जागरण संवाददाता, जालंधर। लोन की किस्त देरी से काटने और फिर उसे 1 साल बाद लौटाए जाने के मामले में शिकायत के बाद कंज्यूमर फोरम ने हुए इसे सेवा में कमी मानते हुए  बैंक पर 1500 रुपये का जुर्माना लगाया है। इसमें 500 रुपये केस खर्च भी शामिल है। फोरम ने आदेश दिया है कि बैंक को यह जुर्माने 45 दिन के अंदर भरना होगा। ऐसा ना होने की सूरत में बैंक को जुर्माने की राशि 6% ब्याज समेत लौटाने होगी।

दो महीने तक बैंक ने नहीं काटी थी लोन की किस्त

शिकायतकर्ता सतीश कुमार निवासी माडल हाउस ने शिकायत में कहा था कि उन्होंने एक बैंक में प्रापर्टी गिरवी रख लोन लिया था। इसकी पहले किस्त सितंबर, 2018 में जानी थी लेकिन बैंक ने उस वक्त किस्त नहीं काटी। जब उन्होंने बैंक से बात की तो उनसे कहा गया कि सिस्टम के जरिए लोन की किस्त तो खुद ही काट ली जाएगी। इसके बाद 2 महीने तक उनके खाते से कोई भी किस्त नहीं काटी गई। नवंबर, 2018 में उनके खाते से तीनों किस्त एक साथ काट ली गईं। इसके साथ ही उन पर 2826 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया गया। इसे लेकर जब उन्होंने बैंक से शिकायत की तो उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई। सुनवाई के दौरान बैंक ने अपनी दलील में कहा कि ग्राहक की तरफ से बैंक को कोई भी ऐसी हिदायत नहीं दी गई थी की उनके सेविंग अकाउंट से लोन के पैसे काटे जाएं जिसके चलते लोन की किस्त को काटने में विलंब हुआ।

एतराज के बाद बैंक ने वापस की थी जुर्माना राशि

मामले में ग्राहक के एतराज जताने के बाद बैंक ने लोन की किस्त लौटाने में हुई देरी पर लगाए गए जुर्माने को वापस कर दिया था। कंजूमर फोरम ने अपने आदेश में कहा कि जिस राशि को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ है, वह शिकायत दाखिल होने से पहले ही 5 नवंबर 2019 को शिकायतकर्ता को वापस की जा चुकी है। उसमें करीब 1 साल का विलंब हुआ है। ऐसे में यह मामला सेवा में कमी का साबित होता है। इसके बाद फोरम ने बैंक को 1500 रुपए जुर्माना भरने के आदेश दिए।

Edited By: Pankaj Dwivedi