जासं, जालंधर। दशहरा पर्व के मौके पर 16 जगहों में आयोजन होंगे। बड़ा प्रश्न जो आज भी महानगर के लोगों के जहन में है, वह यह कि जालंधर का सबसे पुराना दशहरा उत्सव कौन सा है। तो आइए आज हम आपको इसका उत्तर देते हैं।   जी हां, जालंधर में ही पहली बार करीब 140 साल पहले व्यवस्थित रूप से दशहरा उत्सव मनाने की शुरुआत हुई थी।

गवर्नर लार्ड बर्ल्टन करते थे पुतलों का दहन

श्री राम लीला कमेटी मंदिर नौहरियां (नौहरियां मंदिर कमेटी) की तरफ से वर्ष 1878 में दशहरा पर्व मनाने की प्रथा पं. बलदेव दास ने शुरू की थी। उस समय अंग्रेज गवर्नर लार्ड बर्ल्टन ही पुतलों का दहन किया करते थे। बाद में उनके नाम पर ही खाली पड़ी जगह को बर्ल्टन पार्क का नाम दिया गया था। यही नहीं, दशहरे को लेकर पहली बार शोभायात्रा निकालने की प्रथा भी प्राचीन नौहरियां मंदिर की तरफ से ही शुरू की गई थी जो आज तक बरकरार है। 

इस बार भी रावण, मेघनाद और कुंभकरण के पुतले तैयार

इस बार यहां यहां रावण का 65 फीट, मेघनाद का 60 और कुंभकरण का 55 फीट के पुतले जलाए जाएंगे। वहीं शहर के सबसे बड़े पुतले साईंदास स्कूल ग्राउंड में श्री महाकाली मंदिर दशहरा कमेटी की तरफ से तैयार किए गए हैं। इसमें काली रंग की शाही पौशाक के साथ पंजाबी जूती पहने हुए रावण नजर आएंगे। रावण की सिर से लेकर पांव तक  नीचे तक की ऊंचाई लगभग 70 फीट की है। मेघनाथ 68 और कुंभकरण 65 फीट ऊंचे हैं।

रावण की आंखों से निकलेंगे अंगारे

आयोजकों की तरफ से दशहरा पर्व को खास बनाने के लिए पुतलों में खासकर आतिशबाजी और पटाखों के मुकाबले भी होंगे। रावण के सिर और एक हाथ में चक्कर घूमता हुआ दिखाई देगा। इसके साथ-साथ आंखों से अंगारे निकलेंगे। वहीं आदर्श नगर चौपाटी, गवर्नमेंट ट्रेनिंग कालेज की ग्राउंड में रिमोट कंट्रोल के माध्यम से पुतलों का दहन किया जाएगा।

Edited By: Pankaj Dwivedi

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