जालंधर, जेएनएन। सिविल अस्पताल का स्टाफ स्वास्थ्य विभाग की छवि धूमिल करने में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। उन्हें विदेश में देश की बदनामी का भी ध्यान नहीं है। शनिवार को एक्सरे विभाग में तैनात महिला कर्मी मनमानी करती रही और केन्या के कबड्डी खिलाड़ी इंतजार करते। अस्पताल के एसएमओ व डॉक्टरों की ओर से दबाव डालने के बाद खिलाड़ियों के एक्सरे हुए। केन्या की कबड्डी टीम के चार घायल खिलाड़ी जांच व इलाज के लिए सिविल अस्पताल पहुंचे। यहां उन्हें दो घंटे से भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ा। यह तब जब एक खिलाड़ी के पैर की उंगली टूटी हुई थी और उसे काफी दर्द महसूस कर रहा था।

केन्या के ये खिलाड़ी श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को समर्पित इंटरनेशनल कबड्डी टूर्नामेंट में भाग लेने आए हैं। सिविल अस्पताल स्टाफ को इंटरनेशनल टीमों के खिलाड़ियों को प्राथमिकता के आधार पर मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाने के आदेश हैं लेकिन स्टाफ निरंतर निर्देशों की अनदेखी कर रहा है। शुक्रवार को पोलो ग्राउंड पटियाला में न्यूजीलैंड व केन्या में कबड्डी मैच खेला गया था। इस दौरान केन्या के चार खिलाड़ियों मिकागा होलिस ओचिके (32), नयोर ड्राजान ओचिंग (29), वांड्रा हसिस (30) व नाजुगुना रिउबेन (22) घायल हो गए थे। रात को उन्हें जालंधर लाकर होटल में प्राथमिकी सहायता दी गई।

शनिवार को एक्स-रे करवाने के लिए पुलिस सुरक्षा में उन्हें सिविल अस्पताल लाया गया। जहां करीब पौने एक बजे उनकी पर्चियां बनाई और मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया करवाने के लिए इमरजेंसी में दाखिल किया गया। एक्सरे करवाने के लिए चारों खिलाड़ी काफी देर तक एक्स-रे विभाग में खड़े रहे। खिलाड़ियों के साथ आई टीम को एक्स-रे करने वाली महिला कर्मचारी दरकिनार करती रही। अस्पताल स्टाफ के मुलाजिमों ने खिलाड़ियों के एक्सरे प्राथमिकता के आधार पर करने की बात कही तो भी उसका अड़ियल रवैया बरकरार रहा।

मामला अस्पताल के एसएमओ डॉ. कश्मीरी लाल के पास पहुंचा तो उन्होंने एक्स-रे विभाग के डॉ. एमपी सिंह को फोन किया। डॉक्टर के आदेश के बावजूद टालमटौल का रवैया जारी रहा। चारों खिलाड़ियों को करीब डेढ़ घंटा इंतजार करने के बाद एक्स-रे करवाने का मौका मिला।

खिलाड़ियों ने स्टाफ की कार्यप्रणाली सुस्त बताई

इसके उपरांत जब हड्डी रोग माहिर डॉ. गुरमिंदर सिंह ने जांच की तो मिकागा होलिस ओचिके (32) के दाएं पैर की उंगली टूटी हुई थी। डाक्टर ने तुरंत इलाज कर उन्हें रवाना कर दिया। वह करीब तीन बजे वहां से फ्री होने के बाद होटल पहुंचे। जांच करवाने आए खिलाड़ियों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उन्हें दर्द हो रही थी वहीं भूख भी सताने लगी थी। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ की कार्यप्रणाली को काफी धीमा और सुस्त बताया। खिलाड़ियों ने बताया कि केन्या में ग्राउंड काफी सख्त होती है। पंजाब में ग्राउंड काफी नरम होने की वजह से उनके पैर फिसलने से ज्यादा खिलाड़ी चोटिल हुए हैं।

महिला कर्मचारी के रवैये की रिपोर्ट मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को दी

एसएमओ डॉ. कश्मीरी लाल ने बताया कि उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और ड्यूटी पर तैनात संबंधित महिला कर्मचारी के रवैये के बारे में रिपोर्ट अस्पताल की मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को दे दी है। हालांकि उन्होंने अस्पताल के स्टाफ की ओर से खिलाड़ियों के साथ रवैये को लेकर चिंता व्यक्त की है।

Posted By: Pankaj Dwivedi

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