जालंधर [भावना पुरी]। कहते हैं जब एक महिला जब कुछ कर दिखाने की ठान लेती है तो उसके हौसलों की रफ्तार रोकी नहीं जा सकती। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है इनरव्हील क्लब की सदस्य इंद्रकिरण ने। इंग्लिश ट्यूशन क्लासेज देकर पहले खुद अपने पैरों पर खड़ी हुई इंद्रकिरण आज अन्य महिलाओं को सशक्त बनाने और पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रही हैं। वह क्लब से जुड़ी महिलाओं और लोगों की भलाई के कामों बढ़चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।

10 साल पहले जब इंद्रकिरण अपनी दोस्त के साथ सुनीता (जिसके दो छोटे बच्चे थे) से मिली तो उसके पास हाथों का हुनर तो था, लेकिन काम नहीं। तब ख्याल आया कि वह ऐसी महिलाओं के लिए कुछ करें जो आत्मनिर्भर बनकर देश व समाज के उत्थान में भागीदार बन सकें। मुद्दा था क्या करें। दोस्त राज गिल के साथ मिलकर सिलाई मशीन खरीदी और सुनीता को दी। उस सिलाई मशीन के सहारे सुनीता ने अपने बच्चों को पढ़ाया और घर संभाला। सुनीता की आत्मनिर्भरता ने इंद्रकिरण का हौसला बढ़ाया और उसके बाद उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखकर अभियान पर निकल पड़ीं। उन्होंने अपनी दोस्त राज के घर पुराने पर्दे व चादरों, कुशन कवर्स से विभिन्न डिजाइन के बैग्स बनाने का काम शुरू किया।


कपड़े तो थे लेकिन पैसों की कमी के कारण एक बार हौसला डगमगाया। उस दौरान इनरव्हील क्लब काम आया। सोशल मीडिया पर हेल्प के लिए पोस्ट किया। इसके बाद उन्हें कपड़ों के साथ आर्थिक मदद मिलनी शुरू हो गई। माली की बेटी कंचन और घरों में काम करने वाली आशा रानी को काम की जरूरत थी। उन्हें भी इस अभियान का हिस्सा बनाकर आगे बढ़ा दिया।
 

डोनेट किए कपड़े के बैग
 

इंद्रकिरण ने बताया कि महिलाओं को एक बैग के बदले 10 से 20 रुपये तक दिए जाते हैं। इसके अलावा जीत सिंह टेलर मास्टर ने मुफ्त में 200 बैग बनाकर डोनेट करने में मदद की। उनकी मेहनत की बदौलत कुछ ही महीनों में 780 बैग बनाकर अर्बन एस्टेट फेस 1 की मंडी में निशुल्क बांटे और पर्यावरण बचाने के लिए लोगों को प्रेरित किया। इसके बाद ये कारवां बढ़ता चला गया। उसके बाद आज तक उन्होंने दोबारा 500 से अधिक बैग बना लिए हैं, जो शनिवार को मंडी में निशुल्क बांटे जाएंगे। इस बढ़ते कारवां में क्लब मेंबर्स व लोग कपड़े और आर्थिक रूप से पूरी मदद कर रहे हैं।

पेरेंट्स भी करते हैं मदद

उनके पास ट्यूशन पढऩे वाले बच्चों के माता पिता भी मदद करते हैं और बच्चे खुद भी अपना बर्थ-डे सेलिब्रेट करने की बजाय आर्थिक मदद के साथ-साथ अपना पुराना सामान डोनेट करते हैं। इंद्रकिरण ने बताया कि हाल ही में उनकी बेटी अनहदप्रीत ने भी अपनी बेटी के जन्मदिन पर डोनेशन दी है। किट्टी ग्रुप और अमृतवाणी कीर्तन ग्रुप की मेंबर्स ने भी आर्थिक सहायता दी है।
 

वाट्सएप और फेसबुक बना जरिया

वाट्सएप और फेसबुक पर मदद के लिए पोस्ट डालते ही लोग मदद के लिए खुद फोन करते हैं। इनव्हील क्लब मेंबर्स भी महिलाओं को रोजगार और डोनेशन देने में मदद के लिए साथ खड़े रहते हैं। जगबंस तूर डोनेशन के लिए आए कपड़ों को बैग्स बनाने के लिए निकालते हैं और अच्छे कपड़ों को प्रयास स्कूल के बच्चों और जरूरतमंद महिलाओं को देते हैं। लोग पुरानी टी शर्ट, लेडीज सूट, पर्दे, चादर, कुशन कवर, पिल्लो कवर, साड़ी जैसे कपड़े डोनेट करते हैं। हाल ही में एक महिला और मिली जिसे उसके पति ने घर से निकाल दिया था। उसके साथ दो छोटे बच्चे थे। उसमें हमने सुनीता का चेहरा देखा और उसे भी सिलाई मशीन दी।

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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