जासं, जालंधर। 'हाउसिंग फॉर ऑल' स्कीम के तहत सरकार से आर्थिक मदद लेने के इच्छुक आवेदकों को अभी और इंताजर करना होगा। जिस ग्राटं को पाने के लिए जरूरतमंदों ने अपने घरों की छत तोड़ दी थी, उसे पाने के लिए अब उन्हें एक बार फिर री-वेरीफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। नगर निगम कमिश्नर ने सभी विभागों के एसडीओ और जेई को री-वेरीफिकेशन के निर्देश दे दिए हैं। निगम में विपक्ष के नेता सुशील कालिया व अन्य ने मामले में कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ी किया है। उन्होंने सवाल किया कि जब केंद्र सरकार ने ग्रांट जारी कर दी थी तो राज्य की कांग्रेस सरकार ने उसे आगे जारी क्यों नहीं किया। सरकार की नाकामी का खामियाजा खरीब लोगों को उठाना पड़ेगा।

योजना के तहत 1498 आवेदकों को मकान बनाने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.50 लाख रुपये की ग्रांट मिलनी है। यह योजना साल 2015 में लांच की गई थी, लेकिन निगम चार साल में सिर्फ दो लोगों को ही ग्रांट की पहली किश्त जारी कर पाया है। बता दें कि यह ग्रांट 50-50 हजार की तीन किश्तों मे मिलनी है। नींव, दीवारें और छत को तीन लेवल में बांटा गया हैं। हर लेवल का काम खत्म होने पर आवेदक निगम को रिपोर्ट देगा और उसके बाद ही ग्रांट की किश्त जारी होगी।

Housing for All स्कीम के तहत गरीबों को ग्रांट न मिलने का विरोध करते हुए भाजपा नेता सुशील कालिया, अकाली दल नेता गुरप्रीत सिंह और सोशल एक्टिविस्ट भूपिंदर कुमार।

ग्रांट के लिए आवेदन करने वालों की पहले भी वेरीफिकेशन हुई थी, लेकिन डेढ़ साल तक ग्रांट जारी न होने के कारण सभी की री-वेरीफिकेशन की जाएगी। हाल यह है कि लोग 4 साल से मकान रिपेयर के लिए ग्रांट का इंतजार कर रहे हैं। जब यह योजना आई थी तब कहा गया था कि छतों को बदलने का काम होगा लेकिन अब बताया जा रहा है कि पूरा मकान बनाने का प्रोजेक्ट है।
 

केंद्र ने 1.61 करोड़ भेजे, पंजाब सरकार ले रोके

केंद्र सरकार ने योजना के तहत ग्रांट के एक हिस्से के रूप में 1.61 करोड़ रुपये भेजे थे, लेकिन अभी तक यह आवेदकों को जारी नहीं किए गए। भाजपा पार्षद सुशील शर्मा, अकाली नेता गुरप्रीत सिंह और सोशल वर्कर भूपिंदर कुमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार चुनाव से पहले लोगों को ग्रांट जारी कर सकती थी लेकिन सिर्फ इसलिए ग्रांट नहीं दी गई क्योंकि केंद्र की ग्रांट के चलते वोट भाजपा को जाने का डर था।


लोगों ने ग्रांट के चक्कर में घरों की छत तक तोड़ दी

बता दें कि ग्र्रांट के चक्कर में कुछ आवेदकों ने कच्ची छत तोड़ दी लेकिन उन्हें पक्की छत डालने के लिए ग्रांट नहीं मिली। ऐसे में कई लोग बिना छत के रहने को मजबूर हैं। ठंड और गर्मी के बाद अब बरसात में भी इन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। री-वेरीफिकेशन और तीन चरणों में घर बनाने की शर्त से भी लोगों के लिए मुश्किल होगी। संतोखपुरा के गुरुदत्त ने भी नई छत बनाने के लिए पुराने मकान की छत गिरा दी थी लेकिन अब कई महीनों से ग्रांट के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं।
 

कमरा, रसोई और टॉयलेट बनाना होगा
सरकार ने जो ग्रांट तय की है, उसके तहत 1.50 लाख रुपये मिलने हैं। आवेदक को 21 बाय 30 फीट जगह में कंस्ट्रक्शन करनी होगी। इसमें एक कमरा, एक रसोई और टॉयलेट बनाना होगा। इसके अतिरिक्त जो खर्च होगा वह आवेदक को खुद ही करना होगा। सरकार ने जो स्पेसिफिकेशन तय की है उसके मुताबिक साधारण निर्माण पर भी 3 लाख रुपये से ज्यादा खर्च आएगा।
 

अकाली-भाजपा नेताओं ने सरकार पर धोखे का आरोप लगाया

नगर निगम में विपक्ष के नेता सुशील शर्मा, अकाली नेता गुरप्रीत सिंह और कंज्यूमर प्रोटेक्शन के प्रधान भूपिंदर कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि केंद्र सरकार की योजना को पंजाब सरकार ने खराब किया है। केंद्र सरकार जब ग्रांट जारी कर चुकी थी तो ग्रांट क्यों नहीं दी गई। कांग्रेस ने सोचा कि केंद्र सरकार की ग्रांट से लोगों का झुकाव भाजपा की ओर हो जाएगा, इसीलिए ग्रांट ही रोके रखी। यह जरूरतमंद लोगों के साथ धोखा है। अब दोबारा वेरीफिकेशन के आर्डर दिए गए हैं जिससे ग्रांट जारी करने का काम और लेट होगा।

बंद सेवा केंद्रों पर भी सवाल

सुशील शर्मा ने कहा कि अकाली-भाजपा यह मामला डीसी के सामने उठाएंगे। उन्होंने सेवा केंद्र बंद करने पर भी सवाल उठाया। अकाली-भाजपा नेताओं ने कहा कि पंजाब में 1212 में 700 और जालंधर में 96 में से 64 सेवा केंद्र बंद कर दिए गए। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। सेवा केंद्रों पर टोकन लेने के लिए ही लोगों को सुबह 5 बजे से लाइन में लग जाना पड़ता है।

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Posted By: Pankaj Dwivedi