जागरण संवाददाता, जालंधर

अधिगृहित की जाने वाली जमीन की पहचान कर ली जाती है। इसके बाद मुआवजे का भुगतान भी कर दिया जाता है। इसके बावजूद अधिगृहित जमीन पर हो रही धान की बिजाई सरकारी कारगुजारी के दावों पर पानी फेरते हुए नजर आती है। शहर को अन्य राज्यों एवं बड़े शहरों से आने वाले भारी यातायात से निजात दिलाने के लिए अति महत्वपूर्ण जालंधर बाईपास का निर्माण अधिगृहित जमीन का कब्जा न मिलने की ही वजह से शुरू ही नहीं हो पा रहा है। अब तो एनएचएआइ भी थक हार कर बैठ गई है।

जालंधर बाईपास का निर्माण करतारपुर के नजदीक गांव काहलवां से शुरू होकर नकोदर रोड स्थित गांव कंग साहबू तक किया जाना है। 47 किलोमीटर लंबे सिक्स लेन बाईपास निर्माण के लिए लगभग ढाई सौ हेक्टेयर जमीन अधिगृहित की गई है। नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया (एनएचएआइ) ने अधिगृहित की गई जमीन के मुआवजे के तौर पर 600 करोड़ रुपये भी राज्य सरकार को ट्रांसफर कर दिए हैं। इसके बावजूद जिला प्रशासन अधिगृहित की गई जमीन का कब्जा एनएचएआइ को नहीं दिला पाया है। इस जमीन में अधिकतर रकबा कृषि अधीन है और जमीन का मुआवजा लेने वाले किसान पहले गेहूं की फसल बेचकर कमाई कर चुके हैं और अब इसी जमीन पर धान की बिजाई कर रहे हैं।

लैंड एक्विजिशन एक्ट 1956 की धारा 3 ई के अंतर्गत एनएचएआइ को अधिगृहित जमीन का अवार्ड हो जाने के 60 दिन के बाद निर्माण के लिए जमीन का उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। अब लगभग एक वर्ष बीत चुका है और लोग मुआवजा ले भी चुके हैं, वह जमीन का कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं हैं। हालांकि अभी भी ऐसे कुछ मामले हैं, जिनमें अधिगृहित की जा चुकी जमीन का मुआवजा दिया ही नहीं जा सका है। मई में जमीन का कब्जा लेने गई एनएचएआइ की टीम को दी गई थीं धमकियां

बीते मई में खजूरला, कुक्कड़ पिड, जमशेर आदि गांवों में जमीन का कब्जा लेने गई एनएचएआइ और ठेकेदार की टीम को सरेआम टांगें तोड़ देने की धमकियां भी दी गई थीं। एनएचएआइ के मुताबिक जमीन पर कब्जा लेने जाने के दौरान दी गई धमकियों एवं कब्जा न छोड़ने संबंधी जिला प्रशासन को लिखित में सूचित किया जा चुका है। उसके बाद कई रिमाइंडर भी भेजे जा चुके हैं। बावजूद इसके कब्जा दिलाने के लिए फिलहाल कुछ ठोस नहीं हो पाया। हालांकि जिला प्रशासन की तरफ से लगातार यह दावे किए जा रहे हैं कि नेशनल हाईवे प्रोजेक्टों के लिए अधिगृहित की गई जमीन का कब्जा एनएचएआइ को दिलाया जा रहा है। इससे पहले आदमपुर में फ्लाईओवर निर्माण के लिए भी अधिगृहित जमीन का कब्जा न मिलने की वजह से काम प्रभावित हुआ था।

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