जागरण संवाददाता, जालंधर। बचाव उपाय अपनाना डेंगू से बचने का बेहतरीन तरीका है। क्या आप जानते हैं कि डेंगू मच्छर के अंडे कूलर की घास-फूस में एक साल तक जिंदा रह सकते हैं और अगले सीजन में आपको या आपके बच्चों को निशाना बना सकते हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि एकस्पर्ट्स की राय है। जिला एपीडिमोलाजिस्ट डा. अदित्य पाल सिंह के अनुसार तापमान गिरने के बाद लोग कूलरों से पानी निकालकर उन्हें बंद कर देते हैं। कूलर की साइड में लगे घास-फूस में डेंगू मच्छर के अंडों को सुरक्षित रहने के लिए अनुकूल तापमान मिल जाता है। अंडे एक साल तक जिंदा रहते हैं। जब अगले सीजन में लोग बिना घास-फूस बदले कूलर में पानी डालकर उसे चलाते हैं तो अंडे दोबारा लारवा बन जाते हैं। कुछ समय बाद ही वे डेंगू मच्छर का रूप धारण कर लोगों को निशान बनाने लगते हैं।

डा. अदित्य पाल सिंह ने बताया कि लोगों को कूलर बंद करने से पहले उन्हें अच्छी तरह से धोना चाहिए। उसमें लगे घास-फूस पैनल की पानी से सफाई कर धूप लगाकर रखने चाहिए। इसके बाद अगले सीजन में इसे दोबारा धोकर लगाना चाहिए। या फिर नए लगा कर कूलर चलाने से डेंगू के डंक से बचाव संभव है।

जालंधर में डेंगू के 19 नए मामले, मरीजों की संख्या 522 हुई

स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की सुस्ती के कारण डेंगू तेजी से पैर पसार रहा है। हर वर्ष विभाग की डेंगू की दस्तक के बाद ही नींद टूटती है। विभाग लोगों को जागरूक कर अपनी पीठ थपथपाने का प्रयास कर रहा है लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार डेंगू मच्छर के अंडे एक साल तक जिंदा रहते हैं। ये अगला सीजन आरंभ होते ही लोगों को निशाना बनाना शुरू कर देते है। सोमवार को सप्ताह के पहले दिन डेंगू के 19 नए मामले आने के बाद जिले में संख्या 522 तक पहुंच गई है।

डा. आदित्य पाल सिंह ने बताया कि सोमवार को सिविल अस्पताल की लैब में हुए टेस्टों में जिले में 19 नए मामले सामने आए। इनमें 12 शहर और 7 देहात से संबंधित हैं। जिले में मरीजों की संख्या 522 तक पहुंच गई है। शहर में 364 तथा देहात से 158 लोग डेंगू का शिकार हो चुके हैं। विभाग की टीमें डेंगू प्रभावित इलाकों का दौरा कर सर्वे कर लोगों को जागरूक कर रही हैं।

Edited By: Pankaj Dwivedi