सेवा का आइटम बम

यहां बात करेंगे एक ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप की जिसमें सेवा के आइटम बम ने बवाल खड़ा कर दिया है। ऐसा होता भी क्यों न। यह ग्रुप तो बना था, एक समूह की समस्याओं को एक दूसरे के साथ शेयर करने औऱ इसका समाधान ढूंढने के लिए। अब इसने एक ऐसी दुविधा खड़ी कर दी है जिसने सभी को न सिर्फ अचंभित कर दिया है, बल्कि शर्मिंदा भी किया है। बता दें, यह महाशय कई धार्मिक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व भी कर रहे हैं और एक मर्यादाओं में बंधी पार्टी में भी अच्छा रसूख रखते है। जैसे ही आइटम बम का धमाका हुआ तो हर कोई इसे लेकर अचंभित हो गया। कारण, ऐसा उम्मीद से कहीं परे था। आखिरकार महाशय ने इसके लिए दूसरे को जिम्मेदार ठहराकर अपना पल्ला झाड़ दिया है। आइटम बम की सेवा देने वाला शर्मिंदा है या नहीं यह बाद की बात है, फिलहाल इसे लेकर एक बहस भी छिड़ गई है।

न-न करते प्यार

बात हाल ही में पारित हुए नए कानून से संबंधित है। जिस दिन से इसे लागू किया गया है, देश से लेकर मोहल्ले तक की राजनीति गरमा चुकी है। ऐसे में जो पहले दिन से इसका समर्थन करते हुए एक वर्ग का विरोध करते रहे हैं, आज वहीं उनके साथ कंधे से कंधा मिला मिलाकर चल रहे हैं। उपेक्षित वर्ग के साथ सदियों से 36 का आंकड़ा रखने वाले अब उनका समर्थन देने में तनिक भी देरी नहीं कर रहे। यहीं बस नहीं, इसके लिए बैठकें करने से लेकर संघर्ष में अपनी शमूलियत दर्ज की जा रही है। यहां पर कई टकसाली लोग इस घटना को शमर्नाक भी बताते हैं। कारण, वह आज भी इनके साथ 36 का आंकड़ा रखते हैं। जिसकी चर्चा इन दिनों हर गलियारे में है।

खत्म इंतजार, अब क्रेडिट वॉर

पिछले करीब सात दशकों के बाद आखिरकार एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का धार्मिक स्थल बनाने का निर्णय लिया गया है। लंबे इंतजार के बाद मिली इस सफलता को लेकर अब क्रेडिट वार शुरू हो गया है। इसके लिए बाकायदा मीडिया में आकर अपनी पीठ थपथपाने से भी गुरेज नहीं किया जा रहा। भले ही इसमें उनका किसी तरह से सहयोग रहा हो या फिर न रहा हो, लेकिन क्रेडिट लेने के लिए कतार में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि हाल ही में एक नेता ने बाकायदा प्रेस कांफ्रेस में अब इसके निर्माण के लिए साथियों के साथ शामिल होने की घोषणा भी कर दी है। देखना यह है कि क्या वास्तव में इनकी कोई भूमिका रही है या फिर निर्माण में कोई भूमिका अदा कर सकते हैंआ।

गैरों पे करम अपनों पे सितम

कुछ दिन पहले सरकार जी के सितम झेल रहे एक समुदाय के नेता जी ने उसी का आभार जताया, जिसने यह सितम दिया है। फिर क्या था पूरे समुदाय ने इस नेताजी पर अपने रोष का ठीकरा फोड़ दिया। हालात ऐसे बन गए हैं कि सोशल मीडिया पर नेता जी का विरोध करने से लेकर उनकी नेतागिरी खत्म करने को लेकर के लिए बैठकों का दौर शुरू हो चुका है। खास बात यह है कि नेताजी आज भी सितम देने वालों को ही बोली बोल रहे हैं। कारण उनका उन्हें सितम देने वाली पार्टी ने पहले से ही एक ओहदा दिया हुआ है। इसी कारण वह अपनों के विरोध का सामना तो कर सकते हैं, लेकिन ओहदे से समझौता करना उनके बस में नहीं रहा है। सवाल आखिर ओहदे से मोहब्बत का है, तो अपनों का विरोध इनके लिए खासा महत्व नहीं रखता।

(प्रस्तुतिः शाम सहगल)

 

 

हरियाणा की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

पंजाब की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

 

Posted By: Pankaj Dwivedi

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस

ਪੰਜਾਬੀ ਵਿਚ ਖ਼ਬਰਾਂ ਪੜ੍ਹਨ ਲਈ ਇੱਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ!