जालंधर,[कमल किशोर]। यदि आपने बिजली चोरी की है तो केवल जुर्माना देने से काम नहीं चलेगा। जुर्माने का भुगतान करने के बाद भी आपके खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है। आमतौर पर ऐसे उपभोक्‍ता जुर्माना अदा कर यह समझ लेते हैं कि वह अब मुसीबत से बच गए। इसके लिए आपको कपाउंडिंग फीस भी जमा करानी होगी। पाॅवरकाम ने इसके प्रावधान किया है कि बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ताओं द्वारा कंपाउंडिंग फीस जमा करवाने पर उसके खिलाफ एफआइआर दर्ज नहीं होगी।

बैंक में जमा होती है कंपाउंडिंग रकम, प्रति किलोवॉट एक हजार रुपये ली जाते हैं रुपये

दरअसल, पॉवरकाम ने बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ता पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ कंपाउंडिेंग फीस का भी प्रावधान कर रखा है। होता यह है कि बिजली चोरी करते हुए पकड़े जाने पर संबंधित उपभोक्ता जुर्माना तो जमा करा देता है, लेकिन कंपाउंडिग फीस जमा नहीं करवाता है। इस कारण ऐसे उपभोक्‍ताओं के खिलाफ एफआइआर दर्ज हो जाती है और उपभोक्ता को कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कंपाउंडिंग फीस की रकम राज्य सरकार के खाते में जाती है।

बैंक में जमा होती है कंपाउंडिंग फीस

पॉवरकाम ने बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ता पर लगा जुर्माना पॉवरकाम विभाग में जमा होता है, जबकि उपभोक्ता को कंपाउंडिंग फीस बैंक में जमा करवानी होती है। फीस जमा होने के बाद उपभोक्ता पर चल रही आपराधिक प्रक्रिया बंद हो जाती है। पुलिस चालान पेश नहीं करती। एक हजार रुपये प्रति किलोवॉट कंपाउंडिंग रकम उपभोक्ता से ली जाती है। उपभोक्ता इस रकम को किश्तों में भी अदा कर सकते हंै।

पॉवरकाम बिजली चोरी करने वालों पर लगा चुकी है 6.69 लाख जुर्नाना

पॉवरकाम बिजली चोरी व यूयूई ( अन-अथोराइज यूज ऑफ इलेक्ट्रीसिटी) वालों पर 6.69 लाख रुपये जुर्माना लगा चुकी है। हाल ही में 3 अगस्त को पॉवरकाम ने बिजली चोरी व यूयूई के केस पकड़े हैं। ईस्ट में 154 कनेक्शन चेक किए थे, 11 यूयूई केस, जिन्हें 27 हजार की पेनल्टी लगाई गई।

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कैंट एरिया में 85 कनेक्शन चेक किए, छह यूयूई के केस पकड़े गए। इन्हें 25 हजार जुर्माना लगा। मॉडल टाउन एरिया के 96 कनेक्शन चेक किए 6 चोरी व दो यूयूई के केस पकड़े, जिन्हें 3.87 लाख रुपये पेनल्टी लगी। वेस्ट एरिया के 158 कनेक्शन चेक किए, 6 चोरी केस, 2 यूयूई के केस, जिन्हें 53 हजार रुपये का जुर्माना किया गया है। फगवाड़ा के 142 कनेक्शन चेक किए, 1 चोरी व 4 यूयूई के केस, जिन्हें 1.77 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई गई है।

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'' बिजली चोरी करने वाले उपभोक्ता पर कंपाउंडिंग फीस जमा न करवाने पर क्रिमिनल प्रोसिडिंग चलती है। अगर उपभोक्ता जुर्माना के साथ-साथ कंपाउंडिंग फीस जमा करवा देता है, तो एफआइआर दर्ज होने से बच सकता है। यह रकम सरकार के खाते में जाती है। बिजली चोरी करना एक अपराध है।

                                                                      - हरजिंदर सिंह बांसल, डिप्टी चीफ इंजीनियर, पॉवरकाम।

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Posted By: Sunil Kumar Jha