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जालंधर की बहादुर बेटी कुसुम को छह साल बाद मिला इंसाफ, जानलेवा हमला व मोबाइल छीनने वालों को 10-10 साल की कैद

Published: Thu, 08 Oct 2026 06:50 AM (IST)

जालंधर की बहादुर बेटी कुसुम को छह साल बाद इंसाफ मिला है, जिसमें मोबाइल छीनने और जानलेवा हमला करने वाले ...और पढ़ें

HighLights

  1. कुसुम ने 2020 में मोबाइल छीनने वाले लुटेरों का सामना किया।

  2. दो दोषियों अविनाश और विनोद को 10-10 साल की कैद।

  3. कुसुम को 2023 में राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

दिनेश शर्मा, जालंधर। छह साल पहले मोबाइल छीनकर भाग रहे लुटेरों से अकेली भिड़ जाने वाली जालंधर की बहादुर बेटी कुसुम को आखिरकार इंसाफ मिल गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश परमिंदर सिंह राय की अदालत ने बुधवार को यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।

उस समय आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली कुसुम पर जानलेवा हमला कर उसकी हत्या की कोशिश और मोबाइल छीनने के मामले में दोषी करार देते हुए अदालत ने अविनाश कुमार उर्फ आशू निवासी मोहल्ला बेगमपुरा, बस्ती दानिशमंदा और विनोद कुमार उर्फ झिका निवासी संत भाग सिंह नगर, माडल टाउन को 10-10 साल की कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा अविनाश कुमार को 70 हजार और विनोद कुमार को 75 हजार रुपए जुर्माना भी किया है।

वारदात 30 अगस्त, 2020 की है। उस समय जालंधर के फतेहपुरी मोहल्ला नींबू वाली गली की रहने वाली कुसुम आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। उस दिन ट्यूशन क्लास से घर लौटते समय बाइक सवार दो लुटेरों ने हाथ से उसका मोबाइल छीन लिया। अपनी आनलाइन पढ़ाई के मोबाइल को छीनकर लुटेरों भागता देख कुसुम भी उसके पीछे भागी और लुटेरा मोटरसाइकिल पर बैठकर भाग पाता कुसुम ने उसे कमीज से खींच लिया।

कुसुम बिना डरे लुटेरों से भिड़ गई। खुद को फंसा हुआ देख, लुटेरे ने कुसुम का हाथ छुड़ाने के लिए दातर (हथियार) निकाला और उसकी कलाई पर वार कर दिया. वार इतना गहरा था कि कुसुम के हाथ की नसें कट गईं और खून बहने लगा। इसके बावजूद, कुसुम ने लुटेरे को छोड़ा नहीं।

कुसुम की चीख-पुकार सुनकर आस-पास के स्थानीय लोग और राहगीर मदद के लिए दौड़े और उन्होंने मौके पर ही एक आरोपी को दबोच लिया, जबकि उसका दूसरा साथी बाइक लेकर फरार हो गया। छह साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अदालत के फैसले ने साहस की कहानी में एक और अध्याय जोड़ दिया है।

कोरोना काल में भाई ने ऑनलाइन पढ़ाई के लिए दिया था मोबाइल
कुसुम के पिता उस समय पल्लेदारी की काम करते थे। कुसुम की दो बहने हैं और एक भाई है। भाई ने ही करीब दो महीने पहले 12 हजार रुपए जोड़र कुसुम को कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाएं लगने पर पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदकर दिया था।

भाई के दिए मोबाइल को वापस लेने के लिए लुटेरों से निहत्थे कुसुम भिड़ गई थी। उसे लगा कि एक बार अगर मोबाइल चोरी हो गया तो घर वालों को फिर से पैसे जोड़कर मोबाइल खरीदना पड़ेगा या फिर उसकी पढ़ाई छूट जाएगी। कुसुम ने स्कूल में ताइक्वांडो की ट्रेनिंग भी ली थी, जिसने उसका हौसला बढ़ाया था।

2023 में मिला था राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार
उस समय 15 वर्षीय छात्रा का लुटेरों से बहादुर से भिड़ जाना। जख्मी होने पर भी हार नहीं मानी और एक लुटेरे को दबोच लेने के लिए कुसुम को तत्कालीन डीसी घनश्याम थोरी ने राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार के लिए नामांकित किया था। कोरोना काल के बाद 2023 में कुसुम को यह पुरस्कार प्रदान किया गया था।

यह अवार्ड हर साल विशेष बहादुरी दिखाने वाले बच्चों को सम्मानित करने के लिए राष्ट्रीय बाल कल्याण काउंसिल की तरफ से दिया जाता है। यही नहीं, कुसुम को पंजाब सरकार ने भी सम्मानित किया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक लाख रुपए का इनाम दिया था। तत्कालीन पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत भुल्लर ने भी कुसुम को पुरस्कार के साथ नया मोबाइल दिया था।

दोषी 1. अविनाश कुमार उर्फ आशु ही मुख्य आरोपित था। उसने ही कुुसुम पर दातर से वार किए थे। इसलिए इस केस में हत्या के प्रयास की धारा भी लगाई गइ थी। ये जालंधर के ही बस्ती दानिशमंदा के मोहल्ला बेगमपुरा का रहने वाला है। कुुसुम ने इसी को मौके पर पकड़ा था।

दोषी 2. विनोद कुमार उर्फ झिका भी जालंधर के माडल टाउन इलाके के संत भाग सिंह नगर का रहने वाला है। उस दिन यही मोटरसाइकिल चला रहा था। अविनाश के पकड़े जाने के बाद ये वहां से भाग गया था। पुलिस नेे तलाशी के दौरान इसे काबू किया था।