कच्चा मकान था जहां कुलविंदर का बचपन बीता। आइटीआइ से एसी मैकेनिक की पढ़ाई पूरी करते ही परिवार की जिम्मेदारी उठाने का वक्त आ गया।

वर्ष 2014 में 21 साल की उम्र में कुलविंदर सीआरपीएफ की 92 वीं बटालियन में भर्ती हो गए। परिवार के हालत कुछ ठीक हुए तो पिता से ड्राइवर का काम बंद करवा दिया। मनिंदर माता-पिता के लिए पक्का मकान बनवा रहे थे। शादी भी तय हो चुकी थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकी हमले में कुलविंदर सिंह ने देश के लिए कुर्बानी दे दी। परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया। मां आज भी बार-बार बेटे की फोटो सीने से लगाकर आंसू बहाती है।

गुरुजी ने वंश न्योछावर कर दिया था मैंने तो एक सपूत कुर्बान किया

शहीद के पिता का कहना है कि दशम पिता गुरु गोबिंद सिंह जी ने तो अपना पूरा वंश कौम पर न्योछावर कर दिया था। मैंने तो एक सपूत कुर्बान किया। फक्र है कि बेटा देश के लिए कुछ कर गुजरा।

अंतिम विदाई देने उमड़ पड़ा था पूरा इलाका

16 फरवरी 2019 नूरपुरबेदी में दोपहर दो बजे तक बाजार पूरी तरह बंद रहे। शहीद कुलविंदर को अंतिम विदाई देने पूरे क्षेत्र के लोग उमड़ पड़े। युवा हाथ में तिरंगा लेकर अंतिम यात्रा में शामिल हुए। हजारों लोगों ने नम आंखों से सपूत को विदाई दी थी।

शहीद के नाम पर रखा स्कूल का नाम : डीसी

रूपनगर की डीसी सोनाली गिरि का कहना है कि प्रशासन शहीद के परिवार के साथ खड़ा है। गांव के स्कूल का नाम शहीद कुलविंदर सिंह कर दिया गया है। गांव की सड़क के लिए 2.5 करोड़ मंजूर हो गए हैं। सड़क का नाम भी शहीद के नाम पर ही होगा।

परिवार को दें बनता सम्मान: बरिंदर ढिल्लों

पंजाब यूथ कांग्रेस के प्रधान बरिंदर सिंह ढिल्लों का कहना है कि वे जल्द शहीद के परिवार से मिलेंगे। हमारी जिम्मेदारी बनती है कि परिवार को कभी अकेलेपन का अहसास नहीं होने दें।

जवान का परिचय

शहीद : कुलविंदर सिंह

जन्म : 24 दिसंबर 1992

भर्ती : 2014

बटालियन : 92 सीआरपीएफ

शहादत : 14 फरवरी 2019

पिता : दर्शन सिंह

माता : अमरजीत कौर

सुखजिंदर सिंह... 12वीं के बाद ही देश की सेवा में समर्पित हो गया था सुखजिंदर

विधानसभा हलका पट्टी के गांव गंडीविंड निवासी मध्यवर्गीय किसान गुरमेज सिंह के बेटे सुखजिंदर सिंह ने 12वीं के बाद वर्ष 2002 में देश की सेवा लिए सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। पहली पोस्टिंग जालंधर कैंट में हुई। बाद में अलीगढ़, जम्मू-कश्मीर, नासिक में तैनात रहे। वर्ष 2017 में हवलदार बने तो 15 दिसंबर 2018 को वह डेढ़ माह की छुट्टी पर घर आए। 28 जनवरी 2019 को उनकी जब वापसी हुई तो पता चला कि अब पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर में होगी। वहीं 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में वह शहीद हो गए।

छुट्टी पर गांव आते तो सबकी खैरियत पूछते थे

गांव डंडीविंड के लोगों का कहना है कि सुखजिंदर जब छुट्टी आता था तो गांव के हर घर में जाकर सबकी खैरियत पूछता था। उसका छोटे बच्चों के साथ काफी लगाव था। सुखजिंदर का छोटा भाई गुरजंट सिंह पंजाबी गायक है, जबकि मां हरभजन कौर गृहणी हैं। पिता गुरमेज सिंह के पास तीन एकड़ जमीन है।

अंतिम संस्कार में आए थे ये लोग

माल मंत्री पंजाब सुखबिंदर सिंह सरकारिया, विधायक हरमिंदर सिंह गिल, डॉ. धर्मबीर अग्निहोत्री, सुखपाल सिंह भुल्लर, कुलबीर सिंह जीरा, भाजपा के राज्य सभा मेंबर विजय गोयल, पूर्व मंत्री प्रो. लक्ष्मी कांत चावला, अनिल जोशी, तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, पूर्व विधायक जसबीर सिंह डिंपा, आइजी जसकरन सिंह, डीसी प्रदीप सभ्रवाल, एडीसी संदीप ऋषि, एसडीएम डॉ. अनुप्रीत कौर, नगर कौंसिल पट्टी अध्यक्ष सुरिंदर कुमार शिंदा सहित सैकड़ों लोगों ने मौजूद होकर शहीद को श्रद्धांजलि दी थी।

