जालंधर, [अखंड प्रताप]। शहर के रामनगर इलाके की इंसानियत को झकझोरने वाली वीडियो के बाद अब इस मामले की पूरी कहानी सामने आ चुकी है। वीडियो से ज्यादा किसी आम इंसान को झकझोरती है इसके पीछे की कहानी कि कैसे एक बाप अपनी बीमार बेटी को लेकर तीन दिन जालंधर व अमृतसर के बड़े सरकारी अस्पतालों के चक्कर काटता रहा। किसी अस्पताल ने डाक्टरों की कमी का बहाना बनाया तो कहीं 11 साल की मासूम की मौत के बाद न तो उसका शव पैक किया गया और न ही उसे शव लेकर जाने के लिए एंबुलेंस उपलब्ध करवाई। ..क्योंकि वह गरीब था। फिर भी उस लाचार बाप ने लाखों मिन्नतें कर एंबुलेंस की व्यवस्था की। किसी तरह बेबस बाप बेटी का शव लेकर घर पहुंचा और उधार लेकर एंबुलेंस का किराया चुकाया। जब उसने लोगों से बेटी को कंधा देने की बात की तो उसके अपनों ने यह कहकर मना कर दिया कि तुम्हारी बेटी की मौत कोरोना से हुई है। हम उसे कंधा नहीं दे सकते। साढ़े नौ घंटे तक बेटी का शव घर में पड़ा रहा। फिर बेबस पिता अपने जिगर के टुकड़े को कंधे पर रखकर संस्कार के लिए निकला था।

मूलरूप से ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के बड़गांव थाना क्षेत्र का रहने वाला दिलीप करीब 21 साल पहले जालंधर आया था। यहीं उसने एक महिला से शादी की और उनके तीन बच्चे हैं। सबसे छोटी बेटी सोनू की मौत नौ मई को अमृतसर के मेडिकल कालेज में हुई थी। सोनू कुछ दिनों से उल्टी दस्त और बुखार से पीड़ित थी। अंतिम यात्रा में भी नहीं मिल सका सहारा पिता दिलीप का कहना है कि सोमवार सुबह उसने आसपास के लोगों को बेटी के शव को कंधा देने के लिए कहा था, लेकिन कोई बेटी की अंतिम यात्रा में कंधा देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद वह अपने कमरे से बेटी का शव कंधे पर लादकर अंतिम संस्कार करने निकला। उसके साथ कुछ लोग श्मशान घाट तक जरूर गए थे, लेकिन ये भी उनसे दूरी बनाकर चल रहे थे। लोगों को डर था कि सोनू की मौत कोरोना से हुई है।

दिलीप का कहना है कि वायरल होने वाला वीडियो अंतिम संस्कार के लिए शव को ले जाते समय का है। गम भी बयां भी नहीं कर सकी दिव्यांग लाचार मां, आंसुओं से बहा दर्द मृतका की मां सुनीता दिव्यांग हैं और बोलने में अक्षम हैं। उनके गम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मामले के बाद से ही सुनीता की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे। बहते आंसुओं से ही उनके दर्द का अंदाजा लगाया जा सकता है। गमजदा मां एकटक दीवार को निहारती रहती हैं। न ही वो कुछ बोल सकती हैं और न ही अपना गम किसी को बयां कर सकती हैं। अस्पताल में शव को पैक नहीं किया, तो चादर में लपेटकर ले आए जालंधर दिलीप का दावा है कि बेटी की मौत के बाद अमृतसर के अस्पताल प्रशासन ने शव बिना पैक किए ही उन्हें सौंप दिया। इसके बाद वह शव को अस्पताल के बेड पर बिछाई गई चादर में ही लपेटकर ले आए थे।

अमृतसर से जालंधर के लिए एंबुलेंस ने वसूले 2500 रुपये

दिलीप ने बताया कि बेटी में कोरोना जैसे लक्षण थे और नौ मई को उसकी मौत इलाज के दौरान हो गई। इससे पहले मेडिकल कालेज के डाक्टर बेटी को सर्जिकल वार्ड से निकालकर तीसरी मंजिल पर स्थित एक वार्ड में ले गए थे। सांस में दिक्कत होने के बाद डाक्टरों ने उसे एक मशीन पर रखा था। बेटी की मौत के बाद जब अस्पताल में एंबुलेंस के लिए बात की तो कहा गया कि शाम छह बजे के बाद एंबुलेंस नहीं दी जाती। फिर वह एक एंबुलेंस में बेटी का शव लेकर रविवार देर रात डेढ़ बजे जालंधर पहुंचा। एंबुलेंस चालक ने उससे 2500 रुपये लिए।

