जालंधर [जगदीश कुमार]। सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने वाले ज्यादातर गरीब और जरूरतमंद लोग ही होते हैं। इनमें से कई मरीजों औऱ परिजनों को दाल रोटी के लिए भटकना पड़ता है। महंगाई के जमाने में महंगी दाल रोटी का बिल इलाज के दर्द को बढ़ा देता है। मरीजों व उनके परिजनों के पेट की भूख की आग मिटाने के लिए अमेरिका में बिजनेस करने वाले धन श्री गुरु रामदास के भक्त मंजीत सिंह ने पहल की है। वह लंगर लगाकर उनके लिए खाने की व्यवस्था करते हैं।

अपनी जमीन पर नौ करोड़ रुपये से पांच सितारा लंगर घर बनवाया

मंजीत कहते हैं कि बीमारी से परेशान लोग ही अस्पताल पहुंचते हैं। उनका शारीरिक कष्ट बांट पाना तो मुमकिन नहीं लेकिन मामूली मदद भी उन्हें राहत ही देती है। उन्हें भोजन के लिए कोई परेशानी न हो, इसलिए 'धन गुरु रामदास लंगर सेवा' शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि यह सेवा करने की आवाज उनके दिल से आई थी। दिल ने आवाज दी थी कि धन गुरु रामदास की सेवा करनी है और उनके नाम से लंगर की सेवा से बड़ी कोई सेवा हो ही नहीं सकती। इसी को ध्यान में रखकर 1 फरवरी, 2019 को होशियारपुर के गाव पुरहीरा में खुद की ढाई किले जमीन पर करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से पांच सितारा सुविधा वाले आलीशान लंगर घर का निर्माण किया।

मशीन से बनाई जाती हैं रोटियां

यहां आधुनिक तकनीक से तैयार उपकरणों से लैस बेकरी व रसोई बनाई गई है। रोटियां बनाने के लिए मशीन लगाई गई है। यह एक घंटे में पांच हजार रोटिया तैयार करती है। आटा भी मशीन से गूंथा जाता है। करीब 30 साल से यूएसए में बिजनेस कर रहे मंजीत सिंह समय-समय पर आकर काम की निगरानी करते हैं।

रोजाना तैयार होता है पचास हजार लोगों के लिए लंगर

मंजीत सिंह के भाई गुरलियाकत सिंह बराड़ ने बताया कि उनके भाई ने अकेले ही सफर शुरू किया था। अब सेवा कार्य में कई एनआरआइ और संगत जुड़ चुकी है। रोजाना 45 से 50 हजार के करीब लोगों के लिए लंगर तैयार करके भेजा जाता है। पुरहीरा गांव में तैयार लंगर जालंधर, होशियारपुर, फगवाड़ा, नवाशहर, दसूहा, मुकेरियां, गुरदासपुर, बटाला, फिल्लौर, नकोदर, रोपड़, गढ़शंकर, नवांशहर , गढ़दीवाला और अमृतसर के सिविल अस्पतालों में भेजा जाता है। पीजीआइ (चंडीगढ़) में भी लंगर शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।

लंगर में मिलती है ये चीजें

सुबह सात से नौ बजे तक चाय के साथ बिस्कुट व रस, दोपहर 12 से दो बजे तक तथा शाम पांच से सात बजे तक सब्जी, दाल, रोटी मरीजों व उनके परिजनों को पहुंचाई जाती हैं।

 

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