शाम सहगल, जालंधर। इसे पंजाब का सबसे अद्भुत मंदिर कह सकते हैं। यहां वर्ष में केवल एक बार महिलाओं और बच्चों को कुछ घंटे के लिए मां महाकाली के दर्शन करने की अनुमति होती है।  बुधवार का दिन महिलाओं और बच्चों के लिए और भी खास रहा क्योंकि विजयदशमी को एक साल के इंतजार के बाद उन्हें मंदिर के दर्शन करने का मौका मिला। मंदिर उनके लिए साल में एक ही बार खुलता है। वह भी दशहरे के दिन और मात्र कुछ घंटों के लिए।

पंजाब के एकमात्र सिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर की परिक्रमा के प्रांगण में स्थित प्राचीन ट्रस्ट महाकाली मंदिर में इस खास दिन सुबह छह बजे से ही लोगों की लाइन लग गई। शाम तक सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। उसके बाद मंदिर के कपाट महिलाओं व बच्चों के लिए एक साल के लिए फिर बंद कर दिए गए।

मां महाकाली की प्रतिमा जिसे केवल दशहरे वाले दिन ही महिलाओं व बच्चों के दर्शनों के लिए खोला जाता है। जागरण

इस प्राचीन मंदिर में प्रतिष्ठापित मां महाकाली की प्रतिमा के दर्शन महिलाएं व बच्चे केवल एक ही दिन कर सकते हैं। यह नियम सालों पहले मूर्ति की प्रतिष्ठापना करवाने वाले मोहनी बाबा ने निर्धारित किया था। उसके बाद से यह परंपरा कायम है। हालांकि पुरुषों के लिए यह पूरा साल खुला रहता है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अश्वनी कुमार मिंटा ने बताया कि मंदिर की ऊपरी मंजिल में तपस्वी बाबा मोहनी ने तप किया था।

ट्रस्ट महाकाली मंदिर में मां के दर्शनों को लेकर लगी महिलाओं की कतार। जागरण

इस दौरान महिलाओं के उनके नजदीक जाने पर रोक थी। तप पूरा करने के बाद मोहनी बाबा ने मंदिर की ऊपरी मंजिल में दशहरे वाले दिन मां महाकाली की प्रतिमा प्रतिष्ठापित करवाई थी। इसके साथ ही नियम भी निर्धारित कर दिया। उन्होंने बताया कि बुधवार को मंदिर सुबह छह बजे हवन के साथ खोला गया। धार्मिक ग्रंथों में भी है जिक्र इस महाकाली मंदिर का जिक्र कई ग्रंथों में भी है।

महाराजा रणजीत सिंह भी मां महाकाली की उपासना के लिए यहां आते थे। इसी तरह इस मंदिर में हर वर्ष दशहरे वाले दिन ही मेले लगाया जाता है जिसमें दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। संकीर्तन मंडली के सदस्य मां की महिमा का गुणगान गाते है।

Edited By: Sham Sehgal

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