जागरण संवाददाता, जालंधर : पंजाब सरकार का बजट आने के बाद अब शहरवासियों की नजरें नगर निगम के बजट पर हैं। 2021-22 बजट का एजेंडा इसी सप्ताह कभी भी जारी हो सकता है। इस बार बजट आय बढ़ाने पर केंद्रित होगा। लाकडाउन से नगर निगम की साल 2020-21 की आय में कमी आई है। निगम के सभी डिपार्टमेंट इस समय ना सिर्फ तय किए गए लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं बल्कि 2019-20 की आय को भी नहीं छू पा रहे। निगम ने बजट की तैयारियां कर ली हैं। बजट के लिए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश है कि सभी ब्रांचों के लक्ष्य 2020-21 की तुलना में साल 2021-22 के लिए बढ़ाकर दिए जाएं। नगर निगम की आय के प्रमुख स्त्रोत प्रापर्टी टैक्स, वाटर सप्लाई, बिल्डिंग ब्रांच की आय बढ़ाने पर अभी से ही प्लानिग तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही तहबाजारी विभाग, विज्ञापन ब्रांच, लाइसेंस ब्रांच समेत अन्य छोटे आय के स्त्रोत को भी प्लानिग के दायरे में लाए गए हैं ताकि साल 2020-21 में कोरोना के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जा सके। पहले महीने से ही रिकवरी पर रहेगा जोर

नगर निगम ने आय बढ़ाने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के पहले महीने अप्रैल से ही रिकवरी पर जोर लगाने का फैसला किया है। अमूमन सभी ब्रांच साल के आखिरी दो-तीन महीने में ही रिकवरी पर जोर देती हैं लेकिन इस बार शुरुआत में ही जोर लगा देने का फैसला हुआ है। अधिकारी कह रहे हैं कि इस बार अप्रैल से ही रिकवरी कर फोकस कर लेंगे और पुराने घाटे को पूरा करने की कोशिश रहेगी। प्रापर्टी टैक्स का टारगेट बढ़ेगा

नगर निगम के साल 2021-22 के बजट में प्रापर्टी टैक्स के बजट को बढ़ाकर 45 करोड़ किया जा सकता है। यह पहले 40 करोड़ था। हालांकि साल 2020-21 में अभी तक करीब 23 करोड़ की रिकवरी ही हो पाई। चालू वर्ष में यह रिकवरी 25 से 26 करोड़ के आसपास ही रहने की संभावना है। अगर निगम अगले साल यूनीक आईडी के तहत ही घर के बाहर नंबर प्लेट लगा देता है और प्रापर्टी टैक्स ब्रांच को यूनीक आई से जोड़ लेता है तो रिकवरी में तेजी आ सकती है। बिल्डिंग ब्रांच पर कसेगा शिकजा

बिल्डिंग ब्रांच निगम के लिए बड़ी आय पैदा करने का जरिया बन सकता है। एडहाक कमेटी भी इस कोशिश में है कि शहर में अवैध कालोनियों व इमारतों से फीस वसूली में तेजी आए। कमेटी ने कई अवैध कालोनियों की लिस्ट तैयार की है। अवैध कालोनियों को सरकार की पालिसी के तहत फीस लेकर अगर मंजूरी किया जाता है तो निगम को करोड़ों रुपये मिल सकते हैं। बिल्डिंग ब्रांच में करप्शन के कारण निगम हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान झेलता है। पानी के बिलों से भी वसूली बढ़ाएंगे

पानी के बिल भी आय का बड़ा स्त्रोत है। इसक टारगेट भी इस बार बढ़ाया जा रहा है। साल 2020-21 में टारगेट 30 करोड़ था लेकिन आय फिलहाल 16 करोड़ के आसपास है। 31 मार्च तक रिकवरी पर जोर है लेकिन यह साल 2019-2020 के मुकाबले में काफी कम रहने की आशंका है। लाकडाउन के कारण कई महीने बिल नहीं आए और अब निगम ने लोगों को बिल भेजे तो है लेकिन वसूली के लिए ज्यादा सख्ती नहीं की है। सिर्फ कामर्शियल यूनिट्स पर ही सख्ती की जा रही है।

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