जालंधर [मनुपाल शर्मा]। लिक्विड ऑक्सीजन की अनुउपलब्धता से महानगर में ऑक्सीजन सिलेंडर्स का उत्पादन को लगातार प्रभावित हो रहा है। अब भी जालंधर में ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन करने वाले प्लांट को अन्य राज्यों से लिक्विड ऑक्सीजन की सप्लाई नियमित नहीं हो पाई है। इस कारण इंडस्ट्री में उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

गत एक पखवाड़े से भी ज्यादा से जालंधर में ऑक्सीजन सिलेंडर्स की भारी किल्लत चल रही है, लेकिन राहत दिलाने वाले लिक्विड ऑक्सीजन आधारित प्लांट को बाहरी राज्यों से अभी तक सप्लाई मिलनी शुरू नहीं हो सकी है। जालंधर में ऑक्सीजन सिलेंडर तैयार करने वाले तीन प्लांट मौजूद हैं, जिनमें से दो मैकेनिकल तरीके से हवा में से ऑक्सीजन तैयार करने में सक्षम है, जबकि एक लिक्विड ऑक्सीजन आधारित है। दो प्लांट मिलकर रोजाना 1700 के लगभग ऑक्सीजन सिलेंडरों का उत्पादन कर पा रहे हैं, जबकि लिक्विड ऑक्सीजन आधारित प्लांट अभी भी पूरी क्षमता के साथ वर्किंग में नहीं आ सका है। अगर लिक्विड ऑक्सीजन आधारित प्लांट उत्पादन शुरू कर दे तो महानगर में रोजाना लगभग 2400 ऑक्सीजन सिलेंडर तैयार किए जा सकते हैं।

 

इस बीच इंडस्ट्री के कुछ सप्लायर जालंधर के बाहर से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवा कर महंगे रेट पर इंडस्ट्री को मुहैया करवा रहे हैं। जालंधर में स्थित ऑक्सीजन सिलेंडर का उत्पादन करने वाले प्लांटों पर जिला प्रशासन ने खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी है। वे यहां तैयार होने वाले प्रत्येक सिलेंडर की सप्लाई पहल के आधार पर अस्पतालों को भिजवाना सुनिश्चित कर रहे हैं।

अस्पतालों में बढ़ी ऑक्सीजन सिलेंड की खपत

जालंधर में ऑक्सीजन सिलेंडर्स का उत्पादन करने वाले प्लांट के संचालक राजन गुप्ता ने बताया कि फिलहाल महानगर के अस्पतालों को ही ऑक्सीजन सिलेंडर की सप्लाई संभव हो पा रही है। जब तक लिक्विड ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक इंडस्ट्री के लिए सिलेंडर तैयार करना चुनौती बना रहेगा। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत में काफी इजाफा हुआ है। लगातार सिलेंडर खाली होकर रिफिलिंग के लिए प्लांट में पहुंच रहे हैं।

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