जागरण संवाददाता, जालंधर : नगर निगम के खजाने में पहुंची जीएसटी की किश्त निगम के मुलाजिमों को पूरा वेतन नहीं दिला सकी। निगम के अकाउंट्स के मुताबिक बतौर जीएसटी निगम को इस महीने अब तक केवल दो करोड़ 76 लाख रुपये ही मिले हैं। हालाकि, निगम के खजाने में करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये पहले से मौजूद होने के कारण मंगलवार को मुलाजिमों को वेतन जारी कर दिया गया, लेकिन इसमें सभी को वेतन नहीं मिल पाया और जिन्हें मिला उन्हें भी पूरा नहीं मिला।

निगम के डिप्टी कंट्रोलर फाइनास एंड अकाउंट्स संदीप कुमार ने बताया कि निगम के करीब 3500 मुलाजिमों को वेतन जारी करने के लिए हर माह करीब 13 करोड़ रुपये चाहिए होते हैं। निगम के खजाने में मंगलवार तक करीब सात करोड़ रुपये ही होने के कारण केवल 80 फीसद मुलाजिमों को वेतन मिला। फिलहाल मुलाजिमों को जो वेतन जारी किया गया है, उसमें पीएफ और लोन की राशि का पैसा शामिल नहीं है। इस माह मिलेगी एक और किश्त

डीसीएफए ने बताया कि फिलहाल इस महीने जीएसटी की एक और किश्त मिलने की संभावना है। किश्त मिलते ही सभी मुलाजिमों को पूरा वेतन जारी कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि बीते महीने भी नगर निगम को दो किश्तों में जीएसटी मिला था। पहली किश्त में निगम को सवा पाच करोड़ रुपये और दूसरी किश्त में करीब दस करोड़ रुपये मिले थे। दो महीने पहले मुलाजिमों ने की थी हड़ताल

उल्लेखनीय है कि दो महीने पहले नगर निगम के मुलाजिमों द्वारा हड़ताल कर एक से दस तारीख के बीच में सभी मुलाजिमों को वेतन जारी नहीं होने पर आदोलन की चेतावनी दी गई थी। इसके चलते बीते दो महीने से सरकार द्वारा दो किश्तों में निगम को जीएसटी की किश्त अदा की जा रही है। 10-12 से 20-22 लाख तक पहुंची रिकवरी, पर अभी भी कम

नगर निगम प्रशासन के मुताबिक बीते दो महीनों से निगम की रिकवरी बढ़ी है। बताया गया कि पहले प्रतिदिन 10-12 लाख रुपये रिकवरी होती थी, पर अब यह बढ़कर 20-22 लाख रुपये पहुंच गई है। हालाकि, अभी भी रिकवरी से वेतन पूरा नहीं हो सकता।

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