जालंधर, [जगजीत सिंह सुशांत]। जिले में इन दिनों भाजपा और कांग्रेस में हलचल तेज हो गई है। कारण दोनों ही पार्टियों में जिला प्रधान पद के लिए नेताओं का सक्रिय होना है। केंद्र में सत्तारूढ भाजपा का संगठनात्मक चुनाव के लिए शेड्यूल जारी हो गया है। पंजाब में 20 अगस्त तक भाजपा की मेंबरशिप होगी और एक सितंबर से संगठनात्मक चुनावों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। सितंबर में बूथ और शक्ति केंद्र गठित होंगे। इसके बाद अक्टूबर में मंडल और जिला प्रधान पर फैसला हो जाएगा। इसी तरह कांग्रेस में भी जिला शहरी प्रधान के लिए कई नेता अंदरखाते सक्रिय हो चुके हैं। हालांकि कांग्रेस का नेशनल प्रेजिडेंट अंतरिम होने से जिला शहरी प्रधान पर कोई फैसला नहीं हो पाया है। इस पद के कई दावेदार हैं और वे अपनी तरफ से लॉबिंग करने में जुटे हुए हैं।

जिला भाजपा प्रधान रमन पब्बी को रमेश शर्मा की चुनौती
भाजपा के संगठनात्मक चुनाव के शेड्यूल का एलान होते ही जिला प्रधान पद के लिए दावेदारों की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं। मौजूदा प्रधान रमन पब्बी और पूर्व प्रधान रमेश शर्मा में प्रधान पद के लिए जोर अजमाइश है। पंजाब भाजपा में इस समय जो टीम काबिज है वह पूरी तरह से मौजूदा जिला प्रधान रमन पब्बी की ही फेवर में है। इसी टीम की लॉबिंग पर एक साल पहले रमेश शर्मा को जिला प्रधान पद से हटाकर रमन पब्बी को प्रधान बनाया गया था। हालांकि पार्टी के सीनियर नेता रमेश शर्मा की वर्किंग को बेहतर बता रहे हैं लेकिन लॉबिंग के मामले में रमन पब्बी मजबूत हैं। रमन पब्बी की पीठ पर पंजाब भाजपा के जनरल सेक्रेटरी राकेश राठौर का हाथ है। रमेश शर्मा को पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला, पूर्व मंत्री मनोरंजन कालिया, पूर्व विधायक केडी भंडारी समेत कई बड़े नेताओं का समर्थन है लेकिन यह सभी नेता पार्टी में इस समय हाशिए पर चल रहे हैं। इसके बावजूद रमेश शर्मा का दावा मजबूत है क्योंकि मौजूदा जिला भाजपा टीम की कारगुजारी दमदार नहीं रही है। लोकसभा चुनाव में जालंधर की भाजपा कोटे की तीन विधानसभा सीटों में से सेंट्रल और नॉर्थ में भाजपा को हल्की बढ़त मिली है लेकिन इसके लिए जिला भाजपा की वर्किंग की बजाए मोदी लहर का असर ही रहा।

तकनीकी संकट ने बचा रखी देव की कुर्सी
जिला कांग्रेस जालंधर शहरी के प्रधान पद पर कई नेता नजरें टिकाए हुए हैं। सांसद चौधरी संतोख सिंह और विधायक राजिंदर बेरी की लॉ¨बग की बदौलत प्रधान बने बलदेव सिंह देव को प्रधान पद से कभी भी हटाया जा सकता है। लोकसभा चुनाव में शहर में पार्टी की कमजोर स्थिति और गलत राजनीतिक फैसलों से देव के लिए मुश्किल बनी हुई है। चुनाव से पहले पुरानी टीम को भंग करना, नई टीम का गठन न कर पाना, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कमजोर कैंपेनिंग, वार्ड नंबर 76 और 78 में अपनी ही पार्टी के पार्षदों के विरोधियों को मजबूत करने के लिए पद देने की कई शिकायतें हाईकमान तक पहुंची हैं। जिला प्रधान बदलने की बात चली है लेकिन अभी तक पंजाब प्रधान को लेकर स्थिति साफन होने से बलदेव सिंह देव की कुर्सी बची हुई है।

पंजाब प्रधान पद से इस्तीफा दे चुके सुनील जाखड़ की प्रधानगी जारी रहती है या नहीं, इस पर फैसला होने के बाद ही देव की प्रधानगी की स्थिति साफ होगी। जाखड़ पर फैसला एक हफ्ते में संभावित है। चूंकि राष्ट्रीय प्रधान अंतरिम है इसलिए पंजाब प्रधान बदलना संभव नहीं लग रहा है। लेकिन जाखड़ प्रधान बने रहेंगे इसकी औपचारिकता भी पूरी करनी होगी। तकनीकी रुप से अंतरिम प्रधान के पास प्रधान बदलने का अधिकार नहीं होता है। जाखड़ भी दोबारा प्रधान पद पर बने रहना चाहते हैं और ऐसा होने पर भी देव की कुर्सी जाना तय माना जा रहा है। प्रधान पद के लिए कांग्रेस किसी स्वर्ण हिन्दू या दलित हिन्दू पर दांव खेल सकती है। इसके लिए कुछ पार्षदों पर भी नजर है।
 

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