जागरण संवाददाता, फरीदकोट। किसानों को अपना हक लेने के लिए राजनीति में आना ही पड़ेगा। इंसानियत पंसद लोग एक फ्रंट पर एकजुट होकर नई पार्टी बनाकर पंजाब विधानसभा चुनाव में उतरें, जीत हासिल करके अपनी सरकार बनाएं। मौजूदा राजनीतिक दलों से कोई उम्मीद नहीं है। आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी से लोगों को कुछ उम्मीद थी, परंतु वह उम्मीद भी पूरी नहीं हुई।

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष किसान नेता गुरनाम सिंह चढूंनी ने यह बातें फरीदकोट में कही। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से देश को इसलिए आजादी दिलाई थी कि देश में लोगों को सामान अधिकार व समानता होगी। परंतु ऐसा नहीं हुआ। एक ओर देश में भूखमरी बढ़ रही है तो दूसरी ओर अमीर और अमीर होता जा रहा है। भूखमरी के शिकार लोगों की एक दिन की औसत कमाई 35 रुपये भी नहीं है। अमीरों की एक दिन की कमाई कई करोड़ रुपए तक है। चढूंनी ने कहा कि देश के लोगों ने अपने व देश के भले के लिए राजनीतिज्ञों को सत्ता में बिठाया और इन्हीं सत्तासीन लोगों ने देश को मार दिया। जिस सत्ता को देश को बचाना था, उसने देश को कारपोरेट घरानों के हवाले कर दिया। कारपोरेट घराने सबकुछ तो अपने कब्जे में पहले ही कर लिए केवल खेती-किसानी ही बची थी। उस पर भी वह अपना कब्जा जमाने की नीयत से प्रयास कर रहे है, परंतु देश का जागरूक किसान ऐसा नहीं होने देगा।

उन्होंंने कहा कि आंदोलन से उपजी आम आदमी पार्टी से देश के लोगों को उम्मीद थी, कि यह कुछ नए तरह की राजनीति करेंगे, परंतु वह भी कारपोरेट घरानों के खिलाफ कुछ नहीं किए, विपक्ष में रहते हुए उनकी जिम्मेदारी थी, कि वह देश के लोगों की आवाज उठाते परंतु वह भी ऐसा नहीं कर पाए।

सिंघू बार्डर पर हत्या की निंदा

एक सवाल के जबाब में चढूंनी ने कहा कि सिंधू बार्डर पर आज हुई हत्या से आंदोलन को नुकसान पहुंच सकता है। यह बेहद चिंताजनक बात है। बीएसएफ को सरहद से देश के अंदर पचास किलोमीटर तक अधिकार दिए जाने पर उन्होंने कहा कि यह भाजपा की चाल है, अब जो भाजपा के खिलाफ बोलेगा, उसे किसी न किसी मामले में फंसाने की बात करके ब्लैकमेल किया जाएगा।

Edited By: Pankaj Dwivedi