जागरण संवाददाता जालंधर : नगर निगम हाउस की शुक्रवार को होने वाली मीटिग स्थगित कर दी गई है। एलईडी प्रोजेक्ट में गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद मेयर जगदीश राजा ने सिर्फ इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए हाउस बुलाया था लेकिन अब इसे दूसरी बार स्थगित किया गया। इस बार बैठक रद करने का कारण वरिष्ठ कांग्रेस नेता व जिला प्लानिग बोर्ड के चेयरमैन मनोज अरोड़ा का निधन बताया गया।

बैठक स्थगित करने को लेकर राजनीति तेज हो गई है और कांग्रेस दो खेमों में बंट गई है। इस प्रोजेक्ट को लेकर मेयर भी अब आरोपों के दायरे में आ गए। कांग्रेस के वार्ड नंबर आठ से पार्षद शमशेर सिंह खैहरा और वार्ड 58 से पार्षद राजविदर सिंह राजा ने प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया है कि इस प्रोजेक्ट में एक नहीं कई गड़बड़ियां हुई है। सीधे तौर पर कहें तो मेयर जगदीश राजा ही इसके लिए जिम्मेवार हैं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट पर काम कर रही कांट्रैक्ट कंपनी ने एग्रीमेंट के मुताबिक काम नहीं किया। पिछले हाउस में जब पार्षदों की नाराजगी बढ़ी तो मेयर ने हाउस की मीटिग में इस पर चर्चा कराने का फैसला लिया था। अब जिस तरह से हाउस को बार-बार आगे बढ़ाया जा रहा है उससे साफ है कि मेयर स्मार्ट सिटी के अफसरों और ठेकेदार को इतना समय दे रहे हैं कि वह प्रोजेक्ट में हुई गड़बड़ियों को दूर कर लें।

पूर्व विधायक राजिदर बेरी के करीबी पार्षद शमशेर सिंह खैहरा ने कहा कि मेयर स्मार्ट सिटी के डायरेक्टर हैं और इस पद के नाते वह कभी भी प्रोजेक्ट को रिव्यू कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने एक बार भी ऐसा नहीं किया। ठेकेदार तय समय पर काम नहीं कर राह और एक्सटेंशन ली गई है। अभी भी कई काम लंबित हैं लेकिन इन खामियों को दूर करने के लिए कोई प्रयास तक नहीं किया गया। ------ प्रोजेक्ट 43 करोड़ से 62 करोड़ का हुआ

पार्षद खैहरा व राजा ने कहा कि हाउस मीटिग के लिए जारी एजेंडे में स्मार्ट सिटी कंपनी के हवाले से जो विवरण दिया गया है उसमें प्रोजेक्ट की कुल कीमत 43 करोड़ बताई गई है लेकिन असलियत में यह प्रोजेक्ट अब 62 करोड़ का हो चुका है। दावा किया कि ठेकेदार ने लागत बढ़ने का हवाला देकर प्रोजेक्ट में पहले 15 प्रतिशत और फिर 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करवाई। इससे प्रोजेक्ट 62 करोड़ का हो गया है। उन्हें यह भी जानकारी मिली है कि स्मार्ट सिटी कंपनी ने ठेकेदार को बड़ी राशि जारी भी कर दी है जबकि उतना काम भी नहीं हुआ। ---------

ना कंट्रोल रुम बना, ना शिकायतों का निपटारा

ठेकेदार ने एलईडी लाइटों की मानिटरिग के लिए नगर निगम परिसर में कंट्रोल रुम बनाना था लेकिन अभी तक नहीं बनाया गया। शिकायतों के निपटारे के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है और लोगों को परेशान होना पड़ता है। दो वार्ड के रिपेयर के लिए एक टीम उपलब्ध करवाई जानी थी लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। काम पूरा करने का समय 12 महीने का था लेकिन अब डेढ़ साल बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। 11 गांव में कम वाट की लाइटें लगाने का अरोप

कांग्रेस पार्षदों को आरोप है कि निगम की हद में आए कैंट में 11 गांव में लगाई गई एलईडी भी टेंडर के मुताबिक नहीं है। इन गावों में 35 वाट की 2036 और 70 वाट की 56 लाइटें लगानी थी लेकिन 18 वाट की 1683, 35 वाट की 483 और 70 वाट की 56 लाइटें लगाई गई। 18 वाट की एक भी लाइट नहीं लगानी थी लेकिन 80 प्रतिशत लाइटें ही 18 वाट की लगाई गई हैं। --------

60 हजार पुरानी लाइट्स कहां गई

शहर में 60 हजार सोडियम लाइटें लगी थी लेकिन अब यह लाइटें कहां हैं इसका कुछ पता नहीं। पुरानी ठेका कंपनी पीएचपी को यह लाइटें देने का करार हुआ था लेकिन ठेका रद होने के बाद पुरानी लाइटों का ठेका भी अपने आप खत्म हो गया था। ठेकेदार से पूछा जाए कि जो लाइटें उतारी गई हैं वह कहां रखवाई गई हैं क्योंकि यह निगम की प्रापर्टी है।

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जांच के लिए पार्षदों की कमेटी बनाई जाए, कार्रवाई का फैसला हाउस में हो

खैहरा व राजा ने कहा कि प्रोजेक्ट की जांच के लिए पार्षदों की कमेटी बनाई जाए। इसके निगम के तहत जालंधर शहर के चारों और करतारपुर व आदमपुर विधानसभा क्षेत्र में आते इलाके के पार्षदों को शामिल किया जाए। यह कमेटी जो रिपोर्ट देगी उसे हाउस में रखा जाए और हाउस में ही कार्रवाई का फैसला हो। थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन की रिपोर्ट भी सार्वजनिक की जाए। इससे सारा सच सामने आ जाएगा।

Edited By: Jagran