कार जीतने के लालच में फंसा किशोर, घर से चुराए पैसे; मोबाइल मैसेज से हुआ साइबर ठगी का जाल बेनकाब
जालंधर में ऑनलाइन गेम के लालच में किशोर ने घर से पैसे चुरा लिए। जांच में साइबर ठगी का मामला ...और पढ़ें

जालंधर में सामने आए आनलाइन गेमिंग से ठगी के मामले।
HighLights
किशोर ने ऑनलाइन गेम में कार जीतने को पैसे चुराए।
साइबर ठग लुभावने विज्ञापनों से युवाओं को फंसाते हैं।
माता-पिता को बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नजर रखनी चाहिए।
सुक्रांत, जालंधर। जालंधर में सामने आए एक मामले ने आनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी के खतरनाक पहलू को उजागर कर दिया। मकसूदां के पास रहने वाले एक एक किशोर ने मोबाइल गेम में कार जीतने के लालच में आकर घर से पैसे चुरा लिए। शुरुआत में परिवार को शक घर के एक शराब पीने वाले चाचा पर हुआ, लेकिन बाद में मोबाइल पर आए ट्रांजेक्शन और गेमिंग मैसेज ने सच्चाई सामने ला दी।
जांच में पता चला कि किशोर ने आनलाइन गेम में पैसे लगाकर महंगे इनाम जीतने की उम्मीद में कई बार भुगतान किया। आजकल इंटरनेट पर ऐसे कई विज्ञापन और वीडियो तेजी से फैल रहे हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि कुछ पैसे लगाकर गेम जीतें और इतने पैसे कमाएं कि कर कार, बाइक या महंगे मोबाइल खरीदे जा सकते हैं।
इसके लिए बाकायदा एड भी होती है। ये आफर्स दिखने में आकर्षक होते हैं, लेकिन असल में यह एक सुनियोजित साइबर ठगी का हिस्सा होते हैं। ऐसे लालच में आकर युवा, किशोर और बच्चे लगातार आनलाइन गेम में लाग इन करते हैं। पहले कुछ पैसे जीतते हैं लेकिन बाद में पैसों की खींच चोरी तक ले जाती है।
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एक बार पैसे डालने पर गेम देती है स्पेशल आफर
पैसों के लालच और पैसों से शानदार जिंदगी जीने के लालच में किशोर और युवा उम्र में जल्दी प्रभावित होते हैं। उन्हें जल्दी पैसा कमाने या महंगी चीजें पाने का आकर्षण होता है। गेमिंग कंपनियां और ठग मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करते हैं, जैसे आप जीत के करीब हैं, लास्ट चांस, स्पेशल आफर जिससे यूजर बार-बार पैसे लगाता है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर दिखने वाले फर्जी वीडियो और नकली विजेताओं की कहानियां भी लोगों को भ्रमित करती हैं।
इन बीतों से फंसते हैं लोग
1. लुभावने विज्ञापन: सोशल मीडिया या गेम के अंदर कार जीतें, 10 लगाएं, लाखों पाएं जैसे आफर्स।
2. फर्जी एप और वेबसाइट: असली जैसे दिखने वाले प्लेटफार्म, जो पैसे जमा करवाते हैं लेकिन रिवार्ड नहीं देते।
3. बार-बार छोटे भुगतान: शुरुआत में छोटे अमाउंट से शुरुआत, फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम लगवाना।
4. एटीपी और लिंक फ्राड: लिंक पर क्लिक करवा कर बैंक डिटेल या ओटीपी हासिल करना।
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ठगी के केस
केस 1. जालंधर केस (हालिया घटना)
एक किशोर ने गेम में कार जीतने के लालच में घर से हजारों रुपये चुरा लिए। परिवार को शक किसी और पर था, लेकिन मोबाइल मैसेज से सच सामने आया। इस मामले में पुलिस शिकायत की गई लेकिन बाद में वापिस भी ली गई।
केस 2. मकसूदां के पास एक पीजी में रहने वाले 12 वीं के छात्र ने 50 लगाओ, आइफोन जीतो वाले गेम में करीब 40 हजार रुपये गंवा दिए। यह पैसे उसने अपनी पढ़ाई के लिए मिले पैसों में से लगाए। बाद में एप बंद हो गया और कोई संपर्क नहीं मिला। जीतने पर भी खाते में पैसे नहीं आए थे।
केस 3. दोआबा चौक के पास रहने वाले एक युवक ने क्रिकेट के नाम पर चलने वाली एक गेम में पैसे गंवा लिए। एक युवक ने आनलाइन बेटिंग एप पर शुरुआत में 500 जीते, जिससे उसका भरोसा बढ़ा। बाद में उसने 1.5 लाख रुपये लगा दिए और सब हार गया।
केस 4. जालंधर की एक लड़की ने इंटरनेट मीडिया पर एक खेलो और जीतो नाम से चली एक गेम की वीडियो देखकर किशोरी ने लिंक पर क्लिक किया और रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर 10 हजार रुपये भेज दिए, लेकिन गेम जीतने पर कोई इनाम नहीं मिला। वहीं कई तरह से स्पेशल आफर लिए, जो पेड थे, लेकिन उनसे भी फायदा नहीं हुआ।
सतर्क रहें, बच्चे व किशोर बनते हैं शिकार
साइबर विशेषज्ञ पलविंदर सिंह बताते हैं कि आनलाइन गेमिंग का लालच अब सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह साइबर अपराध का बड़ा जरिया बन चुका है। खासकर किशोर और युवा इसके आसान शिकार बनते हैं। ऐसे मामलों में परिवार की जागरूकता, संवाद और तकनीकी सतर्कता बेहद जरूरी है, ताकि बच्चों को इस जाल से बचाया जा सके।
इन बातों का ध्यान रखें...
बच्चों पर नजर रखें: उनके मोबाइल उपयोग और डाउनलोड किए गए एप्स की नियमित जांच करें।
पेरेंटल कंट्रोल इस्तेमाल करें: स्क्रीन टाइम और एप एक्सेस सीमित करें।
अनजान लिंक से बचें: किसी भी संदिग्ध लिंक या आफर पर क्लिक न करें।
जागरूकता बढ़ाएं: बच्चों को समझाएं कि आसान पैसा अक्सर धोखा होता है।
बैंक अलर्ट चालू रखें: हर ट्रांजैक्शन का मैसेज तुरंत मिले, ताकि समय रहते पता चल सके।
शिकायत करें: ठगी होने पर तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस में शिकायत दर्ज करें।
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