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जालंधर में IAS कंवलप्रीत बराड़ से ED ने की आठ घंटे तक पूछताछ, सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुईं पेश

Published: Wed, 19 Aug 2026 03:45 AM (IST)

ईडी ने मोहाली के सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आईएएस कंवलप्रीत कौर बराड़ से जालंधर में आठ घंटे पूछताछ की।

IAS कंवलप्रीत बराड़ से ED ने की आठ घंटे तक पूछताछ। फोटो जागरण

IAS कंवलप्रीत बराड़ से ED ने की आठ घंटे तक पूछताछ। फोटो जागरण

HighLights

  1. आईएएस कंवलप्रीत बराड़ से ईडी ने आठ घंटे पूछताछ की।

  2. पूछताछ मोहाली सनटेक सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई।

  3. भूमि उपयोग परिवर्तन में अनियमितताओं की जांच की जा रही है।

जागरण संवाददाता, जालंधर। मोहाली के सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में मंगलवार को आइएएस अधिकारी कंवलप्रीत कौर बराड़ जालंधर स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश हुईं। ईडी ने उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की।

कंवलप्रीत कौर को ईडी ने समन भेजकर 18 अगस्त के दिन पूछताछ के लिए बुलाया था। मोहाली स्थित प्रोजेक्ट से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर उनसे यह पूछताछ की गई। ईडी की जांच के अनुसार प्रोजेक्ट के लिए जमीन के चेंज आफ लैंड यूज (सीएलयू) में बदलाव की मंजूरी देने में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई थीं।

कंवलप्रीत कौर बराड़ सुबह करीब साढ़े दस बजे अपनी कार से ईडी कार्यालय में पहुंची थीं। वे शाम करीब साढ़े सात बजे ईडी के दफ्तर से बाहर निकली। पूछताछ के बाद वह ईडी दफ्तर से बाहर निकली और वह बिना कुछ बोले वहां से चली गईं। उल्लेखनीय है कि कंवलप्रीत कौर बराड़ वर्ष 2024 में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की निदेशक थीं।

फर्जी सहमति पत्रों का इस्तेमाल

इसी अवधि में सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से संबंधित मंजूरियां दी गई थीं। ईडी की जांच में उन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है, जो उस समय हाउसिंग विभाग में तैनात थे। आरोप है कि प्रोजेक्ट के लिए जमीन मालिकों के जाली हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान वाले फर्जी सहमति पत्रों का इस्तेमाल किया गया था।

इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर प्रोजेक्ट को मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आई है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किस स्तर पर हुआ और मंजूरी देने से पहले संबंधित विभागों की ओर से दस्तावेजों की किस तरह जांच की गई।

जांच एजेंसी प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है। उल्लेखनीय है कि पुलिस की एफआइआर के आधार पर ईडी इस मामले में मनी लांड्रिंग की जांच कर रही है। मामले में मुख्य प्रमोटर अजय सहगल को ईडी पहले ही गिरफ्तार कर चुकी हैं।