राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान पद पर नवजोत सिंह सिद्धू बने रहेंगे और वह अपना इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं इसे लेकर स्थिति वीरवार को स्पष्ट हो जाएगी। पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत ने सिद्धू को दिल्ली बुलाया है। हालांकि रावत का कहना है कि बैठक संगठन को लेकर होनी है। माना जा रहा है सिदधू, हरीश रावत और केसी वेणुगोपाल के बीच होने वाली इस बैठक में यह तय होना है कि कांग्रेस के प्रदेश प्रधान की कुर्सी पर बने रहेंगे या नहीं।

बता दें कि नवजोत सिंह सिद्धू ने 28 सितंबर को प्रदेश प्रधान पद से इस्तीफा दे दिया था। सिद्धू ने इस्तीफा मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की ओर से इकबाल प्रीत सिंह सहोता को कार्यवाहक डीजीपी बनाने और एपीएस देओल को एडवोकेट जनरल लगाने के विरोध में इस्तीफा दे दिया था। सिद्धू का कहना था कि सहोता ने ही बेअदबी कांड की पहली एसआईटी को हेड किया था। इसी एसआईटी की रिपोर्ट पर दो निर्दोष सिखों को उठाया गया था। जबकि देओल ने पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी समेत उन पुलिस अधिकारियों के केस लड़े थे जिनके नाम बेअदबी मामले में जुड़े थे। सिद्धू ने अपने ही सरकार के खिलाफ जाकर इस्तीफा दिया था। इसके कारण कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई थी। सिद्धू ने अभी तक अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया है।

उसके बाद सिद्धू का एक वीडियो सामने आया जिसमें वह मुख्यमंत्री के खिलाफ अपशब्द का प्रयोग कर रहे हैं। इस वीडियो को कांग्रेस ने बेहद गंभीरता से तो लिया लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के तख्तापलट के बाद के राजनीतिक स्थित को देखते हुए कांग्रेस पशोपेश में पड़ी है। पंजाब कांग्रेस का एक बहुत बड़ा वर्ग यह नहीं चाहता कि सिद्धू बतौर प्रधान अपना कामकाज आगे बढ़ाए। वहीं, कांग्रेस की परेशानी है कि 2022 के चुनाव सिर पर आ गए हैं और उसे फिर से नए प्रधान को ढूंढने की कवायद शुरू करनी पड़ेगी। पहले ही पंजाब कांग्रेस का ढांचा भंग पड़ा है। करीब दो साल में नया ढांचा तैयार नहीं हो पाया है।

ऐसे में वीरवार शाम को होने वाली बैठक खासी अहम मानी जा रही है। अगर सिद्धू अपने इस्तीफे पर ही अड़े रहे तो मजबूरी में कांग्रेस को उनका इस्तीफा स्वीकार करना पड़ेगा। जिससे पंजाब में पुन: राजनीतिक अस्थिरता पैदा होगी। वहीं, कांग्रेस की चिंता यह भी है कि जिस प्रकार से सिद्धू ने नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को लेकर रुख अपनाया हुआ है, उसे भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है। क्योंकि सिद्धू खुद मुख्यमंत्री बनना चाहते थे लेकिन चन्नी मुख्यमंत्री बने। इसके बाद से ही सिद्धू और चन्नी के बीच दूरियां बढ़ती गई। सिद्धू मुख्यमंत्री के बेटे की शादी व रिसेप्शन पार्टी में भी नहीं गए थे।

Edited By: Pankaj Dwivedi