जालंधर, जेएनएन। पेटीएम की केवाईसी के बहाने ठगों ने कपड़ा विक्रेता के बैंक खाते से 40 हजार की नकदी उड़ा ली। इसका पता तब चला, जब उनके मोबाइल पर बैंक से पैसे निकलने का मैसेज आया। कपड़ा विक्रेता ने अब पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।

जालंधर के माई हीरां गेट में सचदेवा क्लॉथ हाउस चलाने वाले जसविंदर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को किसी ने उन्हें पेटीएम के जरिए दो हजार की पेमेंट की। वह काफी समय से पेटीएम इस्तेमाल नहीं कर रहे थे। फिर भी उन्होंने पेटीएम खोलकर उस पैसे से मोबाइल रिचार्ज करना चाहा। वो नहीं हो सका तो बैंक खाते में ट्रांसफर करने की कोशिश की, फिर भी नहीं हुआ। उन्हें लगा पेटीएम में कोई दिक्कत आ गई है तो उन्होंने गूगल में पेटीएम का हेल्पलाइन नंबर सर्च किया। फिर उस नंबर पर कॉल की तो दूसरी तरफ से उन्हें कहा गया कि केवाईसी अपडेट करना पड़ेगा। इसके बाद उसने आगे किसी का नंबर दे दिया।

कई बार उस नंबर पर फोन करने के बावजूद फोन नहीं उठाया। फिर शनिवार को 11 बजे उन्हें फोन आया और उसने कहा कि वह पेटीएम कंपनी से बोल रहा है और उनका केवाईसी अपडेट करना है। उन्होंने भरोसा कर लिया और फिर उनसे क्विक सपोर्ट मोबाइल एप डाउनलोड कराया गया। उसमें जैसे-जैसे वो बताता रहा, वो भरते रहे। इस दौरान जो भी वो जानकारी भरते, उसके बाद मोबाइल हैंग होता रहा। उन्हें शक हुआ तो वो रोना रोने लगा कि उसे भी आगे कंपनी के अधिकारियों को जवाब देना पड़ता है। फिर उसने कहा कि पेटीएम से मुझे 10 रुपये भेज दो, ताकि पैसा ट्रांसफर हो रहा या नहीं, यह चेक कर सकें।

आॅनलाइन ठगी का शिकार हुए कपड़ा विक्रेता जसविंदर सिंह।

इसके बाद उन्हें कहा कि अब वो पेटीएम में जाकर अपना डेबिट कार्ड नंबर भरें। उन्होंने नंबर भरा और फिर उन्हें सीवीवी कोड भरने को कहा। उन्होंने इससे मना किया तो फोन करने वाले ने कहा कि सिर्फ दस रुपये ही तो ट्रांसफर करने हैं। उसने बात मान ली और जैसे ही सीवीवी कोड भरा तो कुछ मिनटों में उनके खाते से 40 हजार रुपये निकल गए। फिर उन्हें समझ आ गया कि उनके साथ ठगी हो गई है।

कार्रवाई कौन करेगा पुलिस को ही नहीं पता

पीडि़त ने बताया कि वे शिकायत लेकर थाना आठ गए, लेकिन वहां उन्हें एक घंटा बिठाकर रखा गया। फिर इसे साइबर क्राइम का केस बता पुलिस हेडक्वार्टर भेज दिया गया। वो शिकायत देने पहुंचे तो उस वक्त डीसीपी बलकार सिंह बैठे थे। वहां तैनात कर्मचारी अंदर गया और उनकी शिकायत को थाना आठ के लिए मार्क करा दिया। वो बार-बार डीसीपी से मिलकर इसे साइबर क्राइम को मार्क करने की दुहाई देते रहे, लेकिन किसी ने बात नहीं सुनी और अंदर मीटिंग होने की बात कहते रहे। इसके बाद वो थाना आठ गए तो वहां तैनात पुलिस कर्मी ने कहा कि इसकी जांच साइबर क्राइम ही करेगा।

फिर मांगने लगा दूसरे बैंक का अकाउंट नंबर

पकड़े न जाने की वजह से ऑनलाइन ठग इतने बेखौफ हैं कि जसविंदर सिंह से पहले ठगी करने के बाद उसने दोबारा फोन किया। वो फिर से उन्हें पेटीएम की केवाईसी की बात कहने लगा। जब जसविंदर ने कहा कि उनके साथ तो ठगी कर ली है तो उसने कहा कि वह पैसा वापस उनके खाते में रिफंड कर दूंगा। चूंकि तब तक जसविंदर ने एटीएम कार्ड के साथ खाता भी ब्लॉक कर दिया था, इसलिए उसने कहा कि उसमें अब पैसा नहीं जाएगा। अपना कोई दूसरा अकाउंट नंबर दे दो। तब तक जसविंदर समझ चुके थे, इसलिए उन्होंने फोन काट दिया और पुलिस को शिकायत भेज दी।

ठगी से बचने को ऐसे रहें अलर्ट

सर्च न करें हेल्पलाइन नंबर

अगर आपको किसी हेल्पलाइन या कस्टमर केयर नंबर की जरूरत पड़े तो सीधे गूगल पर सर्च कर न ढूंढे। असल में हैकर्स ने गूगल पर ऐसे ढेरों गलत हेल्पलाइन नंबर डाले हुए हैं। जब भी जरूरी तो तो संबंधित बैंक या कंपनी की अधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल एप से ही हेल्पलाइन नंबर देखें।

असुरक्षित मोबाइल एप न करें डाउनलोड

अगर किसी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल के बाद आपको मोबाइल एप डाउनलोड करने को कहा जा रहा है तो ऐसा बिल्कुल न करें क्योंकि जिस कंपनी या बैंक से हेल्पलाइन पर बात कर रहे हैं, वो अपने अलावा किसी भी दूसरी कंपनी के मोबाइल एप को डाउनलोड कराने को नहीं कहती। खासकर क्विक सपोर्ट नाम का यह एप पहले भी कई बार ठग इस्तेमाल कर चुके हैं।

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Posted By: Sat Paul

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