सरकार और प्रशासन नहीं मना रहा बरसी

प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन शहीद की कुर्बानी को भूल चुके हैं। 14 फरवरी को शहीद सुखजिंदर सिंह की पहली बरसी पर कोई कार्यक्रम तय नहीं है। हालांकि परिवार गुरुद्वारा बाबा संता सिंह गंडीविंड में श्री सुखमणि साहिब के पाठ करवा रहा है।

शहीद सुखजिंदर देश और कौम का जांबाज सिपाही : विधायक गिल

पट्टी के विधायक हरमिंदर सिंह गिल ने कहा कि शहीद सुखजिंदर हमारे देश और कौम का जांबाज सिपाही था। उनकी शहादत को नमन करने के लिए बरसी के कार्यक्रम में जरूर जाएंगे।

शहीद का परिचय

नाम : सुखजिंदर सिंह

पिता : गुरमेल सिंह

माता : हरभजन कौर

भाई : गुरजंट सिंह

पत्नी : सरबजीत कौर

बेटा : गुरजोत सिंह (पिता की शहादत मौके उम्र आठ माह)

पता : विधानसभा हलका पट्टी का गांव गंडीविंड

शहीद सुखजिंदर के परिवार की अनदेखी पर सुखबीर ने कैप्टन को घेरा

पिछले वर्ष पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ के जवान सुखजिंदर सिंह की अनदेखी पर शिअद अध्यक्ष सांसद सुखबीर सिंह बादल ने प्रदेश की कैप्टन सरकार को घेरा है। 'दैनिक जागरण' में बुधवार के अंक में प्रकाशित खबर 'बीता साल, ना मिली नौकरी, ना सात लाख' को फेसबुक पर शेयर करते हुए सुखबीर ने लिखा कि शहीदों के परिवार के साथ अगर कैप्टन सरकार का यह रवैया है तो आम लोगों का क्या होगा।

गांव गंडीविंड निवासी सुखजिंदर सिंह पिछले वर्ष 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। कैप्टन सरकार ने शहीद के परिवार को 12 लाख रुपये व उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था। परिवार को अब तक सिर्फ पांच लाख रुपये ही मिले हैं, जबकि नौकरी के नाम पर शहीद की पत्नी सरबजीत कौर को चपरासी बनाया जा रहा है। परिवार ने पिछले दिनों इस बात पर रोष जताया था। 'दैनिक जागरण' में इस मुद्दे को प्रमुखता से छापा गया।

सुखबीर ने यह लिखा फेसबुक पर...

सुखबीर बादल ने खबर की कटिंग के साथ लिखा, 'शहीद के परिवार को एक्सग्रेशिया ग्रांट देने का वादा पूरा नहीं किया जा रहा। सरकार शहीद की पत्नी को सरकारी नौकरी के नाम पर दर्जा चार कर्मचारी लगाने जा रही है परंतु शहीद की पत्नी ने इस नौकरी को ठुकराते हुए कैप्टन सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। शहीदों के परिवार के साथ अगर कैप्टन सरकार का यह रवैया है तो आम लोगों के साथ क्या सुलूक किया जा रहा है, यह सबके सामने है।'

दीनानगर के दिल में मनिंदर, मन में जज्बात

21 साल की उम्र में मां की ममता का आंचल सिर से उठ गया था। 31 साल की उम्र में भारत मां की रक्षा करते हुए खुद शहादत का जाम पी लिया। हम बात कर रहे हैं पुलवामा के आतंकी हमले में शहादत पाने वाले दीनानगर के लाल शहीद मनिंदर सिंह की। मनिंदर पढ़ाई में होनहार थे। 12वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय में हुई। बीटेक के बाद निजी कंपनी में एक साल तक नौकरी भी की लेकिन दिल में देश के लिए कुछ कर गुजरने के जज्बा था। वर्ष 2017 में सीआरपीएफ की 75वीं बटालियन में भर्ती हो गए। पहली तैनाती आंतक प्रभावित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर में हुई।

कबड्डी व बास्केटबॉल के खिलाड़ी को पेंटिंग से था प्यार :

मनिंदर कबड्डी व बास्केटबॉल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी थे। पेंटिंग का भी बहुत शौक था। मनिंदर 13 फरवरी 2019 को 15 दिन की छुट्टी काटकर ड्यूटी पर लौटा था। घर पर पिता और बहनें दुल्हन लाने के सपने संजो रही थीं लेकिन 14 फरवरी को मनिंदर ने देश के लिए शहादत दे दी। बहनों ने भाई को सेहरा बांधकर विदा किया था।

