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IP एड्रेस की तलाश, CCTV में दिखे 8 नकाबपोश उपद्रवी; LPU में कैसे भड़की हिंसा? जांच में जुटी पंजाब पुलिस

Published: Mon, 28 Sep 2026 10:24 PM (IST)

जालंधर के एलपीयू में छात्रा से दुष्कर्म के फर्जी मैसेज के बाद हुई हिंसा की पुलिस जांच कर रही है। ...और पढ़ें

एलपीयू की हिंसा में जुटी पुलिस। फोटो पीटीआई

एलपीयू की हिंसा में जुटी पुलिस। फोटो पीटीआई

HighLights

  1. फर्जी मैसेज फैलाने वाले के आईपी एड्रेस की तलाश जारी।

  2. नकाबपोश बाहरी लोगों ने हिंसा भड़काई, पुलिस कर रही पहचान।

  3. एलपीयू हिंसा के पीछे गहरी साजिश का पुलिस को संदेह।

सुक्रांत, जालंधर। लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के हास्टल में छात्रा से दुष्कर्म का फर्जी मैसेज फैलाने के बाद हुई हिंसा के मामले में पुलिस इसके पीछे रची गई साजिश को बेनकाब करने में जुटी है। शनिवार रात करीब तीन बजे एलपीयू में शुरू हुए प्रदर्शन के 48 घंटे बाद भी फर्जी मैसज से छात्रों को भड़काने वाले तक पहुंचने के लिए उसके आइपी एड्रेस की तलाश में जुटी है।

वहीं, इस मामले की प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों के इस प्रदर्शन में कुछ बाहरी लोग शामिल थे, जिन्होंने चेहरों पर काला पकड़ा बांधकर आगजनी और पत्थरबाजी को अंजाम दिया। सीसीटीवी कैमरों की मदद से पुलिस उन नकाबपोशों की पहचान भी करने में लगी है।

फिलहाल पुलिस को ऐसे आठ नकाबपोशों की तलाश है। पुलिस की जांच यही इशारा कर रही है कि एलपीयू में छात्रों को भड़काना और फिर हिंसा अचानक नहीं हुई, इसके पीछे कोई गहरी साजिश है।

खुलेंगी साजिश की परतें 

यह भी सामने आया है कि जिस फर्जी मैसेज से छात्रों को भड़काया गया वह मैसेज भी पुराना था। यूनिवर्सिटी में वही मैसेज इस घटनाक्रम से तीन से चार दिन पहले भी छात्रों को भेजा गया था। उस समय न तो कोई प्रदर्शन हुआ और न ही कोई उपद्रव। फिर शनिवार रात को उसी मैसेज को आधार पर अफवाह फैलाकर किसने छात्रों को भड़काया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी शुरू हुई है।

फर्जी मैसेज फैलाने वाले के आइपी एड्रेस तक पुलिस पहुंच जाएगी तो इस साजिश की परतें भी खुलने लगेंगी। छात्रों के प्रदर्शन में यूनिवर्सिटी के अंदर बाहरी शरारती तत्व कैसे पहुंचे। पुलिस के हाथ अब तक परिसर के अंदर भी आग लगाने व तोड़फोड़ करने वालों की जो फुटेज हाथ लगी हैं, उनमें भी वह लोग यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं लग रहे हैं।

सीसीटीवी फुटेज में भी यह सामने आया है कि छात्र जब उग्र हुए तो उनमें काला कपड़ा बांधकर चेहरा ढके कुछ लोग शामिल थे। इन नकाबापोशों ने भी पुलिस की गाड़ियों में आग लगाई और पत्थरबाजी के लिए छात्रों को उकसाया। प्रारंभिक जांच में पुलिस का यह भी मानना है कि कुछ और सीसीटीवी फुटेज में उसी हुलिए वाले लोग दिखे हैं। उनके शरीर को देखकर नहीं लगता कि वे यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र हैं। 

रेडिट पर शेयर हुआ था मैसेज

बताया जा रहा है कि फर्जी मैसेज सबसे पहले रेडिट पर पोस्ट किया गया था। पुलिस उसकी तलाश कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मैसेज उसे कहां से मिला था। इस मैसेज में भी केवल एक छात्रा से एक कर्मचारी द्वारा दुष्कर्म किए जाने की बात लिखी थी और कुछ नहीं। उसके पास मैसेज किसने भेजा और उसने उसे आगे किस उद्देश्य से शेयर किया, इसकी जांच चल रही है।

सड़क पर निकले तो बिगड़ी स्थिति

जांच में सामने आया एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भी पुलिस के लिए अहम बन गया है। बताया जा रहा है कि जब तक छात्र विश्वविद्यालय परिसर के अंदर रहे, तब तक स्थिति पूरी तरह बेकाबू नहीं हुई थी। छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन बड़े स्तर पर हिंसा या आगजनी की स्थिति नहीं बनी। इसके बाद जब कुछ छात्रों ने मुख्य गेट खोला और छात्रों का बाहर निकलना शुरू हुआ, तो स्थिति तेजी से बदल गई।

छात्र दोबारा आए और इसी दौरान माहौल हिंसक होने लगा। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की मिनट-दर-मिनट कड़ी तैयार कर रही है कि मुख्य गेट खुलने के बाद कौन-कौन लोग अंदर और बाहर गए। पुलिस को आशंका है कि मुख्य गेट खुलने के बाद कुछ बाहरी लोग भी छात्रों के साथ अंदर पहुंचे। इसके बाद कैंपस में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इसकी पहचान के लिए भी लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगाली जा रही हैं।

सीटी यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर एव एमडी प्रो. (डा.) मनबीर सिंह का कहना है कि हाल के घटनाक्रम यह दर्शाते हैं कि सूचना और वास्तविक ज्ञान के बीच बढ़ता अंतर, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं और अनियंत्रित निराशा कई बार छात्रों की त्वरित प्रतिक्रियाओं का कारण बन सकती हैं।

छात्रों को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी, संवाद और संस्थागत एवं कानूनी प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान भी आवश्यक है। शिक्षण संस्थानों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। इसके खतरे को भी कम नहीं आंका जा सकता है।

आज के समय में छात्रों को गुमराह करना आसान है। इसलिए यह गंभीर मामला है, जिसे बहुत संवेदनशीलता के साथ लेना होगा।