जेब में थे 1500, मालिक से 1000 रुपये लेकर चुकाया एंबुलेंस का किराया

प्लास्टिक की फैक्ट्री में काम करने वाले दिलीप का कहना है कि अमृतसर में प्राइवेट एंबुलेंस वाले उससे 5000 रुपये मांग रहे थे। इसके पास इतने पैसे भी नहीं थे। लाख मिन्नतें करने के बाद एक एंबुलेंस वाला शव जालंधर लाने के लिए तैयार हुआ। उसकी जेब में सिर्फ 1500 रुपये ही थे। शव लेकर जालंधर आने के बाद वह अपने फैक्ट्री के मालिक के पास गए और उनसे एक हजार रुपये लेकर एंबुलेंस का किराया चुकाया।

सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने लिया मामले का संज्ञान

दैनिक जागरण ने इस मामले की खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। इसके बाद सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने संज्ञान लेते हुए प्रशासन को हिदायत दी है कि ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त योग्य नहीं है। 10 मई का है वायरल वीडियो दैनिक जागरण की पड़ताल में सामने आया है कि यह वीडियो दस मई की सुबह करीब दस बजे का है। इसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति का नाम दिलीप है, जोकि रामनगर में एक किराए के कमरे में रहता है।

मकान मालिक की मदद से हो सका लकड़ी का इंतजाम

बच्ची का शव लेकर जब दिलीप श्मशान घाट पर पहुंचा तो उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि वह अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी का इंतजाम कर सके। इसके बाद सामने आए मकान मालिक ने उन्हें पैसे देकर शव के दाह संस्कार के लिए लकड़ियां दिलवाई।

कोविड से नहीं हुई है मौत : जालंधर प्रशासन

दैनिक जागरण की ओर से इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद जालंधर जिला प्रशासन की नींद टूटी और प्रशासन ने आनन-फानन में मामले की जांच करवा एक रिपोर्ट भी जारी कर दी। इसके बाद जालंधर के डिप्टी कमिश्नर घनश्याम थोरी ने इस बात का खंडन किया कि बच्ची की मौत कोरोना से हुई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच एसडीएम रैंक के अधिकारी से कराई गई है। बच्ची की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके बाद बच्ची को जालंधर के सिविल अस्पताल से अमृतसर के मेडिकल कालेज रेफर किया गया था। बच्ची की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होने से उसे पीपीई किट में लपेटने के कोरोना प्रोटोकाल लागू नहीं होते हैं। इसके साथ ही ये आश्वासन दिया कि इस दुख की घड़ी में उनके साथ-साथ जालंधर प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ है।

किसी अधिकारी ने नहीं ली सुध : पीड़ित पिता

इसके बाद जब पीड़िता के पिता से बात की गई तो उनका कहना था कि उनसे किसी भी अधिकारी ने संपर्क नहीं किया है। वहीं कोरोना निगेटिव को लेकर दिलीप का दावा है कि जिस दिन बेटी की मौत हुई उस दिन सुबह बेटी को सांस लेने में तकलीफ थी। फिर उसे कोरोना वार्ड में रखा गया था और मौत के बाद उन्हें कोई रिपोर्ट नहीं दी गई।

मृत्यु प्रमाण पत्र पर लगा सवालिया निशान

राम नगर इलाके की सोनू पुत्री दिलीप की मौत को लेकर सरकारी मेडिकल कालेज अमृतसर की ओर से जारी प्रमाण पत्र पर सवालिया निशान लग गया है। मरीज को सर्जिकल यूनिट-5 में दाखिल कर इलाज किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। परंतु प्रमाण पत्र मेडिकल यूनिट के जूनियर रेजीडेंट की ओर से जारी किया जा रहा है। मरीज को सात मई को शाम 6.25 बजे आंत में ब्लाकेज होने पर सर्जिकल यूनिट-5 में दाखिल किया गया था। नौ मई को रात 8.50 बजे उसकी वहां मौत हो गई। नीतियों के मुताबिक उसकी मौत जिस विभाग में होती है शव घर लेकर जाने के लिए प्रमाण पत्र उसी विभाग को देना है। प्रमाण पत्र सर्जरी यूनिट की बजाय मेडिकल यूनिट ने जारी किया। अंतिम संस्कार के लिए जरूरत हो तो इन नंबरों पर करें संपर्क कोविड पेशेंट ट्रै¨कग अधिकारी नवनीत कौर बल ने बताया कि इस मामले में अंतिम संस्कार के लिए न तो परिवार का कोई सदस्य सामने आया, न ही कोई जानने वाला। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो जिला प्रशासन के कंट्रोल रूम नंबर 0181-2224417 और सिविल सर्जन जालंधर के कंट्रोल रूम नंबर 0181-2224848 पर संपर्क करें।