परिवार ने नहीं हारी हिम्मत

बहनों की शादी हो चुकी है। 75 वर्षीय पिता सतपाल अत्री घर पर अकेले रहते थे। देखभाल के लिए किसी के न होने के कारण सीआरपीएफ जवान छोटे भाई लखवीश ने भी प्रदेश सरकार के कहने पर नौकरी छोड़ दी। शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह गुरुद्वारा में देंगे श्रद्धांजलि शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की का कहना है कि मनिंदर की शहादत को नमन करने के लिए 14 फरवरी को शेर-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंह गुरुद्वारा दीनानगर में श्रद्धांजलि दी जाएंगी।

हजारों लोगों ने दी थी अंतिम विदाई

शहीद का पार्थिव शरीर जब दीनानगर पहुंचा था हजारों की संख्या में युवा व क्षेत्रवासी अपने वीर को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। मंत्री, विधायक सहित प्रशासन भी मौजूद रहा था।

सरकार हर वादा करेगी पूरा : अरुणा चौधरी

कैबिनेट मंत्री अरुणा चौधरी का कहना है कि मनिंदर की शहादत को एक साल पूरा हो गया है लेकिन परिवार के घाव अब भी हरे हैं। मनिंदर के हम सब कर्जदार हैं। पंजाब सरकार परिवार से किए सभी वादे जल्द पूरे कर रही है।

शहीद का परिचय

शहीद : मनिंदर सिंह

जन्म : 21 जून 1988

बटालियन : 75 सीआरपीएफ

पद : कांस्टेबल

शहादत : 14 फरवरी 2019

पिता : सतपाल अत्री

माता : स्व. राज कौर

सरकार को वादे याद नहीं और सांसद को शहीद जैमल सिंह

देश के लिए जान न्यौछावर करने वाले शहीद जैमल सिंह की याद में कार्यक्रम तो क्या करवाना था एक ही साल में उन्हे भुला दिया गया। और तो और यहां के सांसद को तो यह भी याद नहीं कि मोगा का कोई जवान पुलवामा हमले में शहीद भी हुआ था। पुलवामा हमले की पहली बरसी पर जब सांसद मोहम्मद सदीकसे बात की गई तो उन्होंने मोगा के शहीद जैमल सिंह के बारे में अनभिज्ञता जताई। इसका दोष भी मोदी सरकार पर मढ़ा। कहा, 'सॉरी..मोदी सरकार ऐसे-ऐसे काम करती है कि वही मुद्दे दिमाग में घूमते रहते हैं। शहीदों को याद रखना चाहिए, लेकिन सॉरी मुझे नहीं याद कि मोगा का कोई जवान पुलवामा में शहीद हुआ था। शहीद की पत्नी सुखजीत कौर का कहना है कि सरकार ने जो वादे किए थे, सब भूल गई।

वादे तो नहीं हुए पूरे

  1. कोटईसे खां से गांव गलौटी तक की सड़क का नाम शहीद के नाम पर।
  2. सांसद भगवंत मान का शहीद के नाम पर गेट बनाने का वादा।
  3. पंजाब सरकार ने 12 लाख देने का वादा किया था, अभी सात ही मिले।
  4. जैमल सिंह जिस सरकारी हाईस्कूल में पढ़े, उसका नाम शहीद के नाम पर रखना था।
  5. इन सभी वादों को पूरा करने के लिए 29 नवंबर 2019 को नगर पंचायत ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर डिप्टी डायरेक्टर को भेजा था परंतु अभी तक मंजूरी नहीं मिली।

परिवार खुद ही करवा रहा कार्यक्रम

शहीद के परिवार ने अपने स्तर पर गांव के कलगीधर गुरुद्वारा मसीतां रोड पर कार्यक्रम रखा है। सरकारी हाईस्कूल के प्रिंसिपल बलबिंदर सिंह का कहना है कि स्कूल में शहीद की याद में कार्यक्रम कराने का कोई आदेश नहीं मिला है।

ऐसे पाई शहादत

23 अप्रैल 1993 को सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे। बटालियन को जिस बस में ले जाकर कश्मीर शिफ्ट कर रहे थे उसे जैमल सिंह चला रहे थे। जैमल एमटी इंचार्ज थे। अधिकांश समय दफ्तर में ही रहते थे लेकिन उस दिन खुद ड्राइव करके बटालियन ले जाने लगे।

परिचय

शहीद जैमल सिंह

जन्म : 27 अप्रैल 1974

पिता : जसवंत सिंह।

माता : सुखविंदर कौर।

पत्नी : सुखजीत कौर।

6 साल का बेटा गुरु प्रकाश सिंह। वर्तमान में पंचकूला में गुरुकुल स्कूल का छात्र है।

पता :गांव गलौटी, कोटईसे खां, मोगा।

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Posted By: Kamlesh Bhatt

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