जालंधर, जेएनएन। रक्षाबंधन पर आखिरकार चार माह बाद रविवार को शहर के सभी बाजार खोले गए। इस दौरान लोगों ने त्योहार को लेकर जमकर खरीदारी की। बेकरी से लेकर हलवाई की दुकान और राखी की दुकानों से लेकर गिफ्ट आइटम शॉप पर सुबह से ही भीड़ जमा होने लगी है। लोगों में खरीदारी को लेकर उत्साह का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दुकान खोलने के लिए निर्धारित सुबह 7 बजे के समय से पहले ही कई लोग खरीदारी करने पहुंच गए। इससे उत्साहित दुकानदारों ने भी जमकर कारोबार किया है।

दरअसल, कोरोना वायरस महामारी के चलते सरकार ने रविवार के दिन सख्ती के साथ लॉकडाउन लगाने की घोषणा की हुई है। इसमें आवाजाही के अलावा केवल जरूरी वस्तुओं की दुकानें खोलने की इजाजत है। वहीं इस बार 3 अगस्त को मनाए जा रहे रक्षाबंधन से एक दिन पहले रविवार होने के कारण दुकानें खोलने की इजाजत दी गई है। इसके लिए दुकानदारों द्वारा पिछले कई दिनों से लगातार मांग की जा रही थी। सरकार की मंजूरी के बाद रविवार को सुबह 7 से रात 8 बजे तक सभी दुकानें खोली गईं।

हलवाई से लेकर बेकरी शॉप तक उमड़ी भीड़

रक्षाबंधन को लेकर रविवार के दिन हलवाई से लेकर बेकरी शॉप तथा राखी की दुकानों से लेकर ड्रेसिस की दुकानों पर जमकर खरीदारी की गई। चार माह बाद यह पहला अवसर था जब रविवार के दिन बाजारों में चहल-पहल देखी गई। इस बारे में रैनक बाजार के कारोबारी अमित कुमार बताते हैं कि लॉकडाउन के चलते हर रविवार घर की चारदीवारी में गुजारना पड़ता था। जबकि इस बार रक्षाबंधन के चलते प्रशासन द्वारा दी गई छूट से कारोबार करने का अवसर मिला है।

दुकानदारों के चेहरे खिले, उमस बनी बाधा

4 माह बाद रविवार के दिन दुकानें खुलने से दुकानदारों के चेहरे भी खिल गए। शहर का कोई भी बाजार लोगों की उपस्थिति से अछूता नहीं था। रैनक बाजार, शेखां बाजार, भैरों बाजार, कलां बाजार, अटारी बाजार, पीर बोदला बाजार, चौक कादे शाह से लेकर सैदां सहित सभी बाजार दिन भर खुले रहे। इस बारे में रैनक बाजार के कारोबारी राजकुमार शर्मा बताते हैं कि सरकार ने रक्षाबंधन को देखते हुए बेहतर प्रयास किया है। इससे केवल दुकानदारों को ही फायदा नहीं हुआ बल्कि रक्षाबंधन की खरीदारी करने वाली बहनों को भी बेहतर अवसर मिला है।

अगर रविवार को दुकान में नहीं खुलती तो बहनों को रक्षाबंधन वाले दिन खरीदारी करने में कई तरह की दिक्कतें पेश आ सकती थी। हालांकि, दोपहर में तेज धूप और उमस के बीच ग्राहकों के लिए खरीदारी मुश्किल हो गई। दुकानदारों को भी परेशानियों से जूझना पड़ा।

Posted By: Pankaj Dwivedi

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