जागरण संवाददाता, जालंधर : श्री बांके बिहारी भागवत प्रचार समिति की ओर से साईं दास स्कूल की ग्राउंड में जारी श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन का नजारा खास था। खराब मौसम व बूंदाबांदी के बावजूद भक्तों के उत्साह में कमी नहीं थी। भक्तों की भीड़ से खचाखच भरा पंडाल व चारों तरफ फूलों की बौछार से होली का अहसास हो रहा था। इसमें कथा व्यास आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी महाराज ने मन की शांति व स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कथा का आगाज श्री गुरु वंदना व ठाकुर जी की आरती उतारने के साथ हुआ।

आचार्य ने कहा कि जीवन में भले ही धन की कमी हो, लेकिन अगर मन में शांति है तो यह कमी कोई मायने नहीं रखती। इसके विपरित अगर में मन में अशांति व पैसों की भरमार तो इसका भी कोई लाभ नहीं। पैसों की तुलना कभी भी सुख-शांति के साथ नहीं की जा सकती। सुदामा प्रसंग का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि वह निर्धन तो थे, लेकिन उनका मन शांत रहता था। उनकी पत्नी सुशीला की इच्छा थी कि सुदामा द्वारिकाधीश से मिलने के लिए खाली हाथ न जाएं, तो मुट्ठी भर चावल साथ भेज दिए। इसे द्वारिकाधीश ने न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि इसका सेवन भी किया। भगवान श्री कृष्ण के साथ सुदामा की मित्रता का वर्णन धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है। इसके उपरांत फूलों की होली खेली गई। उन्होंने 'होली खेल रहे बांके बिहारी' व 'बांके बिहारी को देख छटा, मेरा मन रह गया लटा पटा' सहित कई मनमोहक भजन प्रस्तुत किए।

इस अवसर पर प्रधान सुनील नैय्यर, बृजेश कुमार जुनेजा, उमेश ओरी, संजय सहगल, महेश मखीजा, वरिष्ठ आढ़ती राजू मखीजा, संदीप मलिक, बृजमोहन चड्ढा, चंदन वडेरा, रिकू मल्होत्रा, भूपेंद्र बिल्ला, राहुल बाहरी, नरेंद्र वर्मा, सुमित गोयल, बलविदर शर्मा, अश्विनी कुमार आशू, विकास ग्रोवर, हेमंत थापर, योगेश कत्याल, हितेन्द्र कुमार तलवार, दविदर अरोड़ा. राजकुमार शर्मा, मनीष गुप्ता, गोपी वर्मा, राजवंश मल्होत्रा, अरुण मल्होत्रा, तरुण सरीन, दविदर वर्मा, विनोद खैहरा व अन्य मौजूद थे।

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पिता हैं गुरु, बेहतर स्वास्थ्य के लिए लगाते है ध्यान

बुधवार को 'दैनिक जागरण' के साथ बातचीत के दौरान कथा व्यास आचार्य गौरव कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि उनके पिता मृदल कृष्ण गोस्वामी महाराज ही उनके गुरु है। पिता से प्राप्त ज्ञान को घर-घर पहुंचाने के लिए देश भर में श्रीमद् भागवत कथा का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे रोजाना ध्यान व सात्विक भोजन से सेहत को बेहतर बनाते है। इंसान का शरीर भगवान की देन है। इसकी सुरक्षा करना इंसान की नैतिक जिम्मेदारी है। इसके लिए तप, योग, ध्यान व सात्विक भोजन करना चाहिए।

Posted By: Jagran

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