15 की उम्र में पिता के कारोबार से जुड़े, आज देशभर में पहचान बना रहे जालंधर के दो भाई
केके नेट्स कंपनी के एमडी अभिषेक गुप्ता और सलिल गुप्ता अपने पिता अनूप गुप्ता की कारोबारी विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

केके नेट्स के अभिषेक और सलिल गुप्ता ने पिता की विरासत को दिया नया आयाम।
HighLights
अभिषेक और सलिल गुप्ता ने संभाली पिता की कारोबारी विरासत।
केके नेट्स के खेल उत्पाद देशभर में बना रहे पहचान।
गुणवत्ता, इनोवेशन और निरंतर प्रयास से कारोबार का विस्तार।
कमल किशोर, जालंधर। मंजिल दूर हो तो कदम रोकने के बजाय मेहनत और बढ़ा देनी चाहिए। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है केके नेट्स कंपनी के एमडी अभिषेक गुप्ता और सलिल गुप्ता ने। पिता से कारोबार की बारीकियां सीखीं, चुनौतियों के बीच हौसला बनाए रखा और आज दोनों भाई अपने पिता की कारोबारी विरासत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं।
केके नेट्स कंपनी क्रिकेट नेट्स, स्पोर्ट्स वीयर्स, बल्ले और अन्य खेल उत्पाद तैयार करती है। कंपनी के उत्पादों की देशभर में पहचान बन चुकी है और कारोबार विभिन्न राज्यों तक फैला हुआ है।
अभिषेक गुप्ता के लिए कारोबार की शुरुआत किसी किताब या मैनेजमेंट क्लास से नहीं, बल्कि पिता अनूप गुप्ता के साथ काम करते हुए हुई। महज 15 वर्ष की उम्र में वह पिता के कारोबार से जुड़ गए थे। खरीददारों से मिलना, उनकी जरूरत समझना और ऑर्डर लेना इन सबकी बारीकियां उन्होंने पिता से ही सीखीं।
पिता के निधन के बाद पिता की विरासत को संभाला
वर्ष 2012 में पिता अनूप गुप्ता का निधन हो गया। इसके बाद दोनों भाइयों ने उनकी सीख और कारोबार की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली। अभिषेक ने दयानंद माडल स्कूल से पढ़ाई की और डीएवी कालेज से बीकाम किया। कारोबार को विस्तार देने के लिए उन्होंने विभिन्न राज्यों का रुख किया और खरीददारों से सीधे संपर्क बढ़ाया।
सिर्फ उत्पाद नहीं, भरोसा बेचते हैं
अभिषेक गुप्ता बताते हैं कि उत्पादों को अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने के लिए मार्केटिंग के साथ-साथ बिक्री पर भी जोर दिया गया। खेल बाजार में अपनी पहचान बनाए रखने के लिए गुणवत्ता को प्राथमिकता दी और समय के साथ उत्पादों में नए प्रयोग यानी इनोवेशन किए।
दोनों भाई खेल प्रदर्शनियों में भी नियमित रूप से हिस्सा लेते हैं। अपने तैयार किए गए उत्पादों को खरीददारों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनियों में स्टाल बुक किए जाते हैं। यहां उत्पादों को देखने और समझने के बाद खरीददारों का भरोसा और मजबूत हुआ। इनोवेशन का फायदा यह हुआ कि अब ऑर्डर आनलाइन माध्यम से भी मिलने लगे हैं।
पिता ने क्वालिटी से समझौता करना नहीं सिखाया
अभिषेक कहते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय अनूप गुप्ता ने हमेशा सच्चाई की राह पर चलने और क्वालिटी से कभी समझौता नहीं करने की सीख दी। पिता के कारोबारी विचारों को उन्होंने सिर्फ सुना नहीं, बल्कि उन्हें अपने काम का हिस्सा बना लिया। आज भी कारोबार में उन्हीं सिद्धांतों को अपनाकर आगे बढ़ रहे हैं।
ऑर्डर न मिले तो अगले दिन फिर कोशिश
कारोबार में हर दिन सफलता मिले, यह जरूरी नहीं। कई बार खरीददारों से ऑर्डर नहीं मिलता, लेकिन अभिषेक और सलिल इसे निराशा की वजह नहीं बनने देते। उनका मानना है कि एक दरवाजा बंद होने के बाद कोशिश रोक देना समाधान नहीं है।
अभिषेक गुप्ता बताते हैं कि वे सकारात्मक सोच के साथ खरीददारों से मिलते हैं। अगर किसी दिन ऑर्डर नहीं मिलता तो नकारात्मकता को खुद पर हावी नहीं होने देते। अगले दिन फिर नए उत्साह के साथ खरीददारों से मिलने निकल पड़ते हैं।
यही निरंतर प्रयास दोनों भाइयों की कारोबारी यात्रा की खास पहचान बन गया है। कारोबार के साथ अभिषेक गुप्ता विभिन्न खेल संगठनों में अलग-अलग पदों पर भी कार्यरत हैं। पिता से मिली सीख, गुणवत्ता पर भरोसा और लगातार आगे बढ़ने का जज्बा आज उनके कारोबार की पहचान बन चुका